शोपियां में लश्कर के दो आतंकवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन तीसरे दिन भी जारी, विक्टर फोर्स तैनात
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में लश्कर-ए-तैयबा के दो स्थानीय आतंकवादियों को घेरने के लिए भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) का संयुक्त सर्च ऑपरेशन सोमवार, 7 जुलाई 2025 को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। यह अभियान सैदपोरा गांव के फलों के बागों में शुरू हुआ, जहाँ सर्विलांस कैमरों में दो संदिग्ध आतंकवादी पकड़े गए थे।
ऑपरेशन की शुरुआत और मौजूदा स्थिति
यह अभियान शनिवार को तब शुरू किया गया जब मीमंदर इलाके के एक बाग में लगे सर्विलांस कैमरों में दो आतंकवादी नज़र आए। शुक्रवार की रात से ही इलाके को घेर लिया गया और सोमवार सुबह रोशनी होते ही तलाशी अभियान फिर से तेज़ किया गया। सुरक्षा बलों ने रविवार शाम तक चार गांवों को खाली करा लिया।
फंसे हुए दोनों आतंकवादियों की पहचान लतीफ़ और ज़ाकिर के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, जब सुरक्षाबल नज़दीक पहुँचे तो दोनों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी कड़ी कार्रवाई की और मुठभेड़ छिड़ गई।
विक्टर फोर्स की भूमिका और रणनीतिक चुनौती
सेना की विशेष काउंटर-इंसर्जेंसी यूनिट 'विक्टर फोर्स' ने इलाके में अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं। इस यूनिट का काम बाग की घनी झाड़ियों से होकर भागने के सभी संभावित रास्तों को बंद करना और इलाके में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना है।
गर्मियों के महीनों में पेड़-पौधों की घनी पत्तियाँ एक प्राकृतिक आड़ बन जाती हैं, जिससे निगरानी बेहद मुश्किल हो जाती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, घिरे हुए आतंकवादी इन्हीं 'ब्लाइंड स्पॉट' का फायदा उठाकर घेरा तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं।
आतंकवादियों की पृष्ठभूमि
सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों आतंकवादी दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले हैं। ज़ाकिर कथित तौर पर 2024 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है, जबकि लतीफ़ पिछले साल इस संगठन में शामिल हुआ बताया जाता है। दोनों को 'स्थानीय भर्ती' की श्रेणी में रखा गया है, जो हाल के वर्षों में सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
शोपियां की रणनीतिक संवेदनशीलता
शोपियां जिला लंबे समय से लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट जैसे संगठनों के लिए एक सक्रिय केंद्र रहा है। यह जिला दक्षिण कश्मीर को पीर पंजाल रेंज से जोड़ने वाले ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में काम करता है, जो इसे आतंकी गतिविधियों के लिहाज़ से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
यहाँ के घने सेब के बाग और ऊबड़-खाबड़ भूगोल ने उग्रवादियों को दशकों से छिपने और घेराबंदी से बचने की सुविधा दी है। पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में अल्पसंख्यक समुदायों, स्थानीय मजदूरों और सुरक्षाबलों पर कई बड़े हमले हो चुके हैं।
आगे क्या
सुरक्षाबल इलाके की घेराबंदी बनाए हुए हैं और ऑपरेशन जारी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए अभियानों की गति तेज़ की है। आतंकी नेटवर्क को तोड़ने के लिए भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की इस इलाके में भारी मौजूदगी बनाए रखी जाती है।