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जन्माष्टमी 2026: 4 या 5 सितंबर — पंचांग के अनुसार जानें सही तिथि, निशिता मुहूर्त और पूजा विधि

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जन्माष्टमी 2026: 4 या 5 सितंबर — पंचांग के अनुसार जानें सही तिथि, निशिता मुहूर्त और पूजा विधि

सारांश

इस वर्ष जन्माष्टमी को लेकर दो तिथियों — 4 और 5 सितंबर — का असमंजस है। पंचांग के अनुसार अष्टमी 4 सितंबर की रात से शुरू होती है, निशिता मुहूर्त रात 11:57 बजे से है, और वैष्णव संप्रदाय 5 सितंबर को पर्व मनाएगा।

मुख्य बातें

अष्टमी तिथि का आरंभ 4 सितंबर 2026 को रात 2 बजकर 25 मिनट पर होगा और 5 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी।
उदया तिथि के आधार पर 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी; वैष्णव संप्रदाय 5 सितंबर को पर्व मनाएगा।
निशिता पूजा मुहूर्त — 4 सितंबर रात 11:57 बजे से 5 सितंबर रात 12:43 बजे तक।
व्रत का पारण 5 सितंबर को सूर्योदय ( सुबह 5:47 बजे ) के बाद किया जा सकता है।
पूजा में पंचामृत अभिषेक , माखन-मिश्री भोग और झूला झुलाने की परंपरा विशेष महत्व रखती है।

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रतिवर्ष देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी पावन तिथि की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के संयोग में भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर अवतार लिया था। इस वर्ष अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समय को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है — कि जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाए या 5 सितंबर 2026 को।

पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि का समय

पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को रात 2 बजकर 25 मिनट पर आरंभ होगी और 5 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के सिद्धांत के आधार पर — अर्थात जिस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान हो — जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। वहीं, वैष्णव संप्रदाय की परंपरा के अनुसार यह पर्व 5 सितंबर को मनाया जाएगा।

निशिता पूजा मुहूर्त — कब करें आधी रात की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर निशिता काल में पूजा का विशेष महत्व है। इस वर्ष निशिता पूजा मुहूर्त 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से आरंभ होकर 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि में भक्त बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाते हुए पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

पूजा विधि — कैसे करें लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव

जन्माष्टमी के दिन भक्त प्रातःकाल स्नान के पश्चात व्रत और पूजा का संकल्प लेते हैं। दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण, भजन और कीर्तन किया जाता है।

निशिता काल में सर्वप्रथम लड्डू गोपाल को दूध, दही, शहद, घी और जल से पंचामृत अभिषेक कराया जाता है। इसके बाद उन्हें स्वच्छ या नवीन वस्त्र पहनाकर श्रृंगार किया जाता है। माखन-मिश्री का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। तत्पश्चात भगवान की आरती की जाती है और उन्हें फूलों से सजे झूले में विराजमान करके झुलाया जाता है।

व्रत पारण का समय

जो श्रद्धालु जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे, वे 5 सितंबर को सूर्योदय के पश्चात पारण कर सकते हैं। उस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर होगा। हालाँकि व्रत खोलने का समय अपनी परंपरा और संप्रदाय की मान्यता के अनुसार निर्धारित करना ही उचित माना जाता है।

धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी है। पुराणों में उल्लेख है कि श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण का व्रत एवं पूजन करने से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पंचांग की जटिलता और संप्रदायों की विविधता का स्वाभाविक प्रतिबिंब है। गौरतलब है कि वैष्णव और स्मार्त परंपराओं के बीच यह मतभेद सदियों पुराना है, और दोनों पक्षों के पास अपने-अपने शास्त्रीय आधार हैं। मीडिया अक्सर इसे 'भ्रम' के रूप में प्रस्तुत करता है, जबकि वास्तव में यह भारतीय धार्मिक परंपरा की बहुलता का उदाहरण है। श्रद्धालुओं के लिए सबसे व्यावहारिक सलाह यही है कि वे अपने परिवार और संप्रदाय की परंपरा के अनुसार तिथि तय करें।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्माष्टमी 2026 कब है — 4 सितंबर या 5 सितंबर?
पंचांग के अनुसार उदया तिथि के आधार पर 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी, जबकि वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी 5 सितंबर को यह पर्व मनाएंगे। दोनों तिथियाँ अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार मान्य हैं।
जन्माष्टमी 2026 का निशिता पूजा मुहूर्त क्या है?
इस वर्ष निशिता पूजा मुहूर्त 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाना सर्वाधिक शुभ माना जाता है।
जन्माष्टमी 2026 का व्रत पारण कब करें?
जन्माष्टमी का व्रत 5 सितंबर 2026 को सूर्योदय के बाद खोला जा सकता है। उस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर होगा, हालाँकि पारण का समय अपनी संप्रदाय परंपरा के अनुसार तय करना उचित रहता है।
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा कैसे करें?
निशिता काल में सर्वप्रथम लड्डू गोपाल को दूध, दही, शहद, घी और जल से पंचामृत अभिषेक कराएं। इसके बाद नवीन वस्त्र पहनाकर श्रृंगार करें, माखन-मिश्री का भोग लगाएं, आरती करें और फूलों से सजे झूले में विराजमान करके झुलाएं।
वैष्णव संप्रदाय जन्माष्टमी 5 सितंबर को क्यों मनाएगा?
वैष्णव संप्रदाय की परंपरा में जन्माष्टमी उस दिन मनाई जाती है जिस दिन अष्टमी तिथि मध्यरात्रि को विद्यमान हो। चूँकि इस वर्ष अष्टमी तिथि 4 सितंबर की मध्यरात्रि के बाद भी जारी रहती है और 5 सितंबर को दोपहर तक रहती है, इसलिए वैष्णव संप्रदाय 5 सितंबर को यह पर्व मनाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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