मेकेदातु बांध विवाद: तमिलनाडु CM विजय ने कानूनी रणनीति तेज करने के दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार, 25 मई 2026 को चेन्नई सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को मेकेदातु बांध परियोजना से जुड़े विवाद में कानूनी प्रयासों को तत्काल तेज और सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कावेरी नदी के जल पर तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य सरकार हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।
बैठक का संदर्भ और कारण
यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब खबरें सामने आईं कि कर्नाटक सरकार मेकेदातु बांध परियोजना के लिए भूमि पूजन की तैयारी कर रही है। इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु में कावेरी जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर चिंता की लहर पैदा कर दी है। बैठक में कावेरी जल विवाद से जुड़े विशेषज्ञ, कानूनी सलाहकार, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पृष्ठभूमि
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 11 नवंबर 2025 को मेकेदातु परियोजना को चुनौती देने वाली तमिलनाडु सरकार की याचिकाओं का निपटारा कर दिया था। न्यायालय ने यह निर्णय केंद्रीय जल आयोग (CWC) पर छोड़ा था कि परियोजना पूर्व न्यायिक निर्देशों और जल बंटवारे की व्यवस्थाओं के अनुरूप है या नहीं। इसके अतिरिक्त, तमिलनाडु सरकार द्वारा 11 दिसंबर 2025 को दायर पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है।
मुख्यमंत्री के निर्देश
इन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय ने अधिकारियों को विस्तृत कानूनी परामर्श कर अगली कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कावेरी जल पर तमिलनाडु के हितों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक और ठोस कानूनी रणनीति तैयार की जाए। सरकारी बयान के अनुसार, बैठक में परियोजना के कानूनी और तकनीकी दोनों पहलुओं की गहन समीक्षा की गई।
बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी
बैठक में जल संसाधन मंत्री एस. आनंद, लोक निर्माण मंत्री आधारव अर्जुना और ऊर्जा एवं कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मलकुमार उपस्थित रहे। इसके अलावा मुख्य सचिव एम. साइकुमार, एडवोकेट जनरल विजय नारायण, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव सत्यब्रत साहू तथा कावेरी तकनीकी प्रकोष्ठ एवं अंतरराज्यीय नदी जल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आर. सुब्रमणियन ने भी हिस्सा लिया। कुछ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि मेकेदातु विवाद दशकों पुराने कावेरी जल बंटवारे के संघर्ष की नवीनतम कड़ी है, जिसमें तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच बार-बार कानूनी और राजनीतिक टकराव होता रहा है। अब राज्य सरकार नई कानूनी रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है, जिसके स्वरूप का निर्धारण आने वाले दिनों में विशेषज्ञों के परामर्श के बाद किया जाएगा।