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कावेरी विवाद: 4 सितंबर को किसान संगठन राष्ट्रपति मुर्मु से मिलेगा, कर्नाटक से ₹1 लाख करोड़ मुआवजे की माँग

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कावेरी विवाद: 4 सितंबर को किसान संगठन राष्ट्रपति मुर्मु से मिलेगा, कर्नाटक से ₹1 लाख करोड़ मुआवजे की माँग

सारांश

तमिलनाडु के किसान संगठन ने 4 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का अनुरोध किया है — कर्नाटक पर कावेरी का पानी न छोड़ने का आरोप लगाते हुए ₹1 लाख करोड़ मुआवजे की माँग के साथ। इस बीच तमिलनाडु के 90 जलाशयों में महज 37% पानी बचा है, जो एक साल पहले के स्तर से आधे से भी कम है।

मुख्य बातें

नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स इंटरलिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन ने 4 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का अनुरोध किया है।
संगठन कर्नाटक से ₹1 लाख करोड़ मुआवजे की माँग राष्ट्रपति के समक्ष रखेगा, कावेरी जल न छोड़ने के आरोप में।
तमिलनाडु के 90 जलाशयों में कुल भंडारण 83.124 टीएमसीएफटी — कुल क्षमता का मात्र 37.05% ।
एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में जलाशयों में 189.545 टीएमसीएफटी पानी था — मौजूदा स्तर उससे आधे से भी कम।
58 जलाशयों में 25% से कम भंडारण; मेट्टूर जलाशय अपनी क्षमता के 46.30% पर।
केवल तेनकासी का गुंडार जलाशय पूर्ण क्षमता पर पहुँचा।

तमिलनाडु के किसान संगठन नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स इंटरलिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन ने 4 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का अनुरोध किया है। संगठन कर्नाटक पर कावेरी नदी का पानी न छोड़ने का आरोप लगाते हुए ₹1 लाख करोड़ के मुआवजे की माँग राष्ट्रपति के समक्ष रखना चाहता है, जिससे तमिलनाडु के किसान गंभीर सूखे की चपेट में आ गए हैं। संगठन के राज्य अध्यक्ष पी. अय्याकन्नू ने मंगलवार, 18 अगस्त को यह जानकारी दी।

मुख्य घटनाक्रम

अय्याकन्नू ने कहा, "संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, तमिलनाडु हर महीने कर्नाटक को कावेरी नदी का पानी देता है, लेकिन कर्नाटक ऐसा करने से इनकार कर देता है। नतीजतन, सूखे से सभी बड़े, छोटे और सीमांत किसान प्रभावित हो रहे हैं।" उन्होंने बताया कि 4 सितंबर को संगठन का प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाएगा और राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपेगा।

अय्याकन्नू ने यह भी कहा, "हमने राष्ट्रपति से मिलने की अनुमति के लिए पहले ही एक पत्र भेज दिया है। तमिलनाडु के किसानों को आत्महत्या करने से रोकने के लिए उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।"

तमिलनाडु के जलाशयों की स्थिति

इस बीच, तमिलनाडु के जलाशयों में जलस्तर चिंताजनक रूप से नीचे आ गया है। कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और असामान्य रूप से उच्च तापमान राज्य के जल संसाधनों पर भारी दबाव डाल रहे हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा निगरानी किए जा रहे 90 जलाशयों में सोमवार तक कुल 83.124 टीएमसीएफटी पानी था, जो उनकी कुल क्षमता 224.343 टीएमसीएफटी का मात्र 37.05 प्रतिशत है।

यह स्थिति एक वर्ष पूर्व की तुलना में बेहद खराब है — उसी अवधि में जलाशयों में 189.545 टीएमसीएफटी पानी था। मौजूदा भंडारण पिछले वर्ष के स्तर से आधे से भी कम है, जो बारिश की कमी की गंभीरता को स्पष्ट करता है और कई जिलों में सिंचाई व पेयजल आपूर्ति को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न करता है।

