राजौरी के डोरीमल जंगलों में 'ऑपरेशन शेरावाली' 23वें दिन भी जारी, सेना-पुलिस-CRPF का संयुक्त अभियान
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के डोरीमल जंगलों में चल रहा आतंकवाद-विरोधी 'ऑपरेशन शेरावाली' रविवार, 14 जून 2026 को अपने 23वें दिन में प्रवेश कर गया। गंभीर मुगलान इलाके के घने वनाच्छादित पहाड़ों में चलाया जा रहा यह अभियान इस क्षेत्र के सबसे लंबे आतंकवाद-विरोधी अभियानों में से एक बन चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टुकड़ियाँ डोरीमल की खड़ी ढलानों, पथरीले पहाड़ों और घनी वनस्पति के बीच अपना अभियान जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इलाके की भौगोलिक जटिलता — खड़ी चट्टानें, घनी झाड़ियाँ और संकरे पहाड़ी रास्ते — जमीन पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सुरक्षा बल बड़े पैमाने पर तलाशी, अतिरिक्त निगरानी और क्षेत्र नियंत्रण के उपाय अपनाते हुए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नज़र बनाए हुए हैं।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि
यह अभियान मई के अंत में तब शुरू हुआ, जब सुरक्षा बलों को डोरीमल के घने जंगलों में सशस्त्र घुसपैठियों की मौजूदगी की सूचना मिली। 28 मई को भारी गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों ने घेराबंदी और सख्त कर दी, तथा अतिरिक्त कुमक और लॉजिस्टिक सहायता तैनात की गई ताकि आतंकवादी घने जंगल की आड़ में निकल न सकें।
अधिकारियों के अनुसार, इस बहु-एजेंसी अभियान का मुख्य उद्देश्य ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों में छिपे हथियारबंद घुसपैठियों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करना है।
सैनिक की मृत्यु
7 जून को 'ऑपरेशन शेरावाली' के दौरान एक दुखद हादसा हुआ, जब भारतीय सेना का एक जवान पथरीली ढलान पर चट्टान से फिसल गया। सूत्रों के मुताबिक, वह ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे, तभी संतुलन बिगड़ने से उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चोटों की गंभीरता के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
राजौरी-पुंछ में बढ़ती आतंकी गतिविधियाँ
राजौरी और पुंछ जिले पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के साथ नियंत्रण रेखा (LOC) का एक लंबा और संवेदनशील खंड साझा करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब यह क्षेत्र, जिसे 2019 से पहले काफी हद तक आतंकवाद-मुक्त घोषित किया जा चुका था, एक बार फिर आतंकी गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है।
गौरतलब है कि भारी हथियारों से लैस आतंकी समूहों ने घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ भूभाग और प्राकृतिक गुफाओं को सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करते हुए इस क्षेत्र में पुनः पैठ बनाने की कोशिश की है। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों को बार-बार घात लगाकर किए गए हमलों का सामना करना पड़ा है, जिसके जवाब में बड़े पैमाने पर घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाने पड़े हैं।
आगे की राह
सुरक्षा बलों का दृढ़ संकल्प इस सीमावर्ती जिले में शांति और स्थिरता बहाल करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अभियान की लंबाई और इसमें लगाए गए संसाधन यह स्पष्ट करते हैं कि सुरक्षा एजेंसियाँ इस खतरे को गंभीरता से ले रही हैं। अभियान के अगले चरण पर सभी की नज़र बनी रहेगी।