शोपियां के सैदपोरा में CASO के दौरान गोलियों की आवाज़, सुरक्षाबलों ने इलाका सील किया
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के सैदपोरा इलाके में शनिवार शाम घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) के दौरान गोलियों की आवाज़ सुनी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने के बाद संयुक्त सुरक्षाबलों ने यह अभियान शुरू किया था।
मुख्य घटनाक्रम
सूत्रों के मुताबिक, गोलियों की आवाज़ सुनते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घेराबंदी वाले क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया और अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए। रिपोर्टें आने तक इलाके में तलाशी अभियान जारी था और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही थी।
यह अभियान दक्षिण कश्मीर के उस जिले में चलाया गया, जो सुरक्षा एजेंसियों की नज़र में संवेदनशील रहा है। अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में आतंकवाद का स्तर पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है, फिर भी खुफिया सूचनाओं के आधार पर समय-समय पर CASO चलाए जाते हैं।
शोपियां की पृष्ठभूमि
शोपियां जिला 1990 के दशक में सशस्त्र हिंसा के उभार के बाद से उग्रवाद प्रभावित रहा है। हालाँकि 2008 के बाद स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया, फिर भी यह जिला अल्पसंख्यकों और सुरक्षाकर्मियों पर लक्षित हमलों का केंद्र रहा है।
2009 में दो स्थानीय महिलाओं की मृत्यु के बाद जिले में व्यापक नागरिक अशांति देखी गई थी, जिसने घाटी को लगभग ठप्प कर दिया था। 2015 के बाद शोपियां स्थानीय उग्रवाद का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जहाँ युवाओं का लश्कर-ए-तैबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन (HM) जैसे संगठनों में शामिल होना दर्ज किया गया।
गौरतलब है कि उग्रवाद के उन वर्षों में स्थानीय कश्मीरी पंडित आबादी का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ और व्यापक हिंसा देखी गई।
सुरक्षाबलों की प्रतिक्रिया
संयुक्त सुरक्षाबलों — जिनमें सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस शामिल हैं — ने खुफिया सूचना मिलते ही त्वरित घेराबंदी की। अतिरिक्त बल भेजे जाने के बाद इलाके की नाकाबंदी और सघन तलाशी जारी रही।
आगे क्या
पुलिस सूत्रों के अनुसार, तलाशी अभियान के नतीजे सामने आने में समय लग सकता है। अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षाबलों का सहयोग करने की अपील की है। यह ऐसे समय में आया है जब घाटी में आतंकवाद-विरोधी अभियानों की तीव्रता बढ़ी हुई है।