बिहार: राजेश यादव की मौत पर भड़की हिंसा, पुलिस पर हमला और खुदकुशी का मामला
सारांश
Key Takeaways
- राजेश यादव की आत्महत्या ने कई सवाल उठाए हैं।
- अफवाहों के कारण भड़की हिंसा ने पुलिस को संकट में डाल दिया।
- सीसीटीवी फुटेज ने घटना की सच्चाई को उजागर किया।
- पुलिस अब उन लोगों की पहचान कर रही है जो हिंसा में शामिल थे।
- इस घटना ने समाज में अफवाहों के प्रभाव को दर्शाया।
कटिहार, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के कटिहार जिले के फलका थाना में एक आरोपी राजेश यादव की मृत्यु के बाद, नाराज लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। उपद्रवियों ने पुलिस की राइफल भी छीन ली।
असल में, क्षेत्र में यह अफवाह फैली थी कि राजेश यादव की मौत पुलिस की कस्टडी में हुई है, जिसके बाद लोग थाने में इकट्ठा हो गए और पुलिस के साथ बहस करने लगे। देखते ही देखते, स्थिति बिगड़ गई और लोगों ने पुलिस पर हमला करना शुरू कर दिया। इसी दौरान, उपद्रवियों ने पुलिस की 7.62 एसएलआर राइफल छीन ली। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और भय का माहौल बन गया।
स्थिति के बिगड़ने पर, पुलिस ने उपद्रवियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने थाना परिसर में पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी शुरू कर दी। पुलिसकर्मी इस अचानक हुए हमले से संभल नहीं पाए और कई को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।
मामले की जानकारी मिलने पर, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और उपद्रवियों को भगाया। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया है, जिससे उपद्रवियों की पहचान की जा सके।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने थाने के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की। फुटेज में यह स्पष्ट दिखा कि राजेश यादव हाजत में अकेला था। उसने स्वयं चादर का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। इस खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया कि उसकी मृत्यु पुलिस की पिटाई से नहीं, बल्कि खुदकुशी के कारण हुई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल अफवाहों के आधार पर इतनी बड़ी हिंसा को अंजाम देना उचित था या इसके पीछे कोई साजिश थी।
उन्होंने बताया कि हिंसा की जांच के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया जा रहा है। अफवाह कैसे फैली, इसकी भी जांच की जा रही है। हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है, ताकि पूरे मामले का खुलासा किया जा सके।