14 जुलाई 2026
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स्विस राजदूत माया तिस्साफी ने श्रीनगर में एलजी सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला से मुलाकात, सस्टेनेबल टूरिज्म और बागवानी पर द्विपक्षीय चर्चा

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स्विस राजदूत माया तिस्साफी ने श्रीनगर में एलजी सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला से मुलाकात, सस्टेनेबल टूरिज्म और बागवानी पर द्विपक्षीय चर्चा

सारांश

भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी का श्रीनगर दौरा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं था — यह कश्मीर के सतत विकास में स्विस विशेषज्ञता को व्यावहारिक रूप देने की कोशिश थी। हाइड्रोपावर, टनल तकनीक और कृषि सहयोग पर चर्चा से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष साझेदारी को ठोस ज़मीन देने के इच्छुक हैं।

मुख्य बातें

स्विस राजदूत माया तिस्साफी ने 29 मई 2026 को श्रीनगर में एलजी मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला से अलग-अलग मुलाकात की।
बैठकों में सस्टेनेबल टूरिज्म, बागवानी, व्यावसायिक प्रशिक्षण, फूड प्रोसेसिंग और कृषि में सहयोग पर चर्चा हुई।
स्विट्जरलैंड की हाइड्रोपावर तकनीक, हाई-एल्टीट्यूड क्लाइमेट स्टडीज और टनल व ब्रिज निर्माण विशेषज्ञता को भी रेखांकित किया गया।
राजदूत तिस्साफी ने मुख्य सचिव अटल डुल्लू और विधायक सज्जाद लोन से भी मुलाकात की।
तिस्साफी को कूटनीति और विकास में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है; वह सितंबर 2024 से भारत में राजदूत हैं।

भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में सस्टेनेबल टूरिज्म, बागवानी, व्यावसायिक प्रशिक्षण, फूड प्रोसेसिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्य बैठकें और एजेंडा

अधिकारियों के अनुसार, राजदूत तिस्साफी की एलजी मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला के साथ हुई बैठकें कश्मीर घाटी के उनके मौजूदा दौरे का हिस्सा थीं। इसके अलावा, वह जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद लोन से भी मिलीं।

बैठकों में स्विट्जरलैंड की विशेषज्ञता को जम्मू-कश्मीर के विकास से जोड़ने पर विशेष ज़ोर दिया गया। चर्चा का केंद्र न केवल पर्यटन, बल्कि तकनीकी और औद्योगिक सहयोग भी रहा।

स्विस विशेषज्ञता का योगदान

राजदूत तिस्साफी ने इस क्षेत्र में स्विट्जरलैंड के मौजूदा योगदान को रेखांकित किया, जिसमें हाइड्रोपावर तकनीक, हाई-एल्टीट्यूड क्लाइमेट स्टडीज और टनल व ब्रिज जैसे बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के माध्यम से स्विस विशेषज्ञता इस क्षेत्र के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

गौरतलब है कि कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियाँ — ऊँचाई, पहाड़ी इलाका और जलवायु — स्विट्जरलैंड से काफी मिलती-जुलती हैं, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच तकनीकी साझेदारी स्वाभाविक रूप से प्रासंगिक बनती है।

राजदूत का बयान

अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर राजदूत तिस्साफी ने लिखा, "श्रीनगर में लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ कश्मीर में सहयोग की गुंजाइश पर सस्टेनेबल पर्यटन और व्यावसायिक प्रशिक्षण, फूड प्रोसेसिंग और कृषि पर फायदेमंद मीटिंग हुईं।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे यह बताते हुए गर्व हुआ कि कैसे स्विस विशेषज्ञता निजी क्षेत्र के ज़रिए — टनल और ब्रिज से लेकर हाइड्रोपावर तकनीक और संयुक्त शोध तक — इस इलाके के विकास में योगदान दे रही है।" उन्होंने कश्मीर के पहाड़ों की सुंदरता को स्विट्जरलैंड से मिलती-जुलती बताया।

