15 सितंबर 2026
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भारत-अफ्रीका बिजनेस सम्मेलन: जिम्बाब्वे राजदूत का आह्वान — द्विपक्षीय संबंधों को आर्थिक साझेदारी में बदलें

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भारत-अफ्रीका बिजनेस सम्मेलन: जिम्बाब्वे राजदूत का आह्वान — द्विपक्षीय संबंधों को आर्थिक साझेदारी में बदलें

सारांश

कोलकाता में हुए भारत-अफ्रीका बिजनेस लिंकेज सम्मेलन में जिम्बाब्वे की राजदूत स्टेला नकोमो ने साफ कहा — कूटनीति काफी नहीं, अब असली आर्थिक लाभ चाहिए। खनन, ऊर्जा और विनिर्माण में भारतीय निवेश के लिए दरवाज़े खुले हैं। BRICS के विस्तार के साथ यह साझेदारी और रणनीतिक महत्व ले रही है।

मुख्य बातें

15 सितंबर 2026 को कोलकाता में भारत-अफ्रीका बिजनेस लिंकेज अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ।
जिम्बाब्वे की राजदूत स्टेला नकोमो ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को ठोस आर्थिक लाभ में बदलना प्राथमिक लक्ष्य है।
जिम्बाब्वे ने खनन, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्रों में भारतीय निवेश के लिए खुला आमंत्रण दिया।
विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव ए.
अजय कुमार ने भारत-अफ्रीका व्यापार की अपार संभावनाओं पर ज़ोर दिया।
BRICS के विस्तार के साथ कई प्रमुख अफ्रीकी देश इसमें शामिल हो चुके हैं, जिससे भारत-अफ्रीका आर्थिक सहयोग को नया बल मिलेगा।

कोलकाता में 15 सितंबर 2026 को आयोजित भारत-अफ्रीका बिजनेस लिंकेज अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच व्यापारिक एवं निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया गया। भारत में जिम्बाब्वे की राजदूत स्टेला नकोमो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य दोनों देशों के बीच मौजूद उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंधों को ठोस आर्थिक लाभ में परिवर्तित करना है।

सम्मेलन का मूल संदेश

राजदूत स्टेला नकोमो ने सम्मेलन के बाहर बातचीत में कहा, 'हमने अभी-अभी एक उत्कृष्ट सम्मेलन, भारत-अफ्रीका लिंकेज का आयोजन किया है। यह सम्मेलन सही समय पर हुआ क्योंकि यहाँ मेरे कर्तव्यों में से एक यह सुनिश्चित करना है कि जो उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंध मौजूद हैं, मेरे देश, जिम्बाब्वे और भारत के बीच, ठोस आर्थिक लाभ में तब्दील हों।' उन्होंने आगे कहा कि दूतावास की ओर से प्रमुख प्रयास निवेश के अवसरों की पहचान करना और भारतीय व्यवसायी समुदाय को यह भरोसा दिलाना है कि जिम्बाब्वे व्यापार के लिए पूरी तरह खुला है।

जिम्बाब्वे में निवेश के प्रमुख क्षेत्र

राजदूत नकोमो ने बताया कि उन्होंने सम्मेलन में खनन, विनिर्माण और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपलब्ध निवेश संभावनाओं को प्रस्तुत किया। उनके अनुसार इन क्षेत्रों में विशाल अवसर मौजूद हैं, जिनका लाभ विशेष रूप से वे व्यवसायी उठा सकते हैं जो समान सांस्कृतिक मूल्यों को साझा करते हैं।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जिम्बाब्वे के पड़ोसी देश दक्षिण अफ्रीका पहले से BRICS का हिस्सा है, और यह परिप्रेक्ष्य भारत-अफ्रीका आर्थिक सहयोग को और प्रासंगिक बनाता है। उनका स्पष्ट मत था कि भारत और अफ्रीका की समस्याएँ एवं अवसर दोनों मिलते-जुलते हैं, इसलिए आगे बढ़ने का मार्ग परस्पर सहयोग से ही निकलेगा।

विदेश मंत्रालय का दृष्टिकोण

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (राज्य) ए. अजय कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस आयोजन का मूल लक्ष्य अफ्रीका के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों में नई ऊर्जा का संचार करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत-अफ्रीका व्यापार पहले से ही काफी सुदृढ़ है, परंतु इसकी क्षमता का पूर्ण दोहन अभी शेष है।

