होर्मुज संकट: PM मोदी ने 30 जुलाई को बुलाई हाई-लेवल कैबिनेट बैठक, ऊर्जा सुरक्षा की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जुलाई 2026 को संसद स्थित अपने कार्यालय में एक उच्चस्तरीय कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य की बाधित स्थिति और भारत की ऊर्जा एवं ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे असर की व्यापक समीक्षा की गई। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनज़र यह बैठक तत्काल बुलाई गई।
बैठक में कौन-कौन शामिल रहे
इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उपस्थित रहे। इनके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और बंदरगाह एवं जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी इस महत्त्वपूर्ण बैठक का हिस्सा बने।
होर्मुज संकट और भारत पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक बाज़ारों में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में तेज़ी आई है। इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाज़ों पर हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। भारतीय नाविकों की मौत एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है और सरकार ने इस मुद्दे को ईरान तथा अमेरिका दोनों के समक्ष उठाया है।
गौरतलब है कि भारत के कच्चे तेल की औसत बास्केट कीमत अप्रैल 2026 में $114.5 प्रति बैरल से घटकर 22 जुलाई 2026 तक $77.6 प्रति बैरल रह गई है — हालाँकि यह गिरावट राहत देती है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता बनी हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और उठाए गए कदम
सरकार ने इसी सप्ताह संसद को सूचित किया कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद ऊर्जा सहित महत्त्वपूर्ण औद्योगिक इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें आयात स्रोतों में विविधता, अग्रिम खरीद और बफर स्टॉक का रखरखाव शामिल है। उर्वरकों और अन्य कृषि इनपुट की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गैस की निर्बाध आपूर्ति के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
चुनिंदा पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक पर अस्थायी रूप से सीमा शुल्क से छूट दी गई है। कारोबारों की मदद के लिए 'भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल रिलीफ' स्कीम शुरू की गई है, जो लॉजिस्टिक्स और निर्यात सुविधा में लचीलापन प्रदान करती है।
निर्यातकों और उद्योग को राहत
माल ढुलाई, बीमा और युद्ध-जोखिम से जुड़े बढ़े हुए खर्चों को कम करने के लिए आरओडीटीईपी (RoDTEP) — यानी निर्यात किए गए उत्पादों पर शुल्क और कर में छूट — के लाभ फिर से बहाल किए गए हैं। इसके साथ ही 'इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0' के ज़रिये प्रभावित व्यवसायों को तरलता (लिक्विडिटी) सहायता प्रदान की जा रही है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक अस्थिरता कच्चे तेल का आयात करने वाली उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, यह संकट मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता के लिए सीधा खतरा है। सरकार के अगले कदम — विशेषकर वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और कूटनीतिक पहलों पर — आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।