भारत-कुवैत संबंध मजबूत करने पर बड़ी बैठक: राजदूत परमिता त्रिपाठी ने मंत्री शेख हमद जाबेर से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
भारत की कुवैत में राजदूत परमिता त्रिपाठी ने मंगलवार, 6 मई 2025 को कुवैत के अमीरी दीवान मामलों के मंत्री शेख हमद जाबेर अल-अली अल-सबाह से एक अहम कूटनीतिक बैठक की। इस मुलाकात में भारत-कुवैत द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने तथा क्षेत्रीय शांति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर साझा प्रतिबद्धता दोहराने पर विशेष जोर दिया गया। कुवैत में भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक 'एक्स' (X) अकाउंट पर इस बैठक की जानकारी साझा की।
बैठक के मुख्य घटनाक्रम
राजदूत परमिता त्रिपाठी और मंत्री शेख हमद जाबेर अल-अली अल-सबाह के बीच हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच मित्रता और जन-संपर्क को और प्रगाढ़ करने पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुवैत यात्रा के परिणामों की समीक्षा की और उन पर आगे की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को विस्तार देने के तरीकों पर भी गहन चर्चा हुई।
ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जोर
राजदूत परमिता त्रिपाठी ने बैठक में कुवैत के साथ भारत की एकजुटता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया, जिसे क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए अनिवार्य बताया गया। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर बड़े पैमाने पर निर्भर है, ऐसे में यह मुद्दा नई दिल्ली के लिए विशेष रणनीतिक महत्व रखता है।
अन्य देशों के राजदूतों से भी मिले मंत्री
मंत्री शेख हमद जाबेर अल-अली अल-सबाह ने इसी दिन भारत के अलावा क्यूबा और चीन के राजदूतों से भी मुलाकात की। बैठक से पूर्व मंत्री ने सभी राजदूतों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं और कई देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने में जुटे हैं।
पिछली बैठकों का संदर्भ
यह पहली बार नहीं है जब राजदूत परमिता त्रिपाठी ने कुवैती नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठक की हो। वर्ष 2025 में उन्होंने कुवैत के उप विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह से भी मुलाकात की थी। उस बैठक में भी दोनों पक्षों ने भारत-कुवैत रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने और पारस्परिक हित के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग विस्तार के तरीकों पर चर्चा की थी। इसके अलावा, कुवैत में भारतीय समुदाय की भलाई और कल्याण को बढ़ाने तथा भारतीय संगठनों के बीच संवाद और जुड़ाव को प्रगाढ़ करने पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ था।
आगे की राह
भारत और कुवैत के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता यह दर्शाती है कि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय स्थिरता के मोर्चे पर नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी की दिसंबर 2024 की कुवैत यात्रा के बाद से शुरू हुई यह कूटनीतिक गति आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है।