गया सिविल कोर्ट के पास वकीलों का सड़क जाम, पुलिस पर बदसलूकी का आरोप; अधिकारियों के आश्वासन के बाद जाम हटा
सारांश
मुख्य बातें
गया के सिविल कोर्ट परिसर के निकट शनिवार शाम वकीलों ने सड़क जाम कर विरोध-प्रदर्शन किया। वकीलों का आरोप है कि सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों ने उनके चैंबर निर्माण कार्य में अवरोध डाला और उनके साथ बदसलूकी की। प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद जाम हटाया गया तथा यातायात सामान्य हो गया।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार शाम गया सिविल कोर्ट के निकट वकीलों ने सड़क पर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारी वकीलों का कहना था कि सरकार ने उनके चैंबर के निर्माण के लिए भूमि आवंटित की थी और धनराशि भी स्वीकृत की थी। इसके अलावा, पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को आवंटित भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ करने का निर्देश भी दिया गया था।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारी रवींद्र प्रसाद ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार निर्माण कार्य शुरू हो चुका था, किंतु सिविल लाइंस पुलिस के कर्मचारियों ने इस कार्य में दखल देना आरंभ कर दिया। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने वकीलों को कथित तौर पर परेशान किया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया, जिससे वकीलों में भारी रोष उत्पन्न हो गया।
वकीलों की माँगें
विरोध-प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब भूमि आवंटित हो चुकी है, धनराशि स्वीकृत हो चुकी है और निर्माण के आदेश भी जारी किए जा चुके हैं, तो इस परियोजना में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं है। वकीलों ने प्रशासन से निर्माण कार्य निर्बाध रूप से जारी रखवाने की माँग की।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर की गई बदसलूकी की स्वतंत्र जाँच कराने और आरोप सही साबित होने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की भी माँग रखी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
विरोध-प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सदर एसडीओ अनिल कुमार रमन और सिविल लाइंस एसएचओ शमीम अहमद घटनास्थल पर पहुँचे। दोनों अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी वकीलों से वार्ता की और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा।
अधिकारियों का आश्वासन मिलने के बाद वकीलों ने सड़क खाली कर दी और यातायात पुनः सामान्य हो गया। यह ऐसे समय में हुआ जब न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वय को लेकर पहले से भी सवाल उठते रहे हैं।
पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पटना उच्च न्यायालय ने वकीलों के लिए उचित अधोसंरचना सुनिश्चित करने के संदर्भ में यह आदेश जारी किया था। सरकार ने भूमि आवंटन और निर्माण के लिए धनराशि भी स्वीकृत की थी। ऐसे में पुलिस के कथित हस्तक्षेप ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन पर भी सवाल खड़े किए हैं।
आगे क्या होगा
अधिकारियों ने जाँच का आश्वासन तो दे दिया है, परंतु यह देखना अभी बाकी है कि क्या पुलिसकर्मियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला आश्वासन तक ही सीमित रहता है। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि निर्माण कार्य में पुनः बाधा आई तो वकील बड़े स्तर पर आंदोलन कर सकते हैं।