राजदूत माया तिस्साफी: परिचय

माया तिस्साफी भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड की राजदूत हैं और उन्होंने सितंबर 2024 में नई दिल्ली में अपना पद संभाला। वह एक सामाजिक वैज्ञानिक हैं और उनके पास ज्यूरिख, बेसल और बर्न विश्वविद्यालय से पब्लिक हेल्थ में मास्टर डिग्री तथा मीडिएशन में डिप्लोमा है।

तिस्साफी को कूटनीति, शांति-निर्माण और विकास के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह 2002 में स्विट्जरलैंड के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन अफेयर्स (FDFA) से जुड़ीं और 2011 से राजदूत के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मध्य-पूर्व व उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा चुकी हैं।

यह दौरा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब जम्मू-कश्मीर अपनी अर्थव्यवस्था को पर्यटन और कृषि-आधारित उद्योगों के माध्यम से मज़बूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच ठोस सहयोग समझौतों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि चर्चा की मेज़ पर रखे गए सहयोग के प्रस्ताव कब और किस रूप में ज़मीन पर उतरेंगे। हाइड्रोपावर और टनल तकनीक में स्विस दक्षता निर्विवाद है, परंतु जम्मू-कश्मीर में पिछले कई वर्षों में कई विदेशी निवेश और सहयोग प्रस्ताव घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ पाए। सस्टेनेबल टूरिज्म की बात करना तब तक अधूरी है जब तक बुनियादी ढाँचे, सुरक्षा माहौल और स्थानीय उद्यमियों को साथ लेने की ठोस योजना सामने न आए। इस दौरे की सफलता का पैमाना आने वाले महीनों में होने वाले समझौते और उनके क्रियान्वयन से तय होगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्विस राजदूत माया तिस्साफी ने जम्मू-कश्मीर में किससे-किससे मुलाकात की?
राजदूत माया तिस्साफी ने 29 मई 2026 को श्रीनगर में एलजी मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मुख्य सचिव अटल डुल्लू और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद लोन से मुलाकात की। यह दौरा कश्मीर घाटी की उनकी आधिकारिक यात्रा का हिस्सा था।
स्विट्जरलैंड और जम्मू-कश्मीर के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई?
बैठकों में सस्टेनेबल टूरिज्म, बागवानी, व्यावसायिक प्रशिक्षण, फूड प्रोसेसिंग और कृषि में सहयोग पर चर्चा हुई। इसके अलावा हाइड्रोपावर तकनीक, हाई-एल्टीट्यूड क्लाइमेट स्टडीज और टनल व ब्रिज जैसे बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र भी एजेंडे में शामिल रहे।
माया तिस्साफी कौन हैं और उनका अनुभव क्या है?
माया तिस्साफी भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड की राजदूत हैं, जिन्होंने सितंबर 2024 में नई दिल्ली में पदभार संभाला। उन्हें कूटनीति, शांति-निर्माण और विकास के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है और वह 2011 से राजदूत के पद पर कार्यरत हैं।
जम्मू-कश्मीर में स्विट्जरलैंड की विशेषज्ञता का क्या योगदान है?
स्विट्जरलैंड पहले से ही हाइड्रोपावर तकनीक, हाई-एल्टीट्यूड क्लाइमेट स्टडीज और टनल व ब्रिज निर्माण के क्षेत्र में इस क्षेत्र में योगदान दे रहा है। राजदूत तिस्साफी के अनुसार, निजी क्षेत्र के माध्यम से यह विशेषज्ञता संयुक्त शोध तक भी विस्तारित हो सकती है।
कश्मीर और स्विट्जरलैंड के बीच क्या समानता बताई गई?
राजदूत तिस्साफी ने कश्मीर के पहाड़ों की भौगोलिक सुंदरता और जलवायु को स्विट्जरलैंड से मिलती-जुलती बताया। यह समानता सस्टेनेबल टूरिज्म और हाई-एल्टीट्यूड तकनीकी सहयोग के लिए एक स्वाभाविक आधार प्रदान करती है।
राष्ट्र प्रेस
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