14 जुलाई 2026
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राजौरी में 'ऑपरेशन शेरवाली' आठवें दिन जारी, मंजाकोट के घने जंगलों में 2-3 आतंकियों की तलाश

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राजौरी में 'ऑपरेशन शेरवाली' आठवें दिन जारी, मंजाकोट के घने जंगलों में 2-3 आतंकियों की तलाश

सारांश

राजौरी के पीर पंजाल की दुर्गम वादियों में 'ऑपरेशन शेरवाली' आठ दिन बाद भी जारी है। मंजाकोट के घने जंगलों में 2-3 संदिग्ध आतंकवादियों की तलाश में सेना, पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें डटी हैं — यह उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिससे जम्मू क्षेत्र में आतंकी नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश हो रही है।

मुख्य बातें

ऑपरेशन शेरवाली 30 मई 2026 को राजौरी में लगातार आठवें दिन जारी रहा।
मंजाकोट सेक्टर के गंभीर मुगलान और डोरीमल के जंगलों में 2-3 संदिग्ध आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका।
भारतीय सेना , जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें अभियान में लगी हैं।
इलाके में रुक-रुककर धमाके और गोलीबारी की घटनाएँ हुईं; सुरक्षाबलों ने संदिग्ध ठिकानों पर गोलाबारी भी की।
अब तक किसी भी पक्ष का कोई हताहत नहीं; पीर पंजाल रेंज का दुर्गम भूगोल अभियान में बड़ी चुनौती।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का संयुक्त सर्च ऑपरेशन — जिसे 'ऑपरेशन शेरवाली' नाम दिया गया है — 30 मई 2026 को लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। खुफिया सूचनाओं के आधार पर शुरू किए गए इस अभियान में मंजाकोट सेक्टर के गंभीर मुगलान और डोरीमल के घने जंगलों में 2 से 3 संदिग्ध आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त टीमों ने पिछले हफ्ते संदिग्ध गतिविधियों की खुफिया जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में 2 से 3 व्यक्तियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर पूरे क्षेत्र की सघन तलाशी ली जा रही है। बीते दिनों इलाके में रुक-रुककर धमाके और गोलीबारी भी हुई, और सुरक्षाबलों ने संदिग्ध छिपने की जगहों पर गोलाबारी भी की।

भौगोलिक चुनौती

राजौरी जिले की पीर पंजाल रेंज में स्थित यह जंगली इलाका अपनी खड़ी पहाड़ियों, घने वनों और सीमित पहुँच के कारण आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता है। यह भूगोल ही ऑपरेशन के आठ दिनों तक खिंचने की प्रमुख वजह मानी जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था

ऑपरेशन के दौरान आसपास के इलाकों में निगरानी कड़ी कर दी गई है। जगह-जगह चेकपॉइंट स्थापित किए गए हैं और वाहनों तथा पैदल यात्रियों की आवाजाही पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। पूरे दिन सुरक्षाबलों ने जंगल के विभिन्न हिस्सों में व्यवस्थित और सघन तलाशी अभियान चलाए।

अब तक कोई हताहत नहीं

अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई हताहत नहीं हुआ है। यह जानकारी 30 मई 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि सुरक्षाबलों ने हाल के महीनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों को तेज किया है। लगभग दो हफ्ते पहले नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया था। इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के सहयोगियों और संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। 'ऑपरेशन शेरवाली' इसी व्यापक अभियान की कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खड़ी ढलानें और सीमित पहुँच आतंकवाद-विरोधी अभियानों को बेहद कठिन बनाते हैं। यह ऑपरेशन उस बड़ी रणनीतिक कोशिश का हिस्सा है जिसमें जम्मू क्षेत्र — जो कभी अपेक्षाकृत शांत माना जाता था — में बढ़ती आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश हो रही है। अभी तक कोई हताहत न होना राहत की बात है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले ऑपरेशन स्थानीय नागरिकों की आवाजाही और जनजीवन पर भी असर डालते हैं — यह पहलू अक्सर रिपोर्टिंग में नज़रअंदाज हो जाता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन शेरवाली' क्या है और यह कहाँ चल रहा है?
'ऑपरेशन शेरवाली' जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के मंजाकोट सेक्टर में चलाया जा रहा भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त आतंकवाद-विरोधी सर्च ऑपरेशन है। यह गंभीर मुगलान और डोरीमल के घने जंगलों में संदिग्ध आतंकवादियों की तलाश के लिए शुरू किया गया था।
यह ऑपरेशन क्यों शुरू किया गया?
खुफिया सूचनाओं के आधार पर मंजाकोट सेक्टर के जंगली इलाके में 2 से 3 संदिग्ध आतंकवादियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया।
ऑपरेशन शेरवाली में अब तक क्या हुआ है?
30 मई 2026 तक यह ऑपरेशन आठ दिनों से जारी है। इलाके में रुक-रुककर धमाके और गोलीबारी हुई है, और सुरक्षाबलों ने संदिग्ध ठिकानों पर गोलाबारी भी की। अधिकारियों के अनुसार, अब तक किसी भी पक्ष का कोई हताहत नहीं हुआ है।
यह इलाका आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए इतना चुनौतीपूर्ण क्यों है?
राजौरी की पीर पंजाल रेंज में स्थित यह क्षेत्र खड़ी पहाड़ियों, घने जंगलों और सीमित पहुँच के कारण सुरक्षाबलों के लिए सबसे कठिन इलाकों में गिना जाता है। यही भौगोलिक कठिनाई ऑपरेशन के लंबे खिंचने की मुख्य वजह मानी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर में हाल के आतंकवाद-विरोधी अभियानों का क्या हाल है?
सुरक्षाबलों ने हाल के महीनों में जम्मू-कश्मीर में अभियान तेज किए हैं। लगभग दो हफ्ते पहले नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम करते हुए एक आतंकी को मार गिराया गया था। इससे पहले भी आतंकी सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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