कर्नाटक कैबिनेट विवाद: सीएम डीके शिवकुमार दिल्ली रवाना, आलाकमान से करेंगे मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में कैबिनेट पोर्टफोलियो बंटवारे को लेकर उपजे गहरे असंतोष के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार शनिवार, 8 अगस्त को नई दिल्ली रवाना हो गए। वे कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर विभागों के बंटवारे पर चल रही अंदरूनी खींचतान को सुलझाने का प्रयास करेंगे। 13 अगस्त से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से पहले पार्टी के भीतर एकजुटता प्रदर्शित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली रवाना होने से पहले शुक्रवार देर रात सीएम शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस वर्किंग कमेटी सदस्य सिद्दारमैया से उनके बेंगलुरु आवास पर बंद कमरे में बातचीत की। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात का मकसद नाराज वरिष्ठ नेताओं को मनाना और मानसून सत्र से पहले पार्टी को एकसूत्र में बाँधना था। इसके तुरंत बाद शिवकुमार सात बार के विधायक टी.बी. जयचंद्र के घर भी पहुँचे, जो पोर्टफोलियो वितरण के तरीके पर खुलकर नाराजगी जता चुके थे।
टी.बी. जयचंद्र का रुख और सुलह
टी.बी. जयचंद्र ने धमकी दी थी कि वे विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों से अलग बैठेंगे। मुलाकात के बाद सीएम शिवकुमार ने कहा कि जयचंद्र प्रोटेम स्पीकर हैं और मुख्यमंत्री होने के नाते वे उनके दफ्तर या घर जा सकते हैं — उन्होंने इसे दोस्ती का रिश्ता भी बताया। जयचंद्र ने बाद में कहा, "मामला अब सुलझ गया है। मैं दफ्तर जाऊंगा और काम शुरू करूंगा — यह संवैधानिक जिम्मेदारी है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय दबाव में उन्होंने अपनी बात रखी थी, परंतु कोई अंतिम फैसला नहीं किया था।
असंतोष की जड़ें: समुदाय और विभागों का असंतुलन
कैबिनेट में लिंगायत समुदाय को सात पद मिलने से पार्टी के भीतर प्रतिनिधित्व के संतुलन पर बहस छिड़ी हुई है। सोशल वेलफेयर, लेबर, हायर एजुकेशन और एक्साइज जैसे प्रभावशाली विभागों को लेकर दावेदारी सबसे तीखी है। पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ नेता एच.सी. महादेवप्पा — जो सिद्दारमैया के करीबी माने जाते हैं — भी अपने पोर्टफोलियो से असंतुष्ट हैं। वे दिल्ली पहुँचकर कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला से मिले। सूत्रों के मुताबिक सुरजेवाला ने उनकी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि पार्टी उनके साथ है।
सरकार की रणनीति और आलाकमान की भूमिका
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) विपक्ष में एकजुट होकर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद से गठबंधन-प्रबंधन की चुनौतियाँ बनी हुई हैं। सीएम शिवकुमार को उम्मीद है कि आलाकमान के हस्तक्षेप से मतभेद समाप्त होंगे और सरकार मानसून सत्र में एकजुट मोर्चे के साथ उतर सकेगी।
आगे की राह
13 अगस्त से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले शिवकुमार की दिल्ली यात्रा के नतीजे तय करेंगे कि कर्नाटक कांग्रेस विपक्ष का सामना एकजुट होकर कर पाती है या अंदरूनी दरारें और गहरी होती हैं।