होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग संकट: मंगलवार को केवल 5 पोत गुजरे, 10-दिन के औसत से एक-तिहाई
सारांश
मुख्य बातें
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही 26 अगस्त 2026 को भी अत्यंत निम्न स्तर पर बनी रही — शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को इस रणनीतिक जलमार्ग से केवल 5 कमोडिटी पोत गुजरे, जबकि पिछले 10 दिनों का दैनिक औसत 15 पोत रहा है। यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान और ओमान के बीच जलमार्ग को पुनः खोलने की बातचीत जारी है।
मंगलवार का यातायात विवरण
आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को स्ट्रेट से बाहर निकलने वाले पोतों में दो तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) टैंकर और एक बिटुमेन टैंकर शामिल थे, जबकि दो खाली प्रोडक्ट टैंकर अंदर दाखिल हुए। इससे एक दिन पहले सोमवार को केवल एक पोत के गुजरने की सूचना थी — जो हाल के हफ्तों का सबसे निचला स्तर था। गौरतलब है कि केप्लर ने स्वयं स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े प्रारंभिक हैं और बदल सकते हैं, क्योंकि कुछ जहाज यात्रा के दौरान अपना ट्रांसपोंडर बंद कर लेते हैं, जिससे वे ट्रैकिंग सिस्टम में दर्ज नहीं हो पाते।
ईरान-ओमान वार्ता और अस्थायी गलियारे की संभावना
ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य से नौवहन बहाल करने के लिए एक संयुक्त अस्थायी नौवहन गलियारा (Joint Temporary Navigational Corridor) बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। दोनों देश जलमार्ग से बारूदी सुरंगें (सी माइंस) हटाने पर भी सहमत हुए हैं। मंगलवार को इस वार्ता से जलडमरूमध्य के पुनः खुलने की उम्मीद बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी दावा और ज़मीनी हकीकत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही दावा कर चुके हैं कि होर्मुज स्ट्रेट से सभी बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं। हालांकि, समुद्री यातायात के ताज़ा आंकड़े इस दावे से मेल नहीं खाते — सामान्य आवाजाही अभी बहाल नहीं हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव में फिलहाल कमी आई है, परंतु दोनों के बीच कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हो पाया है, जिससे शिपिंग कंपनियाँ अभी भी इस मार्ग को जोखिम भरा मान रही हैं।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है — दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। आवाजाही में यह व्यवधान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही अनिश्चितता के दौर में हैं। यह ऐसे समय में है जब भारत सहित कई एशियाई देश खाड़ी से तेल आयात पर निर्भर हैं।
आगे की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान-ओमान वार्ता ठोस नतीजे नहीं देती और शिपिंग कंपनियों को सुरक्षा की विश्वसनीय गारंटी नहीं मिलती, तब तक होर्मुज से सामान्य यातायात बहाल होने की संभावना कम है। अस्थायी गलियारे के गठन और सी माइंस हटाने की प्रक्रिया पर अगले कुछ दिनों में अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।