पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री डकैती की 14 घटनाएं, भारतीय नौसेना के IFC-IOR ने 2 सक्रिय गिरोहों की पहचान की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना के इन्फोर्मेशन फ्यूजन सेंटर–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) ने 8 जुलाई 2026 को पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री डकैती की स्थिति पर एक ताज़ा रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार 26 मई 2026 से 7 जुलाई 2026 तक कुल 14 घटनाएं दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस क्षेत्र में कम से कम 2 सक्रिय समुद्री डाकू गिरोह संचालित हो रहे हैं, और खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
घटनाओं का विवरण और भौगोलिक फैलाव
7 जुलाई 2026 को 1300 UTC तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन 14 घटनाओं में 6 प्रत्यक्ष हमले और 8 संदिग्ध संपर्क या डकैती के प्रयास शामिल हैं। इनमें से 2 घटनाओं में भारतीय नौसेना ने समय पर हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया।
घटनाओं के समयक्रम और भौगोलिक विश्लेषण से संकेत मिलता है कि एक गिरोह अल मकल्ला–बोसासो समुद्री मार्ग के आसपास सक्रिय है, जबकि दूसरा अदन की खाड़ी के निकट संचालित हो रहा है। IFC-IOR के अनुसार, ये गतिविधियां अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक सुनियोजित परिचालन पैटर्न का हिस्सा हैं।
सोमालिया बेसिन से अदन की खाड़ी की ओर खिसका खतरा
IFC-IOR की रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बदलाव रेखांकित किया गया है — समुद्री डकैती का केंद्र सोमालिया बेसिन से खिसककर अदन की खाड़ी और उससे जुड़े व्यापारिक मार्गों की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी हिंद महासागर में मौसमी खराबी और ऊंची लहरों के कारण समुद्री डाकुओं की छोटी नौकाएं अपेक्षाकृत शांत और व्यस्त व्यापारिक जलमार्गों की ओर रुख कर रही हैं।
गौरतलब है कि यह वह क्षेत्र है जहां बड़े वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सर्वाधिक होती है। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया घटनाओं में तेल टैंकरों, थोक मालवाहक जहाजों और कंटेनर पोतों को निशाना बनाने के प्रयास किए गए हैं, जो यह दर्शाता है कि समुद्री डाकू उच्च आर्थिक मूल्य वाले जहाजों पर केंद्रित हैं।
भारतीय नौसेना की कार्रवाई
मालवाहक पोत माशाल्लाह-1, फरीदा-5 और गोल्डन आर्सेनल से जुड़े मामलों में भारतीय नौसेना की त्वरित प्रतिक्रिया को रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। IFC-IOR द्वारा समय पर सूचना संलयन और विभिन्न समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित प्रयासों के चलते प्रतिक्रिया समय कम हुआ और संभावित गंभीर घटनाओं को नियंत्रित किया जा सका।
जहाज़ों के लिए सतर्कता की सलाह
IFC-IOR ने प्रभावित समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों के कप्तानों, सुरक्षा अधिकारियों और परिचालकों को उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी है। इसके अंतर्गत समुद्री सुरक्षा के मानक उपायों को लागू करना, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रियाओं को तैयार रखना, निरंतर निगरानी करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना बिना देरी IFC-IOR तथा अन्य समुद्री रिपोर्टिंग केंद्रों को देना शामिल है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी हिंद महासागर और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती का खतरा अभी टला नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार के लिए यह जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग, उन्नत निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की भूमिका पहले से कहीं अधिक अनिवार्य हो गई है। आने वाले हफ्तों में मौसम की स्थिति में बदलाव के साथ समुद्री डाकुओं की गतिविधियों में और बदलाव संभव है, जिस पर IFC-IOR की निगरानी जारी है।