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शोपियां में लश्कर के दो आतंकवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन तीसरे दिन भी जारी, विक्टर फोर्स तैनात

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शोपियां में लश्कर के दो आतंकवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन तीसरे दिन भी जारी, विक्टर फोर्स तैनात

सारांश

शोपियां के सेब के बागों में घिरे लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादी — लतीफ़ और ज़ाकिर — तीन दिनों से सुरक्षाबलों को चुनौती दे रहे हैं। घनी पत्तियों की आड़ और 'ब्लाइंड स्पॉट' इस ऑपरेशन को जम्मू-कश्मीर के सबसे जटिल अभियानों में से एक बना रहे हैं।

मुख्य बातें

शोपियां जिले में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा।
आतंकवादियों की पहचान लतीफ़ और ज़ाकिर के रूप में हुई है, दोनों कुलगाम जिले के रहने वाले हैं।
सेना की विशेष यूनिट 'विक्टर फोर्स' ने अतिरिक्त जवान तैनात किए; चार गांव खाली कराए गए।
ऑपरेशन सैदपोरा गांव के फलों के बागों में शुरू हुआ, जहाँ सर्विलांस कैमरे में दोनों आतंकवादी दिखे थे।
गर्मियों में घनी पत्तियाँ निगरानी को कठिन बना रही हैं, जिससे 'ब्लाइंड स्पॉट' का खतरा बढ़ा है।

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में लश्कर-ए-तैयबा के दो स्थानीय आतंकवादियों को घेरने के लिए भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) का संयुक्त सर्च ऑपरेशन सोमवार, 7 जुलाई 2025 को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। यह अभियान सैदपोरा गांव के फलों के बागों में शुरू हुआ, जहाँ सर्विलांस कैमरों में दो संदिग्ध आतंकवादी पकड़े गए थे।

ऑपरेशन की शुरुआत और मौजूदा स्थिति

यह अभियान शनिवार को तब शुरू किया गया जब मीमंदर इलाके के एक बाग में लगे सर्विलांस कैमरों में दो आतंकवादी नज़र आए। शुक्रवार की रात से ही इलाके को घेर लिया गया और सोमवार सुबह रोशनी होते ही तलाशी अभियान फिर से तेज़ किया गया। सुरक्षा बलों ने रविवार शाम तक चार गांवों को खाली करा लिया।

फंसे हुए दोनों आतंकवादियों की पहचान लतीफ़ और ज़ाकिर के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, जब सुरक्षाबल नज़दीक पहुँचे तो दोनों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी कड़ी कार्रवाई की और मुठभेड़ छिड़ गई।

विक्टर फोर्स की भूमिका और रणनीतिक चुनौती

सेना की विशेष काउंटर-इंसर्जेंसी यूनिट 'विक्टर फोर्स' ने इलाके में अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं। इस यूनिट का काम बाग की घनी झाड़ियों से होकर भागने के सभी संभावित रास्तों को बंद करना और इलाके में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना है।

गर्मियों के महीनों में पेड़-पौधों की घनी पत्तियाँ एक प्राकृतिक आड़ बन जाती हैं, जिससे निगरानी बेहद मुश्किल हो जाती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, घिरे हुए आतंकवादी इन्हीं 'ब्लाइंड स्पॉट' का फायदा उठाकर घेरा तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं।

आतंकवादियों की पृष्ठभूमि

सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों आतंकवादी दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले हैं। ज़ाकिर कथित तौर पर 2024 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है, जबकि लतीफ़ पिछले साल इस संगठन में शामिल हुआ बताया जाता है। दोनों को 'स्थानीय भर्ती' की श्रेणी में रखा गया है, जो हाल के वर्षों में सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

शोपियां की रणनीतिक संवेदनशीलता

शोपियां जिला लंबे समय से लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट जैसे संगठनों के लिए एक सक्रिय केंद्र रहा है। यह जिला दक्षिण कश्मीर को पीर पंजाल रेंज से जोड़ने वाले ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में काम करता है, जो इसे आतंकी गतिविधियों के लिहाज़ से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

यहाँ के घने सेब के बाग और ऊबड़-खाबड़ भूगोल ने उग्रवादियों को दशकों से छिपने और घेराबंदी से बचने की सुविधा दी है। पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में अल्पसंख्यक समुदायों, स्थानीय मजदूरों और सुरक्षाबलों पर कई बड़े हमले हो चुके हैं।

आगे क्या

सुरक्षाबल इलाके की घेराबंदी बनाए हुए हैं और ऑपरेशन जारी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए अभियानों की गति तेज़ की है। आतंकी नेटवर्क को तोड़ने के लिए भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की इस इलाके में भारी मौजूदगी बनाए रखी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पाकिस्तान से नहीं बल्कि कुलगाम जैसे पड़ोसी जिलों से आते हैं और स्थानीय भूगोल की गहरी जानकारी रखते हैं। तीन दिन की घेराबंदी यह भी दिखाती है कि घने बागान सुरक्षाबलों की तकनीकी बढ़त को कितना सीमित कर देते हैं। सवाल यह है कि क्या सुरक्षा तंत्र स्थानीय भर्ती की जड़ों — बेरोज़गारी, कट्टरपंथ और सामाजिक अलगाव — को उसी तीव्रता से संबोधित कर रहा है, जितनी तेज़ी से वह मैदानी ऑपरेशन चला रहा है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शोपियां में चल रहा सर्च ऑपरेशन क्या है?
यह भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF का संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियान है, जो शोपियां जिले के सैदपोरा गांव के फलों के बागों में लश्कर-ए-तैयबा के दो स्थानीय आतंकवादियों को घेरने के लिए चलाया जा रहा है। यह ऑपरेशन शनिवार को शुरू हुआ और सोमवार को तीसरे दिन भी जारी था।
फंसे हुए आतंकवादी कौन हैं और वे कब से सक्रिय हैं?
दोनों आतंकवादियों की पहचान लतीफ़ और ज़ाकिर के रूप में हुई है, जो दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले हैं। सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, ज़ाकिर 2024 से और लतीफ़ पिछले साल से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं।
विक्टर फोर्स क्या है और इस ऑपरेशन में इसकी क्या भूमिका है?
विक्टर फोर्स भारतीय सेना की एक विशेष काउंटर-इंसर्जेंसी यूनिट है, जो मुख्यतः दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए तैनात रहती है। इस ऑपरेशन में विक्टर फोर्स ने बाग की घनी झाड़ियों में भागने के रास्ते बंद करने और इलाके में रोशनी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं।
शोपियां आतंकवादी गतिविधियों के लिए इतना संवेदनशील क्यों है?
शोपियां दक्षिण कश्मीर को पीर पंजाल रेंज से जोड़ने वाले ट्रांजिट कॉरिडोर पर स्थित है, जो इसे आतंकी संगठनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। यहाँ के घने सेब के बाग और ऊबड़-खाबड़ भूगोल आतंकवादियों को प्राकृतिक छिपने की जगह देते हैं।
इस ऑपरेशन में स्थानीय लोगों पर क्या असर पड़ा?
सुरक्षाबलों ने रविवार शाम तक मीमंदर इलाके के चार गांवों को खाली करा लिया। इलाके में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है और ऑपरेशन के दौरान सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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