कावेरी जल निकासी और मेकेदातु परियोजना पर CMA की 51वीं बैठक आज नई दिल्ली में
सारांश
मुख्य बातें
कावेरी प्रबंधन प्राधिकरण (CMA) की 51वीं बैठक मंगलवार, 27 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली है, जिसमें तमिलनाडु को कावेरी नदी जल निकासी और बहुचर्चित मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना पर अहम चर्चा होने की उम्मीद है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब तमिलनाडु के किसान कुरुवाई धान की खेती के मौसम से पहले पानी की उपलब्धता को लेकर गहरी चिंता जता रहे हैं।
बैठक की संरचना और भागीदार
CMA अध्यक्ष एस.के. हलदर की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के प्रतिनिधि शामिल होंगे — ये चारों इकाइयाँ कावेरी नदी जल बंटवारे की व्यवस्था से जुड़ी हैं। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद केंद्र सरकार ने कावेरी प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति का गठन किया था, और प्रत्येक भागीदार राज्य ने दोनों संस्थाओं में अपने प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं।
कुरुवाई सीजन और मेट्टूर बांध की स्थिति
परंपरागत रूप से मेट्टूर बांध से लगभग 12 जून के आसपास पानी छोड़ा जाता है, जो कावेरी डेल्टा क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को सहारा देता है। हालाँकि, किसानों ने चिंता जताई है क्योंकि अब तक पानी छोड़ने का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। बैठक में कर्नाटक से तमिलनाडु को कावेरी जल-बंटवारे समझौते के तहत मासिक जल निकासी दायित्वों पर विस्तृत चर्चा अपेक्षित है।
मेकेदातु परियोजना — विवाद का केंद्र
कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना बैठक का एक प्रमुख विवादास्पद बिंदु बनी रहेगी। तमिलनाडु लगातार इस परियोजना का विरोध करता आया है, यह तर्क देते हुए कि इससे राज्य के कावेरी जल के हिस्से पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह मुद्दा दोनों राज्यों के बीच वर्षों से राजनीतिक और कानूनी तनाव का स्रोत रहा है।
वर्षा और जलाशय समीक्षा
बैठक में कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा के पैटर्न और मौसम की स्थिति की भी समीक्षा होने की संभावना है, जो जलाशयों के भंडारण स्तर और जल उपलब्धता निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन आँकड़ों के आधार पर ही कर्नाटक की जल निकासी की मात्रा और समय-सीमा तय होती है।
क्या होगा आगे
कावेरी बेसिन के कृषि महत्व और जल बंटवारे को लेकर बार-बार उठने वाले विवादों को देखते हुए, इस बैठक के परिणाम पर डेल्टा जिलों के किसानों और चारों राज्यों के राजनीतिक हितधारकों की पैनी नजर रहेगी। बैठक में लिए गए निर्णय कुरुवाई सीजन की तैयारियों की दिशा तय करेंगे।