मीराबाई चानू का संकल्प: एशियन गेम्स 2026 में पदक जीते बिना घर नहीं जाऊंगी
सारांश
मुख्य बातें
भारत की स्टार वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स 2026 को लेकर अपना दृढ़ संकल्प जाहिर किया है — जब तक पदक नहीं जीतती, मणिपुर स्थित अपने घर नहीं लौटेंगी। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक होने वाले इस महाकुंभ में मीराबाई पहली बार एशियन गेम्स पदक की तलाश में उतरेंगी। चोट से मुक्त रहना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मीराबाई का संकल्प और ट्रेनिंग की दिनचर्या
मीराबाई के कोच विजय शर्मा और अमेरिकी स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग विशेषज्ञ डॉ. एरॉन हॉर्शिग मिलकर उनकी तैयारी की निगरानी कर रहे हैं। डॉ. हॉर्शिग से मीराबाई का जुड़ाव नवंबर 2020 से अनवरत जारी है। मीराबाई ने बताया, "हम हर गुरुवार को उनके साथ वीडियो कॉल पर बात करते हैं और ट्रेनिंग, रिकवरी और अगले स्टेप्स के बारे में चर्चा करते हैं। हर चीज की बारीकी से समीक्षा करते हैं। डॉ. हॉर्शिग खुद एक वेटलिफ्टर थे, इसलिए उन्हें शरीर की हर मसल के बारे में पता है।"
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के तुरंत बाद भी मीराबाई ने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली। कॉमनवेल्थ आयोजकों द्वारा वेटलिफ्टिंग हॉल हटा दिए जाने के बावजूद मीराबाई, शर्मा और फिजियो रोहित छाबड़िया ने ग्लासगो में एक जिम खोजकर वहाँ ट्रेनिंग सेशन के लिए भुगतान किया।
एशियन गेम्स में अधूरा सपना और चोटों का इतिहास
मीराबाई के लिए एशियन गेम्स का मंच अब तक सबसे कठिन रहा है। जकार्ता 2018 में पीठ की गंभीर चोट ने उन्हें प्रतियोगिता से बाहर कर दिया था। हांगझोउ 2022 में 49 किग्रा वर्ग में वे चौथे स्थान पर रहीं — पदक से महज एक कदम दूर। इसी पीड़ा ने उन्हें नागोया के लिए खुद से वादा करने पर मजबूर किया है कि वे मणिपुर तभी लौटेंगी जब गले में एशियन गेम्स का पदक होगा।
मीराबाई ने स्पष्ट किया, "मैंने खुद को एक चुनौती दी है कि जब तक मैं एशियन गेम्स में पदक नहीं जीत लेती, घर नहीं जाऊंगी।" ग्लासगो में कॉमनवेल्थ की हैट्रिक को वे बड़ी उपलब्धि तो मानती हैं, लेकिन उस प्रतिस्पर्धा के स्तर को लेकर बेबाक हैं। उन्होंने कहा, "सच कहूं तो, कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रतियोगिता मेरे लिए मुश्किल नहीं थी। मुझे ग्लासगो में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। असली टेस्ट तो अभी बाकी है।"
प्रदर्शन के आंकड़े और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ
ग्लासगो में मीराबाई ने महिला 48 किग्रा वर्ग में कुल 190 किग्रा (स्नैच — 85 किग्रा, क्लीन एंड जर्क — 105 किग्रा) उठाकर स्वर्ण पदक जीता और स्नैच, क्लीन एंड जर्क तथा ओवरऑल टोटल — तीनों में नए कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाए। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 205 किग्रा (स्नैच 89 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 116 किग्रा) है, जो उन्होंने 2021 एशियन चैंपियनशिप में और हाल ही में फरवरी 2026 की नेशनल चैंपियनशिप में दर्ज किया।
प्रतिद्वंद्विता और ओलंपिक की दृष्टि
मीराबाई ने नागोया में चीन, उत्तर कोरिया, जापान और थाईलैंड के लिफ्टरों से कड़ी टक्कर की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा, "आप शायद इस बार एशियन गेम्स में 'ओलंपिक' देखेंगे क्योंकि हमारी वेट कैटेगरी में सबसे मजबूत लिफ्टर एशिया से हैं।" गौरतलब है कि पेरिस ओलंपिक 2024 में थाईलैंड की सुरोदचाना खंबाओ ने कुल 200 किग्रा उठाकर मीराबाई को महज एक किलो के अंतर से चौथे स्थान पर धकेल दिया था।
आगे की योजना के बारे में मीराबाई ने बताया कि लॉस एंजिल्स ओलंपिक में वेट कैटेगरी 53 किग्रा होगी, जिसके लिए उन्हें थोड़ा वजन बढ़ाना होगा। हालांकि उनका पूरा ध्यान अभी नागोया पर है। उन्होंने कहा, "सब कुछ नागोया में प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और फिर हम दिसंबर में ओलंपिक क्वालीफायर के साथ प्लान बना सकते हैं।"
भारतीय दल का नेतृत्व
मीराबाई एशियन गेम्स 2026 में पाँच सदस्यों वाले भारतीय वेटलिफ्टिंग दल का नेतृत्व करेंगी। नागोया में उनका प्रदर्शन न केवल व्यक्तिगत संकल्प की परीक्षा होगा, बल्कि लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 की तैयारी की दिशा भी तय करेगा।