19 सितंबर 2026
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सेमीकॉन इंडिया 2026: भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर निवेश का नया केंद्र, उद्योग जगत ने जताया भरोसा

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सेमीकॉन इंडिया 2026: भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर निवेश का नया केंद्र, उद्योग जगत ने जताया भरोसा

सारांश

सेमीकॉन इंडिया 2026 के समापन दिन वैश्विक कंपनियों ने एक स्वर में कहा — भारत अब केवल संभावनाओं की बात नहीं, ज़मीनी हकीकत है। मलेशिया से लेकर अमेरिका तक के उद्योग प्रतिनिधियों ने निवेश बढ़ाने की बात कही और टाटा सेमीकंडक्टर के साथ साझेदारी को भारत की पहली फैब के लिए मील का पत्थर बताया।

मुख्य बातें

सेमीकॉन इंडिया 2026 के तीसरे और अंतिम दिन, 19 सितंबर 2026 को, वैश्विक उद्योग प्रतिनिधियों ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को लेकर मज़बूत आशावाद जताया।
मलेशिया की केलिंगटन ग्रुप ने टाटा सेमीकंडक्टर और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि की; भारत-मलेशिया MoU भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब को सहारा देगा।
अमेरिका की फाइफर वैक्यूम इंडिया ने भारत में निवेश और उपस्थिति बढ़ाने की घोषणा की।
लिंडे इंडिया के एमडी मिलन साधुखान ने कहा — भारत पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में है, केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं।
सेमीकॉन इंडिया का आयोजन महज तीन वर्षों में एक छोटे हॉल से बहु-देशीय अंतरराष्ट्रीय मंच में तब्दील हो चुका है।

नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 के तीसरे और अंतिम दिन, 19 सितंबर 2026 को, भारतीय एवं वैश्विक उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने एकमत से माना कि भारत अब महज संभावनाओं का बाज़ार नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक ठोस निवेश और विनिर्माण गंतव्य के रूप में उभर चुका है। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में दर्जनों देशों की कंपनियों ने भाग लिया और कई अहम सहयोग समझौते भी हुए।

मुख्य घटनाक्रम

मलेशिया की केलिंगटन ग्रुप बरहाद के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी लिम सेंग चुआन ने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर विकास में योगदान देना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि टाटा सेमीकंडक्टर और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के रणनीतिक साझेदार के रूप में उनकी कंपनी अपनी विशेषज्ञता, अनुभव और तकनीकी क्षमताएँ भारत लाएगी। भारत-मलेशिया समझौता ज्ञापन (MoU) दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और यह भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब को सफल बनाने में सहायक होगा।

अमेरिका की फाइफर वैक्यूम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बिजनेस डेवलपमेंट निदेशक डेरेक शील्ड्स ने कहा कि इस वर्ष का आयोजन अत्यंत सफल और व्यस्त रहा। उनके अनुसार, पहले जहाँ विकास केवल कागज़ों पर दिखता था, अब वह ज़मीनी स्तर पर भी नज़र आने लगा है। शील्ड्स ने कहा, 'भारत में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है और यह ऐसा बाज़ार बन गया है जिस पर वैश्विक कंपनियाँ विशेष ध्यान दे रही हैं।'

नए प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया

वाइजली ग्लोबल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के स्वामी साइमन टैन ने बताया कि सेमीकॉन इंडिया में यह उनकी पहली भागीदारी थी और आयोजन की व्यापकता ने उन्हें चकित कर दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि केवल तीन वर्षों में यह सम्मेलन इतने बड़े स्तर तक पहुँच गया है।' उनके अनुसार, विभिन्न देशों की भागीदारी और लगातार हो रहे सहयोग समझौते इस बात के प्रमाण हैं कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए तेज़ी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

नॉर्डसन के यूजीन सितोह ने कहा कि वह कई वर्षों से इस आयोजन से जुड़े हैं और इस मंच की तेज़ प्रगति को उन्होंने निकट से देखा है। उनके अनुसार, पहले जहाँ यह सम्मेलन एक छोटे हॉल तक सीमित था, वहीं अब इसका विस्तार कई गुना हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में सेमीकॉन इंडिया एक बड़े वैश्विक मंच के रूप में और मज़बूती से उभरेगा।

उद्योग विशेषज्ञों की राय

कोहिजॉन लाइफ साइंसेज लिमिटेड के अनुसंधान एवं विकास निदेशक प्रभाकरन कमलकन्नन ने बताया कि सेमीकॉन इंडिया 2026 उनके लिए बेहद उपयोगी अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में विभिन्न कंपनियों, तकनीकों और उद्योग प्रवृत्तियों को समझने का दुर्लभ अवसर मिला, जिससे उनका तकनीकी ज्ञान और व्यापक हुआ।

