कर्नाटक: 100 दिन के जश्न में मंच से बाहर रखे गए कांग्रेस अध्यक्ष हरिप्रसाद, CM शिवकुमार ने विवाद को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार के 100 दिन पूरे होने के जश्न में मंच पर जगह न मिलने को लेकर पार्टी आलाकमान के समक्ष कड़ी नाराजगी दर्ज कराई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सोमवार, 14 सितंबर 2026 को यह विवाद सामने आया, जिसके बाद आलाकमान ने इस घटनाक्रम की जानकारी माँगी है।
मुख्य घटनाक्रम
100 दिन के समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर मंच पर उपस्थित रहे और उन्होंने सभा को संबोधित किया। हालाँकि, राज्य कांग्रेस के सर्वोच्च संगठनात्मक पद पर बैठे हरिप्रसाद मंच पर नज़र नहीं आए। सूत्रों के अनुसार, हरिप्रसाद ने अपने करीबी लोगों के बीच इस बात पर असंतोष जताया कि इतने महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम में उन्हें मंच पर स्थान क्यों नहीं दिया गया।
हरिप्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा: 'सौ दिन का जश्न खत्म हो गया। मैं पार्टी का अध्यक्ष और एमएलसी हूँ। यह एक अहम सरकारी कार्यक्रम था, फिर भी मेरी एक भी तस्वीर प्रकाशित नहीं हुई।' उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर दूर रखा गया।
शिवकुमार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस विवाद को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सभी को निमंत्रण भेजे गए थे और बैठने की व्यवस्था प्रोटोकॉल के अनुसार की गई थी। अपने गृह क्षेत्र कनकपुरा के दौरे पर बोलते हुए उन्होंने कहा: 'किसने कहा कि हमने हरिप्रसाद को आमंत्रित नहीं किया? हमने सभी विधायकों को बुलाया था, जिनमें विपक्ष के विधायक भी शामिल थे।'
शिवकुमार ने यह भी कहा कि हरिप्रसाद पार्टी के अध्यक्ष हैं और पार्टी के निर्देशानुसार सबको मिलकर काम करना होता है। साथ ही उन्होंने मीडिया पर इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
कांग्रेस के भीतर आंतरिक तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सरकार के बीच मतभेद की चर्चाएँ पहले से ही चल रही हैं। गौरतलब है कि राज्य कैबिनेट में खाली पड़े पदों और प्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार को लेकर भी असंतोष की लहर बताई जा रही है।
इस संदर्भ में पूछे गए सवालों के जवाब में शिवकुमार ने कहा कि जब भी आलाकमान निर्देश देगा, खाली पदों को भरा जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कैबिनेट विस्तार में पार्टी नेताओं से अधिक मीडिया की रुचि है।
आम जनता और पार्टी पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक असंतोष से सत्तारूढ़ दल की एकजुटता की छवि पर असर पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेकुलर) सरकार की आंतरिक खींचतान को राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
क्या होगा आगे
कांग्रेस आलाकमान द्वारा इस मामले की जानकारी माँगे जाने के बाद अब सभी की नज़रें हाईकमान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस मसले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की जाएगी, लेकिन कैबिनेट विस्तार में और देरी होने पर आंतरिक दबाव बढ़ सकता है।