भारत-कुवैत संबंध मजबूत करने पर बड़ी बैठक: राजदूत परमिता त्रिपाठी ने मंत्री शेख हमद जाबेर से की मुलाकात

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-कुवैत संबंध मजबूत करने पर बड़ी बैठक: राजदूत परमिता त्रिपाठी ने मंत्री शेख हमद जाबेर से की मुलाकात

सारांश

भारत की राजदूत परमिता त्रिपाठी ने कुवैत के अमीरी दीवान मंत्री शेख हमद जाबेर से मुलाकात कर PM मोदी की दिसंबर 2024 यात्रा के परिणामों की समीक्षा की। प्रौद्योगिकी साझेदारी से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा तक — यह बैठक भारत-कुवैत संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

राजदूत परमिता त्रिपाठी ने मंगलवार को कुवैत के अमीरी दीवान मामलों के मंत्री शेख हमद जाबेर अल-अली अल-सबाह से अहम कूटनीतिक बैठक की।
बैठक में दिसंबर 2024 में PM नरेंद्र मोदी की कुवैत यात्रा के परिणामों की समीक्षा की गई।
प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर सहमति।
होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
मंत्री ने इसी दिन क्यूबा और चीन के राजदूतों से भी मुलाकात की।

भारत की कुवैत में राजदूत परमिता त्रिपाठी ने मंगलवार, 6 मई 2025 को कुवैत के अमीरी दीवान मामलों के मंत्री शेख हमद जाबेर अल-अली अल-सबाह से एक अहम कूटनीतिक बैठक की। इस मुलाकात में भारत-कुवैत द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने तथा क्षेत्रीय शांति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर साझा प्रतिबद्धता दोहराने पर विशेष जोर दिया गया। कुवैत में भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक 'एक्स' (X) अकाउंट पर इस बैठक की जानकारी साझा की।

बैठक के मुख्य घटनाक्रम

राजदूत परमिता त्रिपाठी और मंत्री शेख हमद जाबेर अल-अली अल-सबाह के बीच हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच मित्रता और जन-संपर्क को और प्रगाढ़ करने पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुवैत यात्रा के परिणामों की समीक्षा की और उन पर आगे की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को विस्तार देने के तरीकों पर भी गहन चर्चा हुई।

ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जोर

राजदूत परमिता त्रिपाठी ने बैठक में कुवैत के साथ भारत की एकजुटता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया, जिसे क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए अनिवार्य बताया गया। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर बड़े पैमाने पर निर्भर है, ऐसे में यह मुद्दा नई दिल्ली के लिए विशेष रणनीतिक महत्व रखता है।

अन्य देशों के राजदूतों से भी मिले मंत्री

मंत्री शेख हमद जाबेर अल-अली अल-सबाह ने इसी दिन भारत के अलावा क्यूबा और चीन के राजदूतों से भी मुलाकात की। बैठक से पूर्व मंत्री ने सभी राजदूतों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं और कई देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने में जुटे हैं।

पिछली बैठकों का संदर्भ

यह पहली बार नहीं है जब राजदूत परमिता त्रिपाठी ने कुवैती नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठक की हो। वर्ष 2025 में उन्होंने कुवैत के उप विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह से भी मुलाकात की थी। उस बैठक में भी दोनों पक्षों ने भारत-कुवैत रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने और पारस्परिक हित के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग विस्तार के तरीकों पर चर्चा की थी। इसके अलावा, कुवैत में भारतीय समुदाय की भलाई और कल्याण को बढ़ाने तथा भारतीय संगठनों के बीच संवाद और जुड़ाव को प्रगाढ़ करने पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ था।

आगे की राह

भारत और कुवैत के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता यह दर्शाती है कि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय स्थिरता के मोर्चे पर नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी की दिसंबर 2024 की कुवैत यात्रा के बाद से शुरू हुई यह कूटनीतिक गति आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाती है कि नई दिल्ली खाड़ी क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को संस्थागत रूप देने में जुटी है। होर्मुज जलडमरूमध्य का विशेष उल्लेख महज औपचारिकता नहीं — यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा की नब्ज़ को छूता है, क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इन उच्चस्तरीय बैठकों के ठोस परिणाम — विशेषकर प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी में — अभी तक सार्वजनिक रूप से मापनीय नहीं रहे हैं। वास्तविक परीक्षा यह होगी कि PM मोदी की यात्रा के बाद की प्रतिबद्धताएँ कितनी जल्दी ठोस परियोजनाओं में तब्दील होती हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजदूत परमिता त्रिपाठी ने कुवैत में किससे मुलाकात की?
राजदूत परमिता त्रिपाठी ने कुवैत के अमीरी दीवान मामलों के मंत्री शेख हमद जाबेर अल-अली अल-सबाह से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-कुवैत द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
इस बैठक में किन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठक में PM मोदी की दिसंबर 2024 कुवैत यात्रा के परिणामों की समीक्षा, प्रौद्योगिकी-अनुसंधान-नवाचार में साझेदारी, और होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे। क्षेत्रीय शांति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
PM मोदी ने कुवैत की यात्रा कब की थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2024 में कुवैत की आधिकारिक यात्रा की थी। इस यात्रा के परिणामों की समीक्षा और उन पर आगे की कार्ययोजना इस ताज़ा बैठक का एक प्रमुख एजेंडा था।
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्ग है और भारत अपने कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है। इस मार्ग की सुरक्षा और निर्बाध नौवहन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कुवैत में भारतीय समुदाय के लिए क्या चर्चा हुई?
बैठकों में कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय की भलाई और कल्याण बढ़ाने तथा भारतीय संगठनों के बीच संवाद और जुड़ाव को प्रगाढ़ करने पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। यह मुद्दा भारत-कुवैत संबंधों का एक नियमित और महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले