होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा, पर ट्रांजिट शुल्क लगेगा — मास्को में ईरानी राजदूत काजेम जालाली
सारांश
मुख्य बातें
रूस में ईरान के राजदूत काजेम जालाली ने 8 जून 2026 को स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अब नई शर्तें लागू होंगी — जिनमें ट्रांजिट शुल्क शामिल हो सकता है। रूसी समाचारपत्र इजवेस्टिया को दिए एक साक्षात्कार में जालाली ने कहा कि इन शर्तों को ईरान और ओमान के अधिकारी मिलकर तय करेंगे।
जालाली ने क्या कहा
जालाली के अनुसार, 'यह जलडमरूमध्य निश्चित रूप से खुला रहेगा, लेकिन इसकी नई शर्तें ईरान और ओमान के अधिकारी तय करेंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'हम समझते हैं कि ईरान और ओमान इस स्ट्रेट से जुड़ी कुछ सेवाएं प्रदान करते हैं, और उन सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाएगा।' हालांकि उन्होंने शुल्क की दर या संरचना के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
क्षेत्रीय परिस्थितियों में बदलाव का तर्क
राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान इस जलमार्ग को किसी दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने का इरादा नहीं रखता। उनके मुताबिक, पिछले कई दशकों तक यह मार्ग सभी जहाजों के लिए निर्बाध रूप से खुला रहा, किंतु हाल के तनाव के बाद क्षेत्रीय स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि 'नई परिस्थितियों' को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था अपरिहार्य हो गई है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से विश्व के लगभग 20% कच्चे तेल की आपूर्ति गुजरती है, जिससे इस जलमार्ग की भू-राजनीतिक और आर्थिक अहमियत अत्यंत उच्च है।
रूस की मध्यस्थता और अमेरिका का रुख
जालाली ने खुलासा किया कि ईरान, रूस को मध्य पूर्व संघर्ष के समाधान से जुड़ी वार्ताओं में शामिल करने का इच्छुक है। उन्होंने कहा, 'ईरान रूस को मध्य पूर्व संघर्ष के समाधान से जुड़े वार्ताओं में शामिल करना चाहता है, जबकि अमेरिका इस प्रक्रिया में अन्य पश्चिमी देशों को शामिल करने के पक्ष में नहीं है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और वैश्विक कूटनीतिक प्रयास अलग-अलग दिशाओं में बिखरे हुए हैं।
ईरान के नेतृत्व पर सवालों को खारिज किया
साक्षात्कार में जालाली ने ईरान के नेतृत्व की स्थिरता को लेकर चल रही अटकलों को भी सिरे से नकार दिया। उन्होंने दावा किया कि देश की निर्णय प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी है और शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय है।
आगे क्या होगा
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रांजिट शुल्क की दरें कब और किस तंत्र के तहत लागू होंगी। ओमान की सरकार की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वैश्विक तेल बाज़ार और शिपिंग उद्योग इस घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं, क्योंकि किसी भी नई शर्त का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।