29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-अफ्रीका व्यापार 2001 से 14 गुना बढ़कर $98 अरब पहुंचा, संचयी निवेश $75 अरब के पार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-अफ्रीका व्यापार 2001 से 14 गुना बढ़कर $98 अरब पहुंचा, संचयी निवेश $75 अरब के पार

सारांश

भारत-अफ्रीका व्यापार दो दशकों में 14 गुना उछला — $7 अरब से $98 अरब तक। केपटाउन में हुए छठे निवेश सम्मेलन में 26 देशों के प्रतिनिधि जुटे और $7 ट्रिलियन की संयुक्त आर्थिक क्षमता का खाका सामने आया। यह साझेदारी अब टेलीकॉम और फार्मा से आगे AI, फिनटेक और जलवायु प्रौद्योगिकी तक फैल रही है।

मुख्य बातें

भारत-अफ्रीका द्विपक्षीय व्यापार 2001 के $7 अरब से करीब 14 गुना बढ़कर $98 अरब पर पहुंचा — IAEF के आंकड़े।
संचयी निवेश $75 अरब के पार; टेलीकॉम, फार्मा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि प्रमुख क्षेत्र।
वित्त वर्ष 2024-25 में व्यापार $100 अरब से अधिक रहा, जो 2019-20 के $56 अरब से करीब दोगुना।
छठे इंडिया-अफ्रीका एंटरप्रेन्योरशिप एंड इन्वेस्टमेंट समिट में 26 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए ( 13-15 जुलाई 2026, केपटाउन )।
भारत ने 41 अफ्रीकी देशों को $10 अरब से अधिक की 190+ रियायती ऋण सुविधाएं दी हैं।
भारत-अफ्रीका की संयुक्त आर्थिक क्षमता $7 ट्रिलियन आंकी गई है।

इंडिया-अफ्रीका एंटरप्रेन्योरशिप फोरम (IAEF) के आंकड़ों के अनुसार, भारत और अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2001 के $7 अरब से करीब 14 गुना बढ़कर $98 अरब तक पहुंच गया है। इसके साथ ही टेलीकॉम, फार्मा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि क्षेत्रों में केंद्रित संचयी निवेश भी $75 अरब के पार निकल गया है।

केपटाउन सम्मेलन में उभरी तस्वीर

13 से 15 जुलाई 2026 के दौरान केपटाउन में आयोजित छठे 'इंडिया-अफ्रीका एंटरप्रेन्योरशिप एंड इन्वेस्टमेंट समिट' में 26 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में पूर्ण सत्र, लक्षित कारोबारी बैठकें और कई कार्य समूहों का आयोजन हुआ।

इन कार्य समूहों में क्षेत्रीय निवेश, डिजिटल कौशल, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित औद्योगिकीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि, उप-सहारा अफ्रीका में फिनटेक इकोसिस्टम और अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र के तहत व्यापार एकीकरण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

वित्त वर्ष 2024-25 में $100 अरब का आंकड़ा पार

केपटाउन की मेयर समिति में आर्थिक विकास सदस्य जेम्स वोस के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-अफ्रीका व्यापार $100 अरब से अधिक रहा, जबकि 2019-20 में यह मात्र $56 अरब था। वोस ने इस वृद्धि को 'आने वाली और बड़ी प्रगति की सिर्फ शुरुआत' बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब यह सम्मेलन नई दिल्ली में 28 से 31 मई 2026 के दौरान आयोजित चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के लगभग छह सप्ताह बाद हुआ। उस अंतर-सरकारी बैठक में भारतीय अधिकारियों ने बताया था कि 1996 से 2025 के बीच अफ्रीका में भारत का कुल निवेश लगभग $80 अरब रहा है।

रियायती ऋण और डायस्पोरा की भूमिका

भारत ने 41 अफ्रीकी देशों को $10 अरब से अधिक की 190 से अधिक रियायती ऋण सुविधाएं (लाइन ऑफ क्रेडिट) प्रदान की हैं। इनका उपयोग पेयजल, कृषि, परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में किया गया है।

