होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर भारत-पाक रिफाइनरियों को मिलेगी राहत: व्हाइट हाउस
सारांश
मुख्य बातें
व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने 31 मई 2026 को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत और पाकिस्तान की रिफाइनरियों की तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के पुनः खुलने के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। उन्होंने यह बात एबीसी न्यूज के कार्यक्रम 'दिस वीक' में कही।
हैसेट का बयान: क्या कहा व्हाइट हाउस ने
हैसेट ने कहा, "जब होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाएगा, तो बड़े तेल टैंकर प्रतिदिन लगभग 300 समुद्री मील की दूरी तय कर सकेंगे। भारत और पाकिस्तान की वे रिफाइनरियाँ, जो आपूर्ति बाधित होने के कारण काफी हद तक प्रभावित हुई हैं, उन्हें फिर से पर्याप्त मात्रा में तेल मिलने लगेगा।" उन्होंने यह भी बताया कि दो सप्ताह पहले की तुलना में अब जलडमरूमध्य से कहीं अधिक समुद्री यातायात गुजर रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर दबाव बढ़ा है और दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। हैसेट ने स्वीकार किया कि अमेरिका में भी पेट्रोल की कीमतें ऊँची बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से पेट्रोल की कीमतें अधिक हैं। हालाँकि वे उतनी नहीं हैं जितनी जो बाइडन के कार्यकाल में अपने चरम स्तर पर थीं, लेकिन फिर भी ऊँची हैं।"
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे इस क्षेत्र में कोई भी व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।
ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक कोशिशें
हैसेट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ युद्धविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने के लिए वार्ता कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और उसे अमेरिकी प्रशासन की शर्तों पर सहमत होने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
तेल कीमतों को लेकर विशेषज्ञों की राय
तेल कीमतों में संभावित उछाल को लेकर पूछे गए सवाल पर हैसेट ने कहा कि बाज़ार ने अब तक उन सबसे खराब आशंकाओं को सही साबित नहीं होने दिया है, जिनकी कुछ विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की थी। उनके अनुसार वैकल्पिक निर्यात मार्गों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव के कारण स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित रही है।
भारत पर संभावित प्रभाव
तेल आपूर्ति बहाल होने के बाद रिफाइनरियाँ उत्पादन बढ़ाएँगी, जिससे परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। यदि वार्ताएँ सफल रहती हैं, तो घरेलू ईंधन कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।