भारत-कोस्टा रिका द्विपक्षीय व्यापार ₹391 मिलियन डॉलर पार, JETCO बैठक में आर्थिक सहयोग पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और कोस्टा रिका ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 8 जुलाई 2026 को आयोजित भारत-कोस्टा रिका संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति (JETCO) की पहली वर्चुअल बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और संस्थागत सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई। 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार बढ़कर लगभग 391 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया है, जो निरंतर वृद्धि का संकेत है।
JETCO बैठक: मुख्य घटनाक्रम
इस बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव विमल आनंद और कोस्टा रिका गणराज्य की विदेश व्यापार महानिदेशक एड्रियाना कास्त्रो ने की। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों की विस्तृत समीक्षा की तथा अपने-अपने व्यापार एवं निवेश नियामक ढाँचों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
दोनों देशों ने बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) संबंधों को सुदृढ़ करने, संबंधित मंत्रालयों, नियामक प्राधिकरणों और उद्योग जगत के बीच नियमित संवाद को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति व्यक्त की।
व्यापार वृद्धि और सहयोग के नए क्षेत्र
दोनों पक्षों ने 2025-26 में वस्तु व्यापार के 391 मिलियन डॉलर तक पहुँचने पर संतोष जताया और आगे व्यापार व निवेश बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। इस दौरान मानक विकास, अनुरूपता मूल्यांकन, खाद्य सुरक्षा, फार्मास्युटिकल विनियमन और निर्यात प्रमाणन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ भी तलाशी गईं।
गौरतलब है कि दोनों देशों ने अपने-अपने मानक, मान्यता, प्रमाणन और नियामक ढाँचों के बारे में जानकारी साझा की, ताकि व्यापार को सुगम बनाया जा सके और तकनीकी बाधाओं को कम किया जा सके।
JETCO की भूमिका और संस्थागत महत्व
भारत-कोस्टा रिका आर्थिक सहयोग समझौते (MoU) के तहत गठित JETCO दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों की समीक्षा करने, आपसी हित के मुद्दों को सुलझाने और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए मुख्य संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है। यह पहली बैठक दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।
आगे की राह
दोनों पक्षों ने JETCO को व्यापार, निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह सहयोग भारत की मध्य अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें फार्मा, खाद्य प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विशेष संभावनाएँ देखी जा रही हैं।