31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मेकेदातु बांध विरोध: तमिलनाडु के किसान 23 जून को दिल्ली में केंद्रीय जल मंत्रालय का घेराव करेंगे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मेकेदातु बांध विरोध: तमिलनाडु के किसान 23 जून को दिल्ली में केंद्रीय जल मंत्रालय का घेराव करेंगे

सारांश

तमिलनाडु के किसान 23 जून को दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन विभाग का घेराव करेंगे — मेकेदातु बांध को लेकर कावेरी जल विवाद अब सड़क से राजधानी तक पहुँच गया है। कावेरी डेल्टा की लाखों किसानों की आजीविका दाँव पर है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु कावेरी किसान संगठन ने 23 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन विभाग के मुख्यालय का घेराव करने की घोषणा की।
संगठन के महासचिव पी.आर.
पांडियन ने केंद्र से मेकेदातु परियोजना के लिए कोई भी मंजूरी न देने की माँग की।
जोसेफ विजय से सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने की अपील की गई।
बैठक में परंगीपेट्टई तट के पास इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की हाइड्रोकार्बन खोज परियोजना का विरोध करने का प्रस्ताव भी पारित हुआ।
किसान संगठन ने फसल ऋण माफी के चुनावी वादे को पूरा करने की भी माँग दोहराई।

तमिलनाडु कावेरी किसान संगठन ने 23 जून 2026 को नई दिल्ली में एक बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है, जिसमें राज्य के अलग-अलग जिलों से किसान केंद्रीय जल संसाधन विभाग के मुख्यालय का घेराव करेंगे। यह आंदोलन कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना के खिलाफ है, जिसे किसान संगठन कावेरी डेल्टा की खेती और तमिलनाडु के जल अधिकारों के लिए गंभीर खतरा मानता है।

मुख्य घटनाक्रम

तिरुवरूर में आयोजित तमिलनाडु कावेरी किसान संगठन की राज्य समिति की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसान 23 जून को दिल्ली में एक मार्च निकालेंगे और केंद्र सरकार से मेकेदातु परियोजना के लिए किसी भी प्रकार की मंजूरी न देने की माँग करेंगे।

संगठन के महासचिव पी.आर. पांडियन ने कहा कि तमिलनाडु की सहमति के बिना इस बांध का निर्माण कावेरी नदी के निचले हिस्से में खेती करने वाले किसानों के हितों को सीधे नुकसान पहुँचाएगा और राज्य के जल हिस्से पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तमिलनाडु की कड़ी आपत्तियों के बावजूद कर्नाटक इस परियोजना की योजनाओं पर आगे बढ़ रहा है।

किसानों की मुख्य माँगें

किसान संगठन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से अपील की है कि वे मेकेदातु परियोजना को रोकने के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएँ। पांडियन ने कहा कि राज्य सरकार को कावेरी पर निर्भर लाखों किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

इसके अलावा, किसान संगठन ने यह भी उम्मीद जताई कि सरकार आगामी विधानसभा सत्र में फसल ऋण माफी से संबंधित घोषणा करेगी और कृषि ऋणों की पूर्ण माफी के चुनावी वादे को पूरा करेगी।

मेकेदातु विवाद की पृष्ठभूमि

मेकेदातु परियोजना कई वर्षों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद का केंद्र रही है। कर्नाटक का प्रस्ताव कावेरी नदी पर एक जलाशय बनाने का है, जिसे तमिलनाडु के डेल्टा जिलों के किसान संगठन लगातार यह कहते हुए विरोध करते आए हैं कि नदी की उल्टी धारा में पानी जमा करने से राज्य में सिंचाई के लिए आवश्यक जलप्रवाह बाधित हो सकता है।

गौरतलब है कि कावेरी डेल्टा क्षेत्र तमिलनाडु का प्रमुख कृषि क्षेत्र है और यहाँ के किसान पूरी तरह कावेरी के जल पर निर्भर हैं। किसानों की आशंका है कि प्रस्तावित जलाशय से पानी की उपलब्धता में कमी आएगी, जिससे खेती पर सीधा असर पड़ेगा।

