PNB से ₹48.48 करोड़ की धोखाधड़ी: CBI ने हैदराबाद और ओडिशा में मारे छापे, दस्तावेज़-डिजिटल साक्ष्य ज़ब्त
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 19 सितंबर 2026 को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े ₹48.48 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में हैदराबाद और ओडिशा के कई ठिकानों पर एक साथ समन्वित तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बेंगलुरु स्थित CBI की बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच (BSFB) में दर्ज मामले के तहत की गई।
मामले की पृष्ठभूमि
CBI ने यह मामला M/s PCH कॉरपोरेशन लिमिटेड, M/s PCH रिटेल लिमिटेड, उनके निदेशकों और अज्ञात लोकसेवकों के विरुद्ध PNB, चेन्नई की शिकायत पर दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन कंपनियों और उनके निदेशकों ने आपराधिक साजिश तथा धोखाधड़ी के माध्यम से बैंक को ₹48.48 करोड़ का नुकसान पहुँचाया।
गौरतलब है कि इस प्रकार के मामले — जिनमें गिरवी रखे गए स्टॉक की बिना सूचना बिक्री शामिल है — पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती चिंता का विषय बने हैं। सीबीआई की बीएसएफबी इकाई विशेष रूप से ऐसे संगठित वित्तीय अपराधों की जांच के लिए स्थापित की गई है।
आरोपों का विवरण
एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने दुर्भावनापूर्ण मंशा से अपने कारोबार के गिरवी रखे गए स्टॉक को बैंक को बिना जानकारी दिए बेच दिया। इन बिक्री से प्राप्त राशि को ऋण खातों में जमा नहीं किया गया और कथित तौर पर उसका गबन कर लिया गया।
CBI के अनुसार, इस तरह कंपनी और उसके निदेशकों ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक गबन और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराध किए। यह मामला इसलिए भी संगीन है क्योंकि बैंक के पास रखी जाने वाली गिरवी संपत्ति का यह कथित दुरुपयोग बैंकिंग ऋण व्यवस्था की नींव को प्रभावित करता है।
छापेमारी में क्या मिला
शनिवार को चलाए गए तलाशी अभियान में CBI की टीमों ने PCH कॉरपोरेशन लिमिटेड और PCH रिटेल लिमिटेड के निदेशकों के आवासों सहित कई व्यावसायिक ठिकानों की जांच की। छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्य बरामद कर ज़ब्त किए गए, जिनमें जांच से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
जांच की दिशा
CBI ने बताया कि ज़ब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है, जिसके तहत तीन मुख्य उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित है — कथित आपराधिक साजिश की पूरी परतें उजागर करना, धन के कथित डायवर्जन और उसके प्रवाह का पता लगाना, तथा मामले में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित करना।
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की आगे की जांच जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी बैंकों में गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में CBI की सक्रियता बढ़ी है।
आगे क्या होगा
ज़ब्त साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद CBI अभियुक्तों के विरुद्ध अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। मामले में अज्ञात लोकसेवकों का उल्लेख होने के कारण जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। आने वाले हफ्तों में गिरफ्तारी या समन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।