लिंडे इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मिलन साधुखान ने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में इस समय जबरदस्त गति दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया, 'वैश्विक स्तर के बड़े खिलाड़ियों के अलावा नई कंपनियाँ भी भारत में अवसर तलाश रही हैं। विशेष रूप से पैकेजिंग, टेस्टिंग और असेंबली सुविधाओं की स्थापना को लेकर बढ़ती रुचि उत्साहजनक है।'

पूरी वैल्यू चेन में भारत की भूमिका

साधुखान के अनुसार, यह संकेत है कि भारत केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन — डिज़ाइन से लेकर पैकेजिंग और टेस्टिंग तक — में अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में अग्रसर है। यह ऐसे समय में आया है जब चीन-अमेरिका व्यापार तनाव के बीच वैश्विक कंपनियाँ आपूर्ति शृंखला में विविधता लाने के लिए भारत को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में देख रही हैं।

गौरतलब है कि सेमीकॉन इंडिया का आयोजन महज तीन वर्षों में एक छोटे उद्योग मेले से बढ़कर बहु-देशीय भागीदारी वाले अंतरराष्ट्रीय मंच में तब्दील हो चुका है — यह भारत के सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं की गंभीरता को दर्शाता है। आगामी महीनों में नई साझेदारियों और निवेश घोषणाओं की और अधिक संभावना बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे परिप्रेक्ष्य में देखना ज़रूरी है — अधिकांश बयान निवेश इरादों पर आधारित हैं, न कि पूर्ण हो चुके फैब या पैकेजिंग संयंत्रों पर। भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब अभी भी निर्माणाधीन है और चीन-अमेरिका व्यापार तनाव के कारण उत्पन्न हुई 'चाइना+1' रणनीति का लाभ उठाने की यह खिड़की स्थायी नहीं है। असली कसौटी यह होगी कि क्या भारत की नीतिगत स्थिरता, कुशल कार्यबल और बुनियादी ढाँचा इन घोषणाओं को वास्तविक उत्पादन क्षमता में बदल पाते हैं — वरना 'अगला सेमीकंडक्टर हब' का तमगा ताइवान और दक्षिण कोरिया के सामने केवल आकांक्षा बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन इंडिया 2026 क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
सेमीकॉन इंडिया 2026 भारत का प्रमुख सेमीकंडक्टर उद्योग सम्मेलन है, जो नई दिल्ली में आयोजित हुआ और जिसमें दर्जनों देशों की कंपनियों ने भाग लिया। यह आयोजन महज तीन वर्षों में एक छोटे मेले से बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच में बदल चुका है, जो भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।
टाटा सेमीकंडक्टर और केलिंगटन ग्रुप के बीच क्या साझेदारी हुई?
मलेशिया की केलिंगटन ग्रुप बरहाद ने टाटा सेमीकंडक्टर और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इसके तहत एक भारत-मलेशिया MoU पर सहमति बनी है, जो भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब को सफल बनाने में तकनीकी और विशेषज्ञता सहयोग प्रदान करेगी।
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक कंपनियाँ क्यों निवेश कर रही हैं?
वैश्विक कंपनियाँ चीन-अमेरिका व्यापार तनाव के बीच आपूर्ति शृंखला में विविधता लाने के लिए भारत को एक विश्वसनीय विकल्प मान रही हैं। इसके अलावा, भारत सरकार की सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन नीतियाँ, बड़ा घरेलू बाज़ार और कुशल तकनीकी कार्यबल भी निवेश आकर्षण के प्रमुख कारण हैं।
भारत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के किन हिस्सों में उपस्थिति बना रहा है?
लिंडे इंडिया के एमडी मिलन साधुखान के अनुसार, भारत केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। पैकेजिंग, टेस्टिंग और असेंबली सुविधाओं की स्थापना में भी तेज़ी से रुचि बढ़ रही है, जो पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में भारत की व्यापक भागीदारी का संकेत है।
सेमीकॉन इंडिया आयोजन कितनी तेज़ी से बढ़ा है?
नॉर्डसन के यूजीन सितोह और वाइजली ग्लोबल के साइमन टैन दोनों ने पुष्टि की कि केवल तीन वर्षों में यह आयोजन एक छोटे हॉल से बढ़कर बहु-देशीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बन चुका है। इसमें हर वर्ष अधिक देशों की भागीदारी और अधिक सहयोग समझौते होते जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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