लाल सागर में बढ़ते तनाव पर भारत की गहरी चिंता, MEA ने हूती हमलों की निंदा की
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि यमन के हूती समूह और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुए हमलों के कारण लाल सागर क्षेत्र में बिगड़ते हालात को लेकर भारत गहरी चिंता में है। नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान MEA प्रवक्ता ने कहा कि यह स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही है।
विदेश मंत्री की सऊदी समकक्ष से मुलाकात
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब के विदेश मंत्री से द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई, जिसमें हूती विद्रोहियों का मुद्दा विशेष रूप से शामिल था।
जायसवाल ने मीडिया से कहा, 'हाल ही में सऊदी अरब पर हमला हुआ था, जिसकी हमने निंदा की है। हम लाल सागर इलाके में बिगड़ते हालात को लेकर भी बहुत चिंतित हैं।' यह बयान भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।
बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य पर खतरे की चेतावनी
MEA ने विशेष रूप से बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता पर मंडरा रहे खतरे की ओर ध्यान दिलाया। प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, 'सऊदी अरब के इलाके पर हुए हमलों में आम लोगों के बुनियादी ढाँचे और आर्थिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया — ऐसे हमले इलाके में स्थिरता को कमज़ोर करते हैं।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'ये हरकतें हमारे लिए बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हमें दुनिया के उस हिस्से से ऊर्जा की सप्लाई मिलती रहती है।' यह टिप्पणी भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इस संकट के संभावित प्रभाव की ओर सीधा इशारा है। गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है।
हूती हमले का ब्यौरा
यमन के हूती समूह ने सोमवार को घोषणा की कि उसने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में स्थित एक प्रमुख सैन्य हवाई अड्डे पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। हूती-संचालित अल-मसीराह टीवी पर जारी बयान में सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि यमन की सीमा के निकट स्थित खमीस मुशेत शहर के किंग खालिद एयर बेस को निशाना बनाया गया।
सरी के दावों के अनुसार, इस अभियान में बेस के फाइटर-जेट हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे, गोला-बारूद डिपो और अन्य सैन्य सुविधाएँ निशाने पर थीं। उन्होंने दावा किया कि हमले 'सटीक और सीधे' थे और इनसे भारी नुकसान हुआ — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। यह घटना सीमा-पार टकराव में एक बड़ी तेज़ी का संकेत है।
भारत का रुख़ और ऊर्जा सुरक्षा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने पहले भी सऊदी अरब पर हूती हमलों की कड़ी निंदा की है — विशेषकर आम नागरिकों और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने को 'अस्वीकार्य' करार दिया है। भारत की यह स्थिरता-समर्थक स्थिति खाड़ी क्षेत्र में उसके व्यापक कूटनीतिक और आर्थिक हितों से जुड़ी है।
MEA ने उम्मीद जताई कि इलाके में जल्द ही शांति और स्थिरता बहाल होगी। यह संकट अगर और गहराता है, तो इसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी पड़ सकता है।