तेलंगाना ACB का NIMS अधिकारी पर शिकंजा: ₹6.13 करोड़ की संपत्ति जब्त, जगुआर-ऑडी भी मिली
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) ने निजाम्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS) के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नोरी लक्ष्मी भास्कर के खिलाफ 22 सितंबर 2026 को आय से अधिक संपत्ति के मामले में ₹6.13 करोड़ की चल-अचल संपत्ति जब्त की है। हैदराबाद सहित कुल आठ स्थानों पर एक साथ की गई इस तलाशी में फ्लैट, खाली प्लॉट, लग्ज़री कारें और सोने के आभूषण बरामद हुए।
तलाशी का ब्यौरा
ACB अधिकारियों ने मंगलवार को डॉ. भास्कर (56) के आवास के अलावा उनके रिश्तेदारों, मित्रों, बेनामी व अन्य सहयोगियों से जुड़े सात अन्य परिसरों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में दर्ज मामले के तहत की गई।
ACB के अनुसार भास्कर ने अपनी सरकारी सेवा के दौरान भ्रष्टाचार और संदिग्ध तरीकों का सहारा लेकर ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति बनाई।
जब्त संपत्तियों का विवरण
तलाशी के दौरान ACB अधिकारियों को अनेक संपत्तियों के दस्तावेज़ मिले। कुकाटपल्ली स्थित एक हाई-राइज़ गेटेड कम्युनिटी में चार बेडरूम का एक फ्लैट, उसी तरह की इमारत में तीन बेडरूम के दो फ्लैट, मणिकोंडा, पेटबशीरबाद और कुकाटपल्ली में दो कमरों वाले पाँच फ्लैट और यादराडी, नंदीगामा व शमीरपेट में चार खाली प्लॉट मिले।
इसके अलावा आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 800 वर्ग गज का एक खाली प्लॉट भी सामने आया। नकदी और निवेश में ₹41 लाख का बैंक बैलेंस, डाकघर में ₹12 लाख की जमा राशि, निजी वित्तीय संस्थानों में ₹35 लाख और म्यूचुअल फंड में ₹29.55 लाख का निवेश मिला।
इसके अतिरिक्त 517.8 ग्राम सोने के आभूषण, जगुआर और ऑडी समेत टाटा नेक्सन, रॉयल एनफील्ड, वेस्पा, एक्टिवा और यामाहा जैसे वाहन तथा ₹5 लाख मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट भी बरामद हुए।
ऋण और निवेश के संदिग्ध लेन-देन
ACB ने बताया कि आरोपी डॉक्टर ने ऋण वसूली न्यायाधिकरण के समक्ष विवादित एक फ्लैट खरीदने के लिए ₹1.30 करोड़ का निवेश किया था। साथ ही उन्होंने विभिन्न व्यक्तियों को ₹1.33 करोड़ का ऋण भी दिया था, जो सरकारी वेतन के अनुपात में असामान्य माना जा रहा है।
ACB ने स्पष्ट किया कि चल और अचल संपत्ति का वास्तविक बाज़ार मूल्य दस्तावेज़ी मूल्य से कई गुना अधिक हो सकता है।
जाँच की स्थिति
ACB के बयान के अनुसार अतिरिक्त संपत्तियों का सत्यापन अभी जारी है और मामले की विस्तृत जाँच चल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना सरकार सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि NIMS हैदराबाद के शीर्ष सरकारी अस्पतालों में गिना जाता है और वहाँ के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ इस स्तर की कार्रवाई स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार की गंभीरता को रेखांकित करती है।
आगामी दिनों में ACB की जाँच रिपोर्ट और सत्यापन के बाद और संपत्तियाँ सामने आ सकती हैं।