भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी: राजदूत सुरेश रेड्डी ने काहिरा में तीन मंत्रियों से की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
भारत के राजदूत सुरेश रेड्डी ने 30 जुलाई 2026 को काहिरा में मिस्र के उप विदेश मंत्री (अफ्रीकी मामले) मोहम्मद अबू बक्र सालेह से मुलाकात की और अफ्रीका में भारत-मिस्र सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को व्यापार, निवेश और श्रम सहयोग के क्षेत्रों में गहरा करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
अफ्रीका में सहयोग का नया खाका
काहिरा स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा, 'राजदूत सुरेश रेड्डी और राजदूत मोहम्मद अबू बक्र सालेह ने भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी के लगातार मजबूत हो रहे संबंधों पर विचार-विमर्श किया और अफ्रीका में सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा की।' दूतावास के अनुसार, यह सहयोग भारत की माँग-आधारित विकास साझेदारी और अफ्रीकी महाद्वीप में मिस्र की नेतृत्वकारी भूमिका की नींव पर आगे बढ़ेगा। गौरतलब है कि मिस्र अफ्रीकी संघ का एक प्रमुख सदस्य है और महाद्वीपीय व्यापार एवं कूटनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
औद्योगिक और निवेश सहयोग पर जोर
राजदूत रेड्डी ने मिस्र के उद्योग मंत्री खालिद हाशेम से भी मुलाकात की, जिसमें औद्योगिक विकास, निवेश प्रोत्साहन और मिस्र में अवसर तलाश रही भारतीय कंपनियों को समर्थन देने के उपायों पर केंद्रित चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने उद्योगों के बीच अधिक भागीदारी, तकनीकी साझेदारी और निवेशकों के लिए बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करने के तरीकों पर सहमति जताई। पिछले सप्ताह राजदूत रेड्डी ने स्वेज कैनाल इकोनॉमिक ज़ोन अथॉरिटी (SCZone) के चेयरमैन वालीद गमाल एल-दीन से भी बैठक की थी, जिसमें SCZone में भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया।
भारतीय कंपनियों की मिस्र में बढ़ती पकड़
दूतावास के मुताबिक, हाल के वर्षों में भारतीय कंपनियों ने वस्त्र, रसायन, फेरो-मैंगनीज और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में मिस्र में निवेश किया है। यह प्रवृत्ति दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक जुड़ाव को रेखांकित करती है। SCZone की बैठक में निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने और आर्थिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के अवसरों पर भी विचार हुआ।
कौशल विकास और श्रम सहयोग
राजदूत रेड्डी ने मिस्र के श्रम मंत्री हसन रद्दाद से भी मुलाकात की। इस बैठक में कौशल विकास, श्रम कानून, नियामक ढाँचा और कार्यबल की आवाजाही जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर सार्थक चर्चा हुई। मिस्र में कार्यरत भारतीय व्यवसायों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने एक बेहतर और गतिशील कारोबारी माहौल को बढ़ावा देने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
आगे की राह
इन बैठकों की श्रृंखला स्पष्ट संकेत देती है कि भारत मिस्र को अफ्रीका में अपनी विकास साझेदारी का एक प्रमुख केंद्र बिंदु मान रहा है। औद्योगिक, श्रम और कूटनीतिक स्तर पर एक साथ चल रही यह बहुआयामी कूटनीति भारत-मिस्र संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक ठोस कदम है।