IAEF ने सम्मेलन के दौरान अफ्रीका के भारतीय मूल के 100 सबसे प्रभावशाली उद्यमियों की सूची भी जारी की, जिसमें केन्या, घाना, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC), बोत्सवाना, मेडागास्कर और मॉरीशस के उद्यमी शामिल हैं। DRC में विनमार्ट और सोमिका ग्रुप के चेयरमैन चेतन चुग भी इस सूची में हैं। गौरतलब है कि अफ्रीका में बसे भारतीय मूल के लगभग 30 लाख लोग ऐतिहासिक रूप से दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

$7 ट्रिलियन की संयुक्त आर्थिक क्षमता

IAEF के अनुसार, भारत और अफ्रीका की संयुक्त आर्थिक क्षमता लगभग $7 ट्रिलियन के बराबर है। स्वास्थ्य सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिनटेक, जलवायु प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल बुनियादी ढांचे में अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।

निवेश आंकड़ों में अंतर क्यों

आंकड़ों के अनुसार, सरकार द्वारा बताए गए $80 अरब के निवेश और IAEF द्वारा केवल निजी निवेश के लिए बताए गए इससे अधिक बड़े आंकड़े के बीच का अंतर दर्शाता है कि सार्वजनिक वित्तपोषण, रियायती ऋण और कई दशकों के निजी निवेश को मिलाकर भारत-अफ्रीका आर्थिक संबंधों का सटीक आकलन जटिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि एकीकृत डेटा ढांचे के बिना नीतिगत निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

आने वाले वर्षों में यह साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और निजी क्षेत्र की सहभागिता पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकारी दावे ($80 अरब निवेश) और IAEF के निजी-क्षेत्र के आंकड़ों के बीच की खाई यह सवाल उठाती है कि मापन का कोई एकीकृत ढांचा क्यों नहीं है। चीन की तुलना में — जो अफ्रीका में $300 अरब से अधिक निवेश कर चुका है — भारत की रफ्तार उल्लेखनीय है, पर अंतर अभी भी बड़ा है। असली परीक्षा यह है कि क्या फिनटेक और AI जैसे नए क्षेत्रों में हो रही चर्चा ठोस अनुबंधों और रोजगार में तब्दील होती है, या यह सम्मेलन कक्षों तक ही सीमित रहती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार कितना बढ़ा है?
IAEF के आंकड़ों के अनुसार, भारत-अफ्रीका व्यापार 2001 के $7 अरब से करीब 14 गुना बढ़कर $98 अरब तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह $100 अरब से भी अधिक रहा।
अफ्रीका में भारत का संचयी निवेश कितना है?
IAEF के अनुसार, अफ्रीका में भारत का संचयी निवेश $75 अरब से अधिक है, जो मुख्यतः टेलीकॉम, फार्मा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि में है। वहीं, भारत सरकार ने 1996-2025 के बीच कुल निवेश $80 अरब बताया है, जिसमें सार्वजनिक वित्तपोषण और रियायती ऋण भी शामिल हैं।
केपटाउन में आयोजित इंडिया-अफ्रीका समिट 2026 में क्या हुआ?
13 से 15 जुलाई 2026 को केपटाउन में छठे इंडिया-अफ्रीका एंटरप्रेन्योरशिप एंड इन्वेस्टमेंट समिट में 26 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में नवीकरणीय ऊर्जा, फिनटेक, फार्मास्यूटिकल्स और जलवायु-अनुकूल कृषि जैसे विषयों पर कार्य समूहों का आयोजन हुआ।
भारत ने अफ्रीकी देशों को कितनी रियायती ऋण सुविधाएं दी हैं?
भारत ने 41 अफ्रीकी देशों को $10 अरब से अधिक की 190 से अधिक रियायती ऋण सुविधाएं (लाइन ऑफ क्रेडिट) दी हैं। इनका उपयोग पेयजल, कृषि, परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी में किया गया है।
भारत-अफ्रीका की संयुक्त आर्थिक क्षमता कितनी है?
IAEF के अनुसार, भारत और अफ्रीका की संयुक्त आर्थिक क्षमता लगभग $7 ट्रिलियन है। AI, फिनटेक, जलवायु प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और डिजिटल बुनियादी ढांचे में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 20 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले