भारत-केन्या द्विपक्षीय व्यापार 25%25 बढ़कर 4.31 अरब डॉलर पहुंचा, FY2025-26 में नया रिकॉर्ड
सारांश
Key Takeaways
- भारत-केन्या द्विपक्षीय व्यापार FY2025-26 में 24.91%25 बढ़कर 4.31 अरब डॉलर पर पहुंचा, जो FY2024-25 में 3.45 अरब डॉलर था।
- नैरोबी में भारत-केन्या JTC की 10वीं बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और रेजिना अकोता ओम्बम ने की।
- BIS और केन्या मानक ब्यूरो, CBIC और केन्या राजस्व प्राधिकरण तथा CII और इंडिया-केन्या चैंबर ऑफ कॉमर्स के बीच अहम समझौते हुए।
- दोनों देशों ने स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS) प्रणाली अपनाने की संभावना पर विचार किया।
- इंजीनियरिंग, दवा, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा को प्रमुख सहयोग क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया।
भारत और केन्या के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 24.91 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी के साथ 4.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 3.45 अरब डॉलर था। वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को यह जानकारी दी। इस वृद्धि के साथ भारत, केन्या के सबसे अहम व्यापारिक साझेदारों में शामिल हो गया है।
संयुक्त व्यापार समिति की 10वीं बैठक
नैरोबी में आयोजित भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति (JTC) की 10वीं बैठक में दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और केन्या के ट्रेड विभाग की प्रमुख रेजिना अकोता ओम्बम ने की। चर्चा में व्यापार विस्तार, बाज़ार पहुंच की बाधाओं को दूर करने और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया।
किन क्षेत्रों पर रहा फोकस
वाणिज्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, बैठक में इंजीनियरिंग सामान, दवाइयाँ, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में ऑटोमोबाइल, मशीनरी और निर्माण उपकरणों के निर्यात के अवसरों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। दवा क्षेत्र में भारत ने सस्ती जेनेरिक दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति में अपनी भूमिका को उजागर करते हुए व्यापार बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
अहम समझौते और पहल
बैठक में व्यापार सुगमता के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों की समीक्षा की गई। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और केन्या मानक ब्यूरो के बीच समझौते से मानकों और गुणवत्ता जाँच में सहयोग मजबूत होगा। इसके अलावा, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) और केन्या राजस्व प्राधिकरण के बीच एक समझौता हुआ, जिससे सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ सरल होंगी। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और इंडिया-केन्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के बीच हुए समझौते से व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय मुद्रा और नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा
दोनों देशों ने स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS) प्रणाली अपनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी और द्विपक्षीय लेन-देन आसान होगा। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने केन्या के सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग देने की इच्छा जताई। गौरतलब है कि केन्या पूर्वी अफ्रीका में भारत के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है, और यह वृद्धि भारत की 'अफ्रीका फर्स्ट' व्यापार नीति को नई ऊर्जा देती है।
आगे की राह
दोनों देशों के बीच व्यापार में यह तेज़ बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि LCS प्रणाली लागू होती है और मानकों का सामंजस्य बढ़ता है, तो अगले वित्त वर्ष में यह व्यापार 5 अरब डॉलर के पार जा सकता है। दोनों देशों के बीच संस्थागत ढाँचे को और मजबूत करने की दिशा में आगामी महीनों में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।