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25 जून 2026 पंचांग: निर्जला एकादशी पर विष्णु पूजा का विशेष महत्व, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:02 से 12:56 बजे तक

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25 जून 2026 पंचांग: निर्जला एकादशी पर विष्णु पूजा का विशेष महत्व, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:02 से 12:56 बजे तक

सारांश

25 जून 2026 को निर्जला एकादशी पर शिव और सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। विष्णु पूजा के लिए यह तिथि वर्ष की सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:02 से 12:56 बजे तक — नए कार्य और पूजा के लिए दिन का सबसे शक्तिशाली समय।

मुख्य बातें

25 जून 2026 (गुरुवार) को निर्जला एकादशी तिथि रात 8:09 बजे तक प्रभावी रहेगी।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:02 से 12:56 बजे तक — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय।
शिव योग और सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग; कोई वज्र योग नहीं।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:11–4:59 बजे; अमृत काल सुबह 6:46–8:32 बजे।
राहुकाल दोपहर 2:10–3:50 बजे; इस अवधि में नए कार्य वर्जित।
दक्षिण दिशा में दिशाशूल — इस दिन दक्षिण यात्रा से बचने की सलाह।

25 जून 2026 (गुरुवार) को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी यानी निर्जला एकादशी का पर्व है, जो रात 8:09 बजे तक प्रभावी रहेगा। पंचांग के अनुसार यह तिथि वर्ष की सर्वाधिक महत्वपूर्ण एकादशियों में मानी जाती है, और इस दिन भगवान विष्णु की उपासना विशेष रूप से फलदायी होती है। दोपहर 12:02 से 12:56 बजे तक का अभिजित मुहूर्त इस दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय है।

तिथि, नक्षत्र और राशि स्थिति

वैदिक पंचांग के अनुसार 25 जून 2026 को सूर्य मिथुन राशि के आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं। चंद्रमा इस दिन तुला राशि में गोचर करते हुए स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेगा। यह ग्रह-नक्षत्र संयोग धार्मिक कार्यों और मानसिक शांति के लिए अनुकूल माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

इस दिन सूर्योदय सुबह 5:24 बजे और सूर्यास्त शाम 7:21 बजे होगा। चन्द्रोदय दोपहर 3:28 बजे और चन्द्रास्त रात 2:31 बजे होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक और अमृत काल सुबह 6:46 से 8:32 बजे तक रहेगा — ये दोनों समय प्रातःकालीन पूजा-ध्यान के लिए विशेष शुभ माने जाते हैं।

शुभ योग: शिव और सिद्ध का संयोग

वैदिक पंचांग के अनुसार 25 जून 2026 को शिव योग और सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन कोई वज्र योग नहीं है। शिव-सिद्ध योग का यह युगल संयोग नए कार्यों की शुरुआत, महत्वपूर्ण निर्णय और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।

अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक और यमघण्टकाल

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन राहुकाल दोपहर 2:10 से 3:50 बजे तक, गुलिक काल सुबह 9:08 से दोपहर 10:48 बजे तक और यमघण्टकाल सुबह 5:46 से 7:27 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है।

दिशाशूल और यात्रा सावधानी

25 जून 2026 को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपराओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा से बