राजौरी में सीसीटीवी फुटेज में दो संदिग्ध दिखे, सुरक्षा बलों का व्यापक सर्च ऑपरेशन जारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सुरक्षा बलों ने 14 जुलाई 2026 को एक बड़ा संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया, जब थाना मंडी क्षेत्र की सीसीटीवी फुटेज में दो संदिग्ध व्यक्तियों की संदिग्ध गतिविधियाँ दर्ज हुईं। अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य इन संदिग्धों की पहचान करना और उनके ठिकाने का पता लगाना है।
अभियान में कौन-कौन शामिल
सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज सामने आते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG), भारतीय सेना, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीमों ने तत्काल मोर्चा संभाला। बहु-एजेंसी समन्वय यह दर्शाता है कि खुफिया तंत्र ने इस सूचना को गंभीरता से लिया है।
तलाशी का दायरा
सुरक्षा बलों ने भंगई, हसप्लोट, करयोट और कोपरा टॉप समेत आसपास के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में व्यापक छानबीन की। संभावित ठिकानों, आने-जाने के रास्तों और जंगली पगडंडियों की बारीकी से जाँच की जा रही है। पूरे इलाके की घेराबंदी एहतियाती उपाय के तौर पर की गई है।
आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी
गौरतलब है कि अभी तक भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस या किसी अन्य सुरक्षा एजेंसी ने आधिकारिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि सीसीटीवी फुटेज में नज़र आ रहे व्यक्ति आतंकवादी हैं। अधिकारियों के अनुसार, दोनों संदिग्धों की गतिविधियाँ फिलहाल जाँच के दायरे में हैं और पहचान की प्रक्रिया जारी है।
राजौरी की संवेदनशील पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब राजौरी और उसके आसपास के इलाके पहले भी आतंकवादी गतिविधियों के कारण सुरक्षा बलों की विशेष निगरानी में रहे हैं। क्षेत्र की भौगोलिक बनावट — घने जंगल और दुर्गम पहाड़ियाँ — तलाशी अभियानों को चुनौतीपूर्ण बनाती है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध सूचना पर तत्काल और समन्वित कार्रवाई की नीति बनाए रखी गई है।
आगे क्या
फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे मामले की जाँच कर रही हैं। जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ेगा, संदिग्धों की पहचान और उनकी गतिविधियों से जुड़ी अधिक जानकारी सामने आने की संभावना है। अधिकारियों की ओर से आधिकारिक बयान का इंतज़ार है।