तमिलनाडु विधानसभा ने मेकेदातु बांध के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया, केंद्र से मंजूरी न देने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा ने शुक्रवार, 19 जून 2026 को सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना का कड़ा विरोध किया गया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि वह इस ₹9,000 करोड़ की संतुलन जलाशय परियोजना को किसी भी रूप में मंजूरी न दे।
मुख्य घटनाक्रम
सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है। उन्होंने राज्य के किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए एकजुटता का आह्वान किया। विजय ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, 'जल हमारा मूलभूत अधिकार और संसाधन है। इसकी रक्षा की जिम्मेदारी हम सभी की है। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब बात हमारी जनता और किसानों के कल्याण की आती है, तो हमें एकजुट रहना चाहिए।'
तमिलनाडु की कानूनी दलीलें
प्रस्ताव में तर्क दिया गया कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय दोनों स्पष्ट रूप से यह स्थापित कर चुके हैं कि कावेरी बेसिन एक 'कमी वाला बेसिन' है, जिसमें उपलब्ध जल पहले से ही तटवर्ती राज्यों के बीच आवंटित किया जा चुका है। इसके आधार पर प्रस्ताव में कहा गया कि बेसिन में कोई भी नई परियोजना शुरू नहीं की जा सकती जिससे आवंटित हिस्से से अधिक जल का उपयोग या भंडारण हो सके। विधानसभा ने केंद्रीय जल आयोग से भी आग्रह किया कि वह कर्नाटक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को संसाधित या अनुमोदित न करे।
कर्नाटक का पक्ष और विवाद की जड़
कर्नाटक लगातार यह तर्क देता रहा है कि मेकेदातु परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य बेंगलुरु की बढ़ती पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करना और 400 मेगावाट जलविद्युत ऊर्जा उत्पन्न करना है। वहीं, तमिलनाडु की आशंका है कि कावेरी पर किसी भी नए जलाशय के निर्माण से निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि यह विवाद दशकों पुराना है और दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल बँटवारे को लेकर कानूनी लड़ाई सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुकी है।
कांग्रेस में आंतरिक फूट
इस मुद्दे ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) के भीतर भी स्पष्ट विभाजन उजागर किया है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार मेकेदातु परियोजना का समर्थन कर रही है, जबकि तमिलनाडु के कांग्रेस नेता TVK के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के विरोध के साथ खड़े हैं। यह स्थिति पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक असहज अंतर्विरोध पैदा करती है।
आगे क्या होगा
इससे पहले मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक की DPR को खारिज करने की माँग की थी और यह रेखांकित किया था कि निचले राज्यों की सहमति के बिना कावेरी पर कोई नया जलाशय नहीं बनाया जाना चाहिए। अब विधानसभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव के बाद यह मामला केंद्र सरकार के समक्ष और अधिक दबाव के साथ उठेगा। कावेरी जल पर निर्भर किसानों की आजीविका और दोनों राज्यों के बीच जल-राजनीति का यह अध्याय निकट भविष्य में और गहरा होने की संभावना है।