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भारत में FY26 में रिकॉर्ड $94.84 अरब का FDI, वैश्विक रैंकिंग में 11वें स्थान पर पहुँचा

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भारत में FY26 में रिकॉर्ड $94.84 अरब का FDI, वैश्विक रैंकिंग में 11वें स्थान पर पहुँचा

सारांश

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सकल FDI $94.84 अरब के रिकॉर्ड पर पहुँचा — पिछले साल से 17.7% अधिक। नेट FDI भी $0.96 अरब से उछलकर $6.95 अरब हुआ। UNCTAD रैंकिंग में भारत 13वें से 11वें स्थान पर आया, और Alphabet का $14.5 अरब का डेटा सेंटर दुनिया की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजना बनी।

मुख्य बातें

भारत में FY 2025-26 में 94.84 अरब डॉलर का सकल FDI दर्ज — FY2024-25 के 80.61 अरब डॉलर से करीब 17.7% अधिक।
नेट FDI 0.96 अरब डॉलर (FY25) से बढ़कर 6.95 अरब डॉलर (FY26) हुआ।
UNCTAD रिपोर्ट के अनुसार भारत वैश्विक FDI रैंकिंग में 13वें से 11वें स्थान पर पहुँचा।
ने भारत में 14.5 अरब डॉलर के डेटा सेंटर निवेश की घोषणा की — दुनिया की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड परियोजना।
पोलैंड की Hynfra ने आंध्र प्रदेश में 4 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 28 जुलाई 2026 को राज्यसभा में यह जानकारी दी।

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्थापित किया है। 28 जुलाई 2026 को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, इस वित्त वर्ष में देश में 94.84 अरब डॉलर का सकल FDI प्रवाह दर्ज किया गया — जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 80.61 अरब डॉलर की तुलना में करीब 17.7% अधिक है। यह वृद्धि न केवल संख्यात्मक रूप से उल्लेखनीय है, बल्कि यह भारत की वैश्विक निवेश छवि में आए बदलाव की भी पुष्टि करती है।

नेट FDI में भी बड़ा सुधार

राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि नेट FDI में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। वित्त वर्ष 2025-26 में नेट FDI बढ़कर 6.95 अरब डॉलर हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह मात्र 0.96 अरब डॉलर था। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में नेट FDI में उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों द्वारा बढ़ी हुई रिपैट्रिएशन (निवेश वापसी), डिसइन्वेस्टमेंट, और भारत से बाहर होने वाला विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (ODI) रहा है।

भारतीय कंपनियाँ भी हो रही हैं वैश्विक

चौधरी ने बताया कि वर्ष 2022 में लागू किए गए उदार ODI नियमों के चलते भारतीय कंपनियाँ विदेशों में अपने कारोबार का तेज़ी से विस्तार कर रही हैं। उनके अनुसार, इससे भारतीय उद्यम वैश्विक बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं और दीर्घकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश वापसी का बढ़ता रुझान यह दर्शाता है कि भारत निवेशकों को बेहतर रिटर्न दे रहा है — जो एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य की पहचान है।

वैश्विक रैंकिंग में भारत की छलांग

संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की नवीनतम वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने FDI आकर्षित करने वाले देशों की वैश्विक रैंकिंग में दो स्थानों की छलांग लगाई है। वर्ष 2025 में 38.89 अरब डॉलर के FDI प्रवाह के साथ भारत दुनिया का 11वाँ सबसे बड़ा FDI प्राप्तकर्ता देश बन गया, जबकि वर्ष 2024 में 27.09 अरब डॉलर के निवेश के साथ वह 13वें स्थान पर था। गौरतलब है कि जहाँ विकासशील देशों में FDI प्रवाह औसतन 2% और एशिया के विकासशील देशों में 3% बढ़ा, वहीं भारत ने इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन किया।

विनिर्माण और ग्रीनफील्ड निवेश में उछाल

UNCTAD की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत ने सेवा क्षेत्र से आगे बढ़कर विनिर्माण और उन्नत उद्योगों में निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय नीतियाँ अपनाई हैं। वर्ष 2025 में भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड निवेश परियोजनाएँ भी अपने नाम कीं। अमेरिकी कंपनी Alphabet Inc. ने भारत में 14.5 अरब डॉलर के डेटा सेंटर निवेश की घोषणा की — जो दुनिया की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड परियोजना रही। इसके अलावा, पोलैंड की Hynfra ने आंध्र प्रदेश में 4 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर भारत में प्रमुख विदेशी निवेशकों में अपनी जगह बनाई।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक FDI प्रवाह पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और व्यापार तनावों का दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की नीतिगत स्थिरता, बड़ा घरेलू बाज़ार और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ आने वाले वर्षों में भी निवेशकों को आकर्षित करती रहेंगी। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी नेट FDI में छिपी है — जो $0.96 अरब से $6.95 अरब पर आई, यानी सात गुना से अधिक उछाल। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक अब भारत से मुनाफा निकाल भी रहे हैं, जो परिपक्व निवेश चक्र की निशानी है। हालाँकि Alphabet जैसी बड़ी ग्रीनफील्ड घोषणाएँ उत्साहजनक हैं, विशेषज्ञ यह भी पूछते हैं कि इनमें से कितना निवेश वास्तव में ज़मीन पर उतरेगा और कितने रोज़गार सृजित होंगे — क्योंकि घोषणा और वास्तविक प्रवाह के बीच की खाई भारत में पहले भी देखी गई है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का FY2025-26 में FDI रिकॉर्ड क्यों महत्वपूर्ण है?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में 94.84 अरब डॉलर का सकल FDI आया, जो अब तक का सर्वाधिक है और पिछले वर्ष के 80.61 अरब डॉलर से करीब 17.7% अधिक है। यह भारत की वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में बढ़ती साख को दर्शाता है।
नेट FDI और सकल FDI में क्या अंतर है?
सकल FDI में विदेश से आने वाला कुल निवेश शामिल होता है, जबकि नेट FDI में से रिपैट्रिएशन, डिसइन्वेस्टमेंट और भारत से बाहर जाने वाला ODI घटाया जाता है। FY2025-26 में नेट FDI 6.95 अरब डॉलर रहा, जो FY2024-25 के 0.96 अरब डॉलर से सात गुना से अधिक है।
UNCTAD रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग क्या रही?
UNCTAD की वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 38.89 अरब डॉलर के FDI प्रवाह के साथ भारत दुनिया का 11वाँ सबसे बड़ा FDI प्राप्तकर्ता देश बना, जबकि 2024 में वह 27.09 अरब डॉलर के साथ 13वें स्थान पर था।
भारत में किस कंपनी ने सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजना की घोषणा की?
अमेरिकी कंपनी Alphabet Inc. ने भारत में 14.5 अरब डॉलर के डेटा सेंटर निवेश की घोषणा की, जो वर्ष 2025 में दुनिया की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड परियोजना रही। इसके अलावा पोलैंड की Hynfra ने आंध्र प्रदेश में 4 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की।
नेट FDI में पहले गिरावट क्यों आई थी?
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अनुसार, नेट FDI में उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों द्वारा बढ़ी हुई रिपैट्रिएशन, डिसइन्वेस्टमेंट और 2022 के उदार ODI नियमों के बाद भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में बढ़ाया गया निवेश रहा।
राष्ट्र प्रेस
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