अजय कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन क्षेत्र के कारोबारियों को अफ्रीका को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक गंतव्य के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करने का मंच है। उन्होंने यह भी बताया कि BRICS के विस्तार के साथ अब कई प्रमुख अफ्रीकी देश इस बहुपक्षीय मंच का हिस्सा बन चुके हैं, जिससे भारत के अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक आदान-प्रदान को और बल मिलेगा।

वैश्विक संदर्भ और स्थायी विकास

यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब वैश्विक स्तर पर दक्षिण-दक्षिण सहयोग को नई गति मिल रही है और अफ्रीका महाद्वीप तेज़ी से उभरते हुए बाज़ारों का केंद्र बनता जा रहा है। राजदूत नकोमो ने वैश्विक नेताओं के संबोधनों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया के लिए स्थायी विकास का रास्ता अपनाने का समय आ गया है, जिसमें अफ्रीका की भागीदारी अनिवार्य है। गौरतलब है कि भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के बाद से दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक सहयोग के प्रयास लगातार तेज़ हुए हैं।

आगे की राह

इस सम्मेलन से उभरा संदेश स्पष्ट है — भारत और अफ्रीकी देश केवल कूटनीतिक संबंधों से आगे बढ़कर ठोस व्यापारिक और निवेश साझेदारी की ओर क़दम बढ़ाना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोलकाता जैसे व्यापारिक केंद्र से आयोजित इस तरह के मंच पूर्वी भारत को भी अफ्रीका कनेक्ट में शामिल करने का संकेत देते हैं। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच ठोस समझौतों और निवेश प्रस्तावों की उम्मीद की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यापक संभावनाओं की चर्चा, और कूटनीतिक सौहार्द। लेकिन असली कसौटी यह है कि जिम्बाब्वे और अन्य अफ्रीकी देशों में भारतीय निवेश के ये संकल्प ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतरते हैं। BRICS विस्तार के बावजूद भारत-अफ्रीका व्यापार में चीन की तुलना में भारत अब भी काफी पीछे है। बिना क्षेत्र-विशिष्ट समझौतों और स्पष्ट निवेश रोडमैप के, ऐसे सम्मेलन महज़ इरादों के बयान बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अफ्रीका बिजनेस लिंकेज सम्मेलन क्या है?
यह कोलकाता में 15 सितंबर 2026 को आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य भारत और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापारिक एवं निवेश संबंधों को नई गति देना है। इसमें विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और अफ्रीकी देशों के राजनयिकों ने भाग लिया।
जिम्बाब्वे की राजदूत स्टेला नकोमो ने सम्मेलन में क्या कहा?
राजदूत स्टेला नकोमो ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य भारत और जिम्बाब्वे के बीच मौजूद द्विपक्षीय संबंधों को ठोस आर्थिक लाभ में बदलना है। उन्होंने खनन, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्रों में भारतीय निवेश के लिए जिम्बाब्वे के खुलेपन का आह्वान किया।
जिम्बाब्वे में भारतीय निवेश के लिए कौन-से क्षेत्र प्राथमिकता में हैं?
जिम्बाब्वे की राजदूत ने खनन, विनिर्माण और ऊर्जा को प्रमुख निवेश क्षेत्रों के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार इन क्षेत्रों में विशाल अवसर मौजूद हैं और भारतीय व्यवसायी यहाँ सांस्कृतिक समानताओं का भी लाभ उठा सकते हैं।
BRICS विस्तार का भारत-अफ्रीका व्यापार पर क्या असर है?
विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव ए. अजय कुमार के अनुसार BRICS के विस्तार के साथ कई प्रमुख अफ्रीकी देश इस बहुपक्षीय मंच का हिस्सा बन चुके हैं। इससे भारत और अफ्रीकी देशों के बीच आर्थिक आदान-प्रदान को और बढ़ावा मिलने की संभावना है।
भारत-अफ्रीका व्यापार की मौजूदा स्थिति क्या है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार पहले से काफी मजबूत है, लेकिन इसमें अभी और अपार संभावनाएं हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय कारोबारियों को अफ्रीका को एक प्रमुख व्यापारिक गंतव्य के रूप में देखने के लिए प्रेरित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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