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राजौरी में 'ऑपरेशन शेरवाली': लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद, 15 दिन से जारी है अभियान

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राजौरी में 'ऑपरेशन शेरवाली': लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद, 15 दिन से जारी है अभियान

सारांश

राजौरी के मंजीकोट जंगलों में 15 दिनों से चल रहे 'ऑपरेशन शेरवाली' में एक और बलिदान — लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी दुर्गम खाई में गिरने से शहीद हो गए। व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने श्रद्धांजलि दी; आतंकियों की तलाश में अभियान निर्बाध जारी है।

मुख्य बातें

लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी 7 जून को राजौरी के मंजीकोट क्षेत्र में दुर्गम खाई में गिरने से शहीद हुए।
यह हादसा ' ऑपरेशन शेरवाली ' के 15वें दिन हुआ, जो दोरिमल मुगलान जंगलों में सेना पेट्रोल पर हुई गोलीबारी के बाद शुरू किया गया था।
नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने शहीद अधिकारी की 'कर्तव्यनिष्ठा और अटूट साहस' को श्रद्धांजलि दी।
खड़ी पहाड़ी जमीन, घने जंगल और खराब मौसम के कारण बचाव कार्य बेहद कठिन रहा।
संयुक्त सुरक्षा बलों का कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन मंजीकोट क्षेत्र में अभी भी जारी है।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहे आतंकवाद-रोधी अभियान 'ऑपरेशन शेरवाली' के दौरान रविवार, 7 जून को लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद हो गए। यह अभियान अपने 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है और संयुक्त सुरक्षा बल अभी भी मंजीकोट के घने जंगलों में आतंकियों की तलाश में जुटे हैं।

कैसे हुआ हादसा

लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी उस संयुक्त सुरक्षा टीम का हिस्सा थे जो मंजीकोट क्षेत्र के दुर्गम जंगलों में तलाशी अभियान चला रही थी। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान वे एक गहरी खाई में गिर गए। खड़ी पहाड़ी जमीन, घने जंगल और प्रतिकूल मौसम ने बचाव कार्य को और कठिन बना दिया। साथी जवानों ने तत्काल बचाव प्रयास शुरू किए, लेकिन गंभीर चोटों के कारण लेफ्टिनेंट गोस्वामी को बचाया नहीं जा सका।

सेना की श्रद्धांजलि

नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने शहीद अधिकारी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। कॉर्प्स ने अपने बयान में कहा, 'व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जीओसी और सभी रैंक के जवान लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हैं जिन्होंने ड्यूटी निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी कर्तव्यनिष्ठा, अटूट साहस और निस्वार्थ सेवा हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।' सेना ने शोकसंतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

ऑपरेशन शेरवाली की पृष्ठभूमि

'ऑपरेशन शेरवाली' 15 दिन पहले तब शुरू किया गया था, जब राजौरी जिले के दोरिमल मुगलान जंगलों में एक सेना पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकियों ने गोलीबारी की थी। उस घटना के बाद अतिरिक्त बल तुरंत मौके पर भेजे गए और संयुक्त सुरक्षा बलों ने व्यापक कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन शुरू किया। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा बलों की सतर्कता पहले से बढ़ी हुई है।

अभियान की मौजूदा स्थिति

अधिकारियों ने बताया कि मंजीकोट क्षेत्र में आतंकवाद-रोधी अभियान निर्बाध रूप से जारी है। संयुक्त सुरक्षा बल इलाके में व्यापक तलाशी और घेराबंदी कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस प्रकार के दुर्गम भूभाग में अभियान चलाना सुरक्षाकर्मियों के लिए असाधारण चुनौती पेश करता है — आतंकी खतरे के साथ-साथ भौगोलिक और मौसमी जोखिम भी उतने ही वास्तविक होते हैं।

बलिदान का संदेश

लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का यह बलिदान एक बार फिर रेखांकित करता है कि जम्मू-कश्मीर के दुर्गम इलाकों में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षाबलों को किन विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। अभियान के आगे बढ़ने के साथ सुरक्षा बल आतंकियों को घेरने के प्रयास जारी रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ पिछले दो वर्षों में राजौरी-पुंछ बेल्ट में सुरक्षाबलों पर हमलों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ी है। यह सवाल उठता है कि 15 दिन के लंबे अभियान के बावजूद आतंकी अभी तक पकड़ से बाहर क्यों हैं — क्या भूभाग की जटिलता ही एकमात्र कारण है, या खुफिया तंत्र में भी कोई अंतराल है? मुख्यधारा की कवरेज जहाँ शहादत पर केंद्रित रहती है, वहीं यह भी ज़रूरी है कि ऑपरेशनल पारदर्शिता और सैनिकों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों पर भी सार्वजनिक विमर्श हो।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी कैसे शहीद हुए?
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी राजौरी के मंजीकोट क्षेत्र में 'ऑपरेशन शेरवाली' के दौरान तलाशी अभियान में तैनात थे, जब वे दुर्गम जंगलों में एक गहरी खाई में गिर गए। गंभीर चोटों के कारण बचाव प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
'ऑपरेशन शेरवाली' क्या है और यह कब शुरू हुआ?
'ऑपरेशन शेरवाली' जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चलाया जा रहा आतंकवाद-रोधी अभियान है, जो लगभग 15 दिन पहले तब शुरू हुआ जब दोरिमल मुगलान जंगलों में एक सेना पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकियों ने गोलीबारी की थी। इसके बाद संयुक्त सुरक्षा बलों ने बड़े इलाके को घेरकर कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने शहादत पर क्या कहा?
नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने बयान जारी कर कहा कि जीओसी और सभी रैंक के जवान लेफ्टिनेंट गोस्वामी के असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हैं। कॉर्प्स ने उनकी 'कर्तव्यनिष्ठा, अटूट साहस और निस्वार्थ सेवा' को सदा प्रेरणादायी बताया।
मंजीकोट क्षेत्र में अभियान की अभी क्या स्थिति है?
अधिकारियों के अनुसार राजौरी के मंजीकोट क्षेत्र में आतंकवाद-रोधी अभियान 7 जून को भी जारी रहा। संयुक्त सुरक्षा बल व्यापक तलाशी और घेराबंदी कर रहे हैं ताकि छिपे हुए आतंकियों को पकड़ा जा सके।
इस अभियान में इतनी कठिनाई क्यों है?
मंजीकोट का इलाका खड़ी पहाड़ी जमीन, घने जंगलों और प्रतिकूल मौसम के लिए जाना जाता है, जो तलाशी अभियान और बचाव कार्य दोनों को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाता है। यही भौगोलिक जटिलता आतंकियों को लंबे समय तक छिपे रहने में सहायक होती है।
राष्ट्र प्रेस
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