हाइड्रोकार्बन परियोजना पर भी विरोध

मेकेदातु मुद्दे के अलावा, बैठक में परंगीपेट्टई तट के पास इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के प्रस्तावित हाइड्रोकार्बन खोज परियोजना का विरोध करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। संगठन ने इस परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभाव और तटीय समुदायों, मछुआरों तथा कृषि-आधारित आजीविका पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।

आगे क्या होगा

पांडियन ने स्पष्ट किया कि 23 जून का विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार को एक कड़ा संदेश देगा कि पूरा तमिलनाडु मेकेदातु परियोजना का विरोध करता है। विभिन्न जिलों के कई किसान संगठनों के एकजुट होकर दिल्ली पहुँचने से यह आंदोलन राज्य की जल राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दिल्ली तक आंदोलन ले जाने का यह कदम बताता है कि राज्य स्तरीय विरोध अब केंद्र पर सीधा दबाव बनाने की रणनीति में बदल रहा है। सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार किसी एक राज्य की आपत्ति को नजरअंदाज कर सकती है जब कावेरी जल न्यायाधिकरण का फैसला पहले से ही लागू है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से कानूनी कदम उठाने की अपील यह भी संकेत देती है कि किसान संगठन राजनीतिक दलों को भी जवाबदेह ठहराने की स्थिति में आ रहे हैं। यदि केंद्र ने परियोजना को हरी झंडी दी, तो यह अंतरराज्यीय जल विवाद एक बड़े संवैधानिक संकट का रूप ले सकता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेकेदातु बांध परियोजना क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
मेकेदातु बांध परियोजना कर्नाटक का एक प्रस्तावित जलाशय है जो कावेरी नदी पर बनाया जाना है। तमिलनाडु के किसान इसका विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए आवश्यक जलप्रवाह बाधित होगा और राज्य के जल अधिकार प्रभावित होंगे।
23 जून को दिल्ली में किसान क्या करेंगे?
तमिलनाडु कावेरी किसान संगठन के नेतृत्व में राज्य के विभिन्न जिलों के किसान 23 जून को नई दिल्ली में एक मार्च निकालेंगे और केंद्रीय जल संसाधन विभाग के मुख्यालय का घेराव करेंगे। वे केंद्र सरकार से मेकेदातु परियोजना के लिए किसी भी प्रकार की मंजूरी न देने की माँग करेंगे।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से क्या माँग की गई है?
संगठन के महासचिव पी.आर. पांडियन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से अपील की है कि वे मेकेदातु परियोजना को रोकने के लिए सभी जरूरी कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएँ। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कावेरी पर निर्भर लाखों किसानों की आजीविका बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाना चाहिए।
परंगीपेट्टई हाइड्रोकार्बन परियोजना का विरोध क्यों किया जा रहा है?
किसान संगठन ने परंगीपेट्टई तट के पास इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की प्रस्तावित हाइड्रोकार्बन खोज परियोजना का विरोध करने का प्रस्ताव पारित किया है। संगठन को इस परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभाव और तटीय समुदायों, मछुआरों तथा कृषि-आधारित आजीविका पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की चिंता है।
कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच मुख्य मतभेद क्या हैं?
कर्नाटक कावेरी नदी पर मेकेदातु में एक जलाशय बनाना चाहता है, जबकि तमिलनाडु का तर्क है कि नदी की उल्टी धारा में पानी जमा करने से डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए जरूरी जलप्रवाह घट जाएगा। तमिलनाडु की आपत्तियों के बावजूद कर्नाटक इस परियोजना की योजनाओं पर आगे बढ़ रहा है, जो इस विवाद को और गहरा बना रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 4 सप्ताह पहले
  5. 4 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले