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राजीव शुक्ला का श्रीनगर में बयान: सैन्य अधिकारियों से LAC, चीन और होर्मुज पर हुई चर्चा

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राजीव शुक्ला का श्रीनगर में बयान: सैन्य अधिकारियों से LAC, चीन और होर्मुज पर हुई चर्चा

सारांश

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने श्रीनगर में सैन्य अधिकारियों से मुलाकात के बाद LAC, चीन और होर्मुज जलडमरूमध्य पर खुलकर बात की। उनका संदेश साफ था — सीमा सुरक्षा, विकास और ऊर्जा आपूर्ति तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं और तीनों पर एक साथ ध्यान देना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने 23 जून 2026 को श्रीनगर में संसदीय अध्ययन यात्रा के तहत शीर्ष सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की।
बैठक में पूर्वी लद्दाख में LAC की स्थिति, चीन के साथ द्विपक्षीय संबंध और रणनीतिक घटनाक्रमों की समीक्षा की गई।
शुक्ला ने सुरक्षा के साथ-साथ विकास और आम जनता का विश्वास अर्जित करने पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया के तनाव को वैश्विक ऊर्जा और तेल संकट की वजह बताते हुए शीघ्र समाधान की माँग की।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से भारत आने वाले जहाज़ों की संख्या 400-500 से घटकर बेहद कम हो गई है।

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला, जो संसद की स्थायी समिति के सदस्य भी हैं, ने 23 जून 2026 को श्रीनगर में पत्रकारों को बताया कि जम्मू-कश्मीर की संसदीय अध्ययन यात्रा के तहत शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति, चीन के साथ द्विपक्षीय संबंध और क्षेत्रीय रणनीतिक घटनाक्रमों का विस्तार से आकलन किया गया। यह यात्रा संसदीय समिति की उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों की ज़मीनी हकीकत को नीति-निर्माण से जोड़ा जाता है।

सैन्य अधिकारियों से चर्चा के मुद्दे

शुक्ला ने बताया कि बैठक 'अत्यंत सार्थक' रही। उन्होंने कहा कि समिति ने यह जानने का प्रयास किया कि सीमाओं की सुरक्षा किस प्रकार की जा रही है और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से चीन पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा को भी बैठक का अहम हिस्सा बताया।

शुक्ला ने यह भी कहा कि आम नागरिकों का विश्वास अर्जित करना उतना ही ज़रूरी है जितना सीमाओं की सुरक्षा। उनके अनुसार, सुरक्षा और जन-विश्वास एक-दूसरे के पूरक हैं।

विकास पर जोर

सुरक्षा के साथ-साथ शुक्ला ने विकास को भी अपरिहार्य बताया। उनके अनुसार, विकास के कदम हमेशा आम लोगों के हितों को ध्यान में रखकर उठाए जाते हैं और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे पर विशेष ज़ोर दिया है।

पश्चिम एशिया के तनाव पर चिंता

शुक्ला ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को वैश्विक चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और इसका शीघ्र समाधान आवश्यक है। उनके मुताबिक, जितनी जल्दी यह संकट सुलझेगा, उतना ही आम जनता को राहत मिलेगी।

उन्होंने विशेष रूप से ऊर्जा और तेल संकट का उल्लेख किया। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया के तनाव की वजह से ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा संकट

शुक्ला ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज के खुले रहने पर भारत को 400 से 500 जहाज़ के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति होती थी, लेकिन मौजूदा तनाव के कारण यह संख्या बेहद कम हो गई है। उनके मुताबिक, होर्मुज के सुचारू संचालन से ही भारत का ऊर्जा संकट दूर हो सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात पर निर्भर है और वैश्विक तेल बाज़ार में अस्थिरता घरेलू मूल्यों को सीधे प्रभावित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन शुक्ला का होर्मुज और ऊर्जा संकट को LAC की चर्चा से जोड़ना बताता है कि विपक्ष अब सुरक्षा को केवल सैन्य नज़रिए से नहीं, बल्कि आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में देख रहा है। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की खाड़ी पर ऊर्जा निर्भरता और होर्मुज की भूमिका अक्सर घरेलू राजनीतिक विमर्श में हाशिए पर रहती है। हालाँकि, बिना किसी ठोस सिफारिश या समिति की रिपोर्ट के, यह बयान अभी नीतिगत दबाव से ज़्यादा राजनीतिक संकेत है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजीव शुक्ला की श्रीनगर में सैन्य अधिकारियों से बैठक का उद्देश्य क्या था?
यह बैठक संसद की स्थायी समिति की जम्मू-कश्मीर अध्ययन यात्रा का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य LAC की स्थिति का जायज़ा लेना, चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करना और रणनीतिक घटनाक्रमों का आकलन करना था।
होर्मुज जलडमरूमध्य का भारत की ऊर्जा आपूर्ति से क्या संबंध है?
शुक्ला के अनुसार, होर्मुज के सुचारू रूप से खुले रहने पर भारत को 400 से 500 जहाज़ों के ज़रिए ऊर्जा मिलती थी, जो मौजूदा पश्चिम एशिया तनाव के कारण बेहद कम हो गई है। होर्मुज के बंद या अवरुद्ध रहने से भारत का ऊर्जा संकट गहरा होता है।
पश्चिम एशिया के तनाव का भारत पर क्या असर पड़ रहा है?
शुक्ला ने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष से ऊर्जा और तेल की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधी परेशानी हो रही है। उन्होंने इस तनाव के शीघ्र समाधान की अपील की।
राजीव शुक्ला ने जम्मू-कश्मीर में विकास पर क्या कहा?
शुक्ला ने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ विकास भी उतना ही ज़रूरी है और विकास के कदम हमेशा आम लोगों के हितों को ध्यान में रखकर उठाए जाने चाहिए। उन्होंने आम नागरिकों का विश्वास अर्जित करने को भी प्राथमिकता बताया।
संसदीय समिति की जम्मू-कश्मीर यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह यात्रा संसद की स्थायी समिति को सीमावर्ती क्षेत्रों की ज़मीनी स्थिति से सीधे अवगत कराती है, जिससे नीति-निर्माण में व्यावहारिक जानकारी जुड़ती है। विशेषकर LAC और चीन के संदर्भ में यह समीक्षा रणनीतिक रूप से अहम मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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