18 सितंबर 2026
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लाल सागर तनाव और मक्का पर ड्रोन हमले की कोशिश: भारत ने जताई गहरी चिंता, क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा

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लाल सागर तनाव और मक्का पर ड्रोन हमले की कोशिश: भारत ने जताई गहरी चिंता, क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा

सारांश

लाल सागर में हूती विद्रोहियों की आक्रामकता और मक्का पर ड्रोन हमले की कोशिश के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बताया — और यह चिंता महज कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है।

मुख्य बातें

भारत के विदेश मंत्रालय ने 18 सितंबर 2026 को लाल सागर क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता जताई।
हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए ड्रोन को सऊदी रॉयल एयर डिफेंस फोर्सेज ने मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश से पहले मार गिराया।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हमलों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया और सऊदी संप्रभुता पर हमलों की कड़ी निंदा की।
जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सऊदी विदेश मंत्री से मिलकर हूती मुद्दे पर चर्चा की।
भारत ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की।

भारत के विदेश मंत्रालय ने 18 सितंबर 2026 को लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का के निकट हुए ड्रोन हमले के प्रयास पर गहरी चिंता व्यक्त की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये घटनाक्रम न केवल क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं, बल्कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता को भी बाधित करते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

नई दिल्ली में आयोजित द्वि-साप्ताहिक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन हमलों को अस्वीकार्य करार दिया। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब की रॉयल एयर डिफेंस फोर्सेज ने मंगलवार को हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए एक शत्रुतापूर्ण ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया था।

जायसवाल ने कहा, 'लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति के बिगड़ने से हम चिंतित हैं। हमने सऊदी अरब की संप्रभु सीमा, वहाँ के नागरिकों और आर्थिक परिसंपत्तियों पर हुए हमलों की निंदा की है। मक्का के पवित्र शहर पर हमले के प्रयास के बाद जारी हमारे बयान को भी आपने देखा होगा।'

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

प्रवक्ता जायसवाल ने दोहराया कि भारत सऊदी अरब की संप्रभु सीमा, नागरिक बुनियादी ढाँचे और आर्थिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाने वाले हमलों की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने कहा, 'ऐसे हमले क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को कमज़ोर करते हैं। ये क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं तथा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के ज़रिए नौवहन की स्वतंत्रता के लिए भी खतरा पैदा करते हैं।'

जायसवाल ने आगे कहा, 'कई कारणों से यह स्थिति हमारे लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है। हम उम्मीद करते हैं कि क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल होगी।' गौरतलब है कि भारत इस क्षेत्र से महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति प्राप्त करता है, जो इस मामले में उसकी प्रत्यक्ष हिस्सेदारी को रेखांकित करता है।

मक्का पर हमले का धार्मिक आयाम

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को मक्का के निकट हुए ड्रोन हमले की घटना पर विशेष चिंता जताते हुए कहा कि यह शहर दुनिया भर के मुसलमानों के लिए अत्यंत धार्मिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा, 'मक्का के निकट हुए ड्रोन हमले को लेकर हम बेहद चिंतित हैं। भारत, सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर होने वाले हमलों और नागरिकों के जीवन तथा बुनियादी ढाँचे को खतरे में डालने वाली गतिविधियों की पुनः कड़ी निंदा करता है।'

जयशंकर और सऊदी विदेश मंत्री की मुलाकात

यह ऐसे समय में आया है जब इसी सप्ताह विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब के विदेश मंत्री से मुलाकात की थी। जायसवाल के अनुसार, उस बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम समेत हूती समूह से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा हुई।

जायसवाल ने स्पष्ट किया, 'हाल ही में सऊदी अरब पर एक हमला हुआ था, जिसकी हमने निंदा की है। लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर भी हम बेहद चिंतित हैं। साथ ही, हमें दुनिया के इसी हिस्से से ऊर्जा आपूर्ति भी प्राप्त होती है।'

आगे क्या होगा

भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया दर्शाती है कि लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती आक्रामकता अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए सीधा खतरा बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन बाधित हुआ तो भारत के आयात-निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भारत उम्मीद करता है कि कूटनीतिक प्रयासों के ज़रिए इस क्षेत्र में शांति शीघ्र बहाल की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि लाल सागर संकट में भारत की भूमिका निंदा से आगे बढ़ेगी या नहीं। जायसवाल का ऊर्जा आपूर्ति का उल्लेख महत्वपूर्ण है — यह संकेत देता है कि यह मामला भारत के लिए महज क्षेत्रीय नैतिकता का नहीं, बल्कि घरेलू ऊर्जा सुरक्षा का भी है। मक्का पर हमले का धार्मिक आयाम भारत की विशाल मुस्लिम आबादी के संदर्भ में भी संवेदनशील है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। जब तक भारत बाब-अल-मंदेब में नौसैनिक उपस्थिति या बहुपक्षीय तंत्र में सक्रिय भागीदारी नहीं दिखाता, इस बयान का व्यावहारिक असर सीमित रहेगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने लाल सागर तनाव पर क्या कहा?
भारत के विदेश मंत्रालय ने 18 सितंबर 2026 को लाल सागर क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता जताई और हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की संप्रभुता पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन हमलों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताते हुए क्षेत्र में जल्द शांति बहाल होने की अपील की।
मक्का पर ड्रोन हमले की कोशिश क्या थी?
सऊदी अरब की रॉयल एयर डिफेंस फोर्सेज ने मंगलवार को हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए एक शत्रुतापूर्ण ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और इस हमले की कोशिश को भारत सहित कई देशों ने गंभीरता से लिया है।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर का प्रवेशद्वार है और भारत के आयात-निर्यात के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हित सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
जयशंकर ने ब्रिक्स में सऊदी विदेश मंत्री से क्या चर्चा की?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब के विदेश मंत्री से मुलाकात की, जिसमें क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के साथ-साथ हूती समूह से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा हुई। भारत ने उस बैठक में भी सऊदी अरब पर हाल के हमलों की निंदा की थी।
हूती विद्रोही कौन हैं और वे सऊदी अरब को क्यों निशाना बना रहे हैं?
हूती यमन स्थित एक सशस्त्र विद्रोही समूह है जो सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ लंबे समय से संघर्षरत है। इस समूह ने लाल सागर क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के साथ-साथ सऊदी अरब की संप्रभु सीमा के भीतर ड्रोन और मिसाइल हमले भी किए हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
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