होर्मुज तनाव के बाद तेल कीमतों में तेज गिरावट संभव: अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए भरोसा जताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधाएं दूर होते ही वैश्विक तेल कीमतों में तेज़ गिरावट आ सकती है। उनके अनुसार, ऊर्जा बाज़ार में फ़िलहाल पर्याप्त आपूर्ति बनी हुई है और यह डर कि ऊर्जा संकट लंबे समय तक खिंचेगा, संभवतः ज़रूरत से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
बेसेंट के मुख्य बयान
बेसेंट ने कहा, 'खाड़ी से बाहर निकलने के लिए लगभग 2,000 जहाज़ इंतज़ार कर रहे हैं और मुझे लगता है कि इस स्थिति के बाद तेल बाज़ार बहुत अच्छी आपूर्ति में रहेगा, और कीमतें बहुत जल्दी नीचे आ सकती हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि मई 2026 में तेल की कीमतें पहले ही लगभग 10 प्रतिशत घट चुकी हैं, जो बाज़ार की लचीलापन क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों से अतिरिक्त आपूर्ति बाज़ार को स्थिर रखने में सहायक होगी। पेट्रोल की कीमतों पर पूछे गए सवाल के जवाब में बेसेंट ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि इसके बाद पेट्रोल की कीमतें भी नीचे आएंगी।'
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे प्रतिदिन वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। इस मार्ग पर किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर सीधे पड़ता है। बेसेंट ने इस जलडमरूमध्य में मुक्त नौवहन को ट्रंप प्रशासन की ईरान के साथ चल रही बातचीत की एक प्रमुख शर्त बताया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त आवाजाही होनी चाहिए। समुद्र में नौवहन स्वतंत्र और खुला होना चाहिए, जैसा पहले था।' यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकारें और ऊर्जा बाज़ार इस मार्ग की स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।
अमेरिकी ऊर्जा उत्पादन की भूमिका
बेसेंट ने अमेरिका की बढ़ती ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था की सुरक्षा का आधार बताया। उनके अनुसार, 'राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा वर्चस्व और नियंत्रण-मुक्ति एजेंडा की वजह से अमेरिका ऊर्जा कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति कहीं अधिक मज़बूत स्थिति में है।' उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा निर्यातक है और उसने अब तक के सर्वाधिक ऊर्जा निर्यात व उत्पादन के रिकॉर्ड बनाए हैं।
महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर असर
बेसेंट ने ऊर्जा स्थिरता को प्रशासन के व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि महंगाई की चिंताओं के बावजूद आर्थिक वृद्धि मज़बूत बनी हुई है। उनके अनुसार, यदि ऊर्जा बाज़ार स्थिर रहता है तो मुद्रास्फीति का दबाव कम होने की उम्मीद है।
यह बयान ऐसे वैश्विक परिदृश्य में आया है जब भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच ऊर्जा बाज़ार की दिशा पर दुनिया भर के निवेशकों और नीति-निर्माताओं की नज़रें टिकी हैं। जैसे ही होर्मुज का तनाव कम होगा, बाज़ार की प्रतिक्रिया वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य की अगली दिशा तय करेगी।