ऑस्ट्रेलिया को भारत के निर्यात में दोगुनी वृद्धि, द्विपक्षीय व्यापार समझौते का प्रभाव
सारांश
Key Takeaways
- भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए ने निर्यात को दोगुना किया।
- व्यापार में वृद्धि से नए अवसर मिले हैं।
- 70.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर प्राथमिकता दी गई है।
- जैविक उत्पादों के लिए पारस्परिक मान्यता की व्यवस्था।
- निर्यात में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (इंड-ऑस ईसीटीए) के चार साल पूरे होने पर यह स्पष्ट हो चुका है कि इस समझौते ने भारत के निर्यात को बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापार को मज़बूत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह समझौता 2 अप्रैल 2022 को हस्ताक्षरित किया गया था और पिछले चार वर्षों में इसने दोनों देशों में व्यापार, उद्यमियों और रोजगार के लिए नए अवसरों का सृजन किया है।
भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात दोगुना से अधिक बढ़ चुका है, जो वित्त वर्ष 2020-21 में 4 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 8.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
वहीं, 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 24.1 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत के निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) में भारत का ऑस्ट्रेलिया के साथ कुल व्यापार 19.3 अरब डॉलर रहा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए के तहत, भारत ने अपनी 70.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर प्राथमिकता के आधार पर बाजार पहुंच प्रदान की है, जो कुल व्यापार मूल्य के 90.6 प्रतिशत को कवर करती है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने भारत से आने वाले 100 प्रतिशत आयात पर प्राथमिकता बाजार पहुंच दी है।
इनमें से 98.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को लागू होते ही ड्यूटी-फ्री कर दिया गया, जबकि शेष 1.7 प्रतिशत (113 टैरिफ लाइनें) को पांच वर्षों में धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। 1 जनवरी 2026 से भारत के सभी निर्यात ऑस्ट्रेलिया में शून्य-शुल्क (जीरो-ड्यूटी) के साथ प्रवेश के लिए पात्र हो जाएंगे।
ईसीटीए के तहत विभिन्न क्षेत्रों में भी लाभ देखने को मिला है; खासकर टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, केमिकल और कृषि उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं, आयात के मामले में यह समझौता भारत को बेस मेटल, कच्चा कपास, केमिकल, उर्वरक और दाल जैसे आवश्यक कच्चे माल तक आसान पहुंच प्रदान करता है, जो देश के उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह पूरक व्यापार ढांचा सप्लाई चेन को मज़बूत करता है और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देता है।
दोनों देशों के सहयोग में एक और महत्वपूर्ण कदम 24 सितंबर 2025 को जैविक उत्पादों पर हस्ताक्षरित पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (एमआरए) के रूप में सामने आया। यह समझौता दोनों देशों के सर्टिफिकेशन सिस्टम को मान्यता देता है, जिससे जैविक उत्पादों के व्यापार में लागत, समय और प्रक्रियाओं की दोहराव कम हो जाती है। इससे ऑर्गेनिक सेक्टर में पारदर्शिता और विश्वास भी बढ़ा है।
बयान में कहा गया है कि यह व्यापार समझौता भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों का एक मजबूत आधार बनकर उभरा है, जिससे व्यापार, एमएसएमई, श्रमिकों और उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है।