जलाशयवार विवरण

90 जलाशयों में से 58 में 25 प्रतिशत से कम भंडारण है। 14 जलाशयों में 26 से 50 प्रतिशत के बीच, 15 में 51 से 76 प्रतिशत के बीच जल है, और केवल दो जलाशय 80 प्रतिशत का आँकड़ा पार कर पाए हैं। केवल तेनकासी जिले का गुंडार जलाशय अपनी 18.43 मिलियन क्यूबिक फीट की पूर्ण क्षमता तक पहुँचा है।

कावेरी डेल्टा की सिंचाई के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण मेट्टूर जलाशय में सोमवार को 43.275 टीएमसीएफटी पानी था, जो इसकी कुल क्षमता 93.470 टीएमसीएफटी का 46.30 प्रतिशत है।

कावेरी विवाद की पृष्ठभूमि

कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है और तमिलनाडु व कर्नाटक के बीच बार-बार तनाव का कारण बनता है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद जल वितरण को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद थमने का नाम नहीं लेता। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की कमज़ोरी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

आगे क्या होगा

संगठन के 4 सितंबर के दिल्ली दौरे और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के बाद यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार की क्या प्रतिक्रिया आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतर-राज्यीय जल समझौते पर ठोस क्रियान्वयन नहीं होता, तमिलनाडु के किसानों की परेशानियाँ जारी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति के हस्तक्षेप से कोई ठोस नीतिगत बदलाव आएगा। इस बीच, जलाशयों में 37% भंडारण और मेट्टूर का 46% स्तर बताता है कि संकट केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कमज़ोर मानसून और जलवायु परिवर्तन का भी परिणाम है — जिसे सिर्फ अंतर-राज्यीय समझौते से नहीं सुलझाया जा सकता।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु किसान संगठन राष्ट्रपति मुर्मु से क्यों मिलना चाहता है?
नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स इंटरलिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन कर्नाटक पर कावेरी नदी का पानी न छोड़ने का आरोप लगाते हुए ₹1 लाख करोड़ मुआवजे की माँग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के समक्ष रखना चाहता है। संगठन का कहना है कि इससे तमिलनाडु के किसान गंभीर सूखे की चपेट में आ गए हैं।
4 सितंबर की राष्ट्रपति मुलाकात कब और कहाँ होगी?
संगठन के राज्य अध्यक्ष पी. अय्याकन्नू के अनुसार, 4 सितंबर को प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाएगा और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेगा। मुलाकात की अनुमति के लिए पत्र पहले ही भेजा जा चुका है।
तमिलनाडु के जलाशयों में अभी कितना पानी है?
जल संसाधन विभाग के अनुसार, 90 जलाशयों में सोमवार तक 83.124 टीएमसीएफटी पानी था — कुल क्षमता 224.343 टीएमसीएफटी का मात्र 37.05 प्रतिशत। एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में 189.545 टीएमसीएफटी पानी था, यानी मौजूदा स्तर उससे आधे से भी कम है।
कावेरी जल विवाद में कर्नाटक पर क्या आरोप है?
किसान संगठन का आरोप है कि कर्नाटक संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद तमिलनाडु को कावेरी नदी का निर्धारित पानी नहीं छोड़ता। इससे तमिलनाडु के बड़े, छोटे और सीमांत — सभी वर्गों के किसान सूखे से प्रभावित हो रहे हैं।
मेट्टूर जलाशय की स्थिति क्या है?
कावेरी डेल्टा की सिंचाई के लिए सबसे अहम मेट्टूर जलाशय में सोमवार को 43.275 टीएमसीएफटी पानी था, जो इसकी कुल 93.470 टीएमसीएफटी क्षमता का 46.30 प्रतिशत है। यह स्तर सामान्य से काफी कम है और कावेरी डेल्टा के किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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