सेमीकॉन इंडिया 2026: इंडस्ट्री लीडर्स बोले — भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम निर्माण चरण में, अगले 10 वर्षों में बड़े निवेश और रोज़गार की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
सेमीकॉन इंडिया 2026 के दूसरे दिन 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने एकमत से कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र तेज़ विस्तार के दौर में प्रवेश कर चुका है और अगले एक दशक में यहाँ बड़े पैमाने पर निवेश, तकनीकी नवाचार एवं रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे। उनके अनुसार, सरकार की नीतियाँ, प्रोत्साहन योजनाएँ और बढ़ती वैश्विक रुचि मिलकर भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण और तकनीकी नवाचार के प्रमुख केंद्रों में स्थापित कर सकती हैं।
ऑटोमेशन और रोबोटिक्स में भारतीय नवाचार
ऐडवर्ब के सह संस्थापक और सीईओ संगीत कुमार ने कहा कि उनकी कंपनी पूरी तरह भारत आधारित है और नोएडा में उसके दो विनिर्माण संयंत्र संचालित हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 में कंपनी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विकसित नवीनतम ऑटोमेशन और रोबोटिक्स समाधान प्रदर्शित कर रही है — इनमें रील स्टोरेज सिस्टम, ऑटोमैटिक स्टोरेज एवं रिट्रीवल सिस्टम, एफओयूपी (FOUP) को स्थानांतरित करने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट तथा असेंबली लाइन के लिए छोटे रोबोट शामिल हैं।
संगीत कुमार ने कहा, "सरकार की नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के कारण अगले 10 वर्षों में इस क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी। शुरुआती दौर में तकनीक का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आएगा, लेकिन धीरे धीरे भारत अपनी स्वदेशी तकनीक भी विकसित करेगा।" यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि उद्योग जगत भारत की दीर्घकालिक तकनीकी आत्मनिर्भरता को लेकर आशावादी है।
इकोसिस्टम निर्माण की ज़रूरत: सिर्फ फैक्ट्री नहीं, पूरी सप्लाई चेन
होरिबा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष राजीव गौतम ने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहलों और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत के साथ गति पकड़ने लगी। उन्होंने रेखांकित किया कि शुरुआती दौर में केवल विनिर्माण इकाइयों पर फोकस था, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि मात्र फैक्ट्री स्थापित करना पर्याप्त नहीं है।
गौतम ने कहा, "होरिबा पिछले 73 वर्षों से जापान में इस उद्योग का हिस्सा रही है और भारत में भी इस संपूर्ण इकोसिस्टम को विकसित करने की दिशा में योगदान दे रही है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि एक मज़बूत सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए कच्चे माल, गैस, उपकरण, सप्लाई चेन और प्रशिक्षित प्रतिभाओं सहित पूरे इकोसिस्टम की आवश्यकता होती है।
युवाओं और उद्यमियों में नया उत्साह
आज्ञाविजन की सीईओ सुचिस्मिता बनर्जी ने कहा कि जब देश का नेतृत्व किसी क्षेत्र के विकास की बात करता है और युवाओं को उससे जोड़ने के लिए प्रेरित करता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे उद्योग पर पड़ता है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री द्वारा सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार पर ज़ोर देने से युवाओं और उद्यमियों के बीच नया उत्साह पैदा हुआ है और भविष्य में अधिक प्रतिभाएँ इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगी।
डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया में विभागाध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति उम्मीदों से कहीं अधिक तेज़ रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया लंबे समय से भारत को संभावनाओं वाले देश के रूप में देखती रही है और अब वही क्षमता तकनीक और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी दिखाई देने लगी है।
बाधाएँ और सुधार की ज़रूरत
सेलेस्टा कैपिटल के फाउंडिंग मैनेजिंग पार्टनर श्रीराम विश्वनाथन ने माना कि सरकार सही दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बाधाओं को दूर करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, "नियमन, कराधान और प्रोत्साहन से जुड़े मुद्दों को सरल बनाने के साथ साथ घरेलू खरीद और स्थानीय बाज़ार निर्माण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। भारतीय कंपनियों को ऐसा मज़बूत घरेलू बाज़ार मिलना चाहिए जहाँ वे अपने उत्पाद बेच सकें।"
गौरतलब है कि यह चिंता नई नहीं है — भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर उद्योग लंबे समय से घरेलू माँग की सीमितता और आयात पर निर्भरता से जूझता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आगे की राह
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) और सेमी इंडिया के अध्यक्ष एवं सीईओ अशोक के. चंदक ने कहा कि सेमीकॉन इंडिया के दौरान विभिन्न देशों के साथ आयोजित राउंडटेबल बैठकों में बेहद सार्थक चर्चा हो रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत अभी सेमीकंडक्टर विनिर्माण तकनीकों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है और उसे वैश्विक साझेदारों से सहयोग एवं विशेषज्ञता प्राप्त करनी होगी।
चंदक के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और तकनीकी सहयोग भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, जापान और यूरोपीय देश भी अपनी अपनी चिप आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने में जुटे हैं और भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रहे हैं। आने वाले महीनों में नीतिगत सरलीकरण और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ ही यह तय करेंगी कि भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा दीर्घकालिक वास्तविकता बन पाती है या नहीं।