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शोपियां के सैदपोरा में CASO के दौरान गोलियों की आवाज़, सुरक्षाबलों ने इलाका सील किया

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शोपियां के सैदपोरा में CASO के दौरान गोलियों की आवाज़, सुरक्षाबलों ने इलाका सील किया

सारांश

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के सैदपोरा इलाके में शनिवार शाम CASO के दौरान गोलियों की आवाज़ सुनी गई। आतंकियों की खुफिया सूचना पर शुरू हुए इस अभियान में इलाका सील कर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए और तलाशी जारी है।

मुख्य बातें

शोपियां जिले के सैदपोरा इलाके में शनिवार शाम CASO के दौरान गोलियों की आवाज़ सुनी गई।
आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने पर संयुक्त सुरक्षाबलों ने अभियान शुरू किया।
गोलियों की आवाज़ के बाद इलाके को पूरी तरह सील कर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार तलाशी अभियान जारी है और स्थिति नियंत्रण में है।
शोपियां 2015 के बाद स्थानीय उग्रवाद का प्रमुख केंद्र रहा है; LeT और HM जैसे संगठनों की यहाँ सक्रियता दर्ज की गई है।

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के सैदपोरा इलाके में शनिवार शाम घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) के दौरान गोलियों की आवाज़ सुनी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने के बाद संयुक्त सुरक्षाबलों ने यह अभियान शुरू किया था।

मुख्य घटनाक्रम

सूत्रों के मुताबिक, गोलियों की आवाज़ सुनते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घेराबंदी वाले क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया और अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए। रिपोर्टें आने तक इलाके में तलाशी अभियान जारी था और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही थी।

यह अभियान दक्षिण कश्मीर के उस जिले में चलाया गया, जो सुरक्षा एजेंसियों की नज़र में संवेदनशील रहा है। अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में आतंकवाद का स्तर पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है, फिर भी खुफिया सूचनाओं के आधार पर समय-समय पर CASO चलाए जाते हैं।

शोपियां की पृष्ठभूमि

शोपियां जिला 1990 के दशक में सशस्त्र हिंसा के उभार के बाद से उग्रवाद प्रभावित रहा है। हालाँकि 2008 के बाद स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया, फिर भी यह जिला अल्पसंख्यकों और सुरक्षाकर्मियों पर लक्षित हमलों का केंद्र रहा है।

2009 में दो स्थानीय महिलाओं की मृत्यु के बाद जिले में व्यापक नागरिक अशांति देखी गई थी, जिसने घाटी को लगभग ठप्प कर दिया था। 2015 के बाद शोपियां स्थानीय उग्रवाद का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जहाँ युवाओं का लश्कर-ए-तैबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन (HM) जैसे संगठनों में शामिल होना दर्ज किया गया।

गौरतलब है कि उग्रवाद के उन वर्षों में स्थानीय कश्मीरी पंडित आबादी का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ और व्यापक हिंसा देखी गई।

सुरक्षाबलों की प्रतिक्रिया

संयुक्त सुरक्षाबलों — जिनमें सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस शामिल हैं — ने खुफिया सूचना मिलते ही त्वरित घेराबंदी की। अतिरिक्त बल भेजे जाने के बाद इलाके की नाकाबंदी और सघन तलाशी जारी रही।

आगे क्या

पुलिस सूत्रों के अनुसार, तलाशी अभियान के नतीजे सामने आने में समय लग सकता है। अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षाबलों का सहयोग करने की अपील की है। यह ऐसे समय में आया है जब घाटी में आतंकवाद-विरोधी अभियानों की तीव्रता बढ़ी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसके अवशेष अभी भी सक्रिय हैं। जब तक अभियान के नतीजे सार्वजनिक नहीं होते, यह घटना एक चेतावनी है कि घाटी में स्थायी शांति का दावा समयपूर्व हो सकता है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शोपियां के सैदपोरा में CASO क्यों चलाया गया?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सैदपोरा इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने के बाद संयुक्त सुरक्षाबलों ने घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) शुरू किया। इस अभियान के दौरान गोलियों की आवाज़ सुनी गई।
CASO के दौरान गोलियाँ चलने के बाद सुरक्षाबलों ने क्या किया?
गोलियों की आवाज़ सुनते ही सुरक्षाबलों ने इलाके को पूरी तरह सील कर दिया और अतिरिक्त बल तैनात किए। पुलिस सूत्रों के अनुसार तलाशी अभियान जारी रहा।
शोपियां जिला सुरक्षा की दृष्टि से कितना संवेदनशील है?
शोपियां 1990 के दशक से उग्रवाद प्रभावित रहा है। 2008 के बाद स्थिति में सुधार आया, लेकिन 2015 के बाद यह स्थानीय उग्रवाद का केंद्र बना और LeT व HM जैसे संगठनों की यहाँ सक्रियता दर्ज की गई। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अब आतंकवाद लगभग नगण्य स्तर पर है।
क्या शोपियां CASO अभियान में कोई आतंकी मारा गया?
रिपोर्टें आने तक किसी हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। तलाशी अभियान जारी था और नतीजों का इंतज़ार था।
शोपियां में 2009 की नागरिक अशांति किस कारण हुई थी?
2009 में दो स्थानीय महिलाओं की मृत्यु के बाद शोपियां में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्होंने घाटी को लगभग ठप्प कर दिया और स्थानीय निवासियों व सुरक्षाबलों के बीच तनाव बढ़ा दिया।
राष्ट्र प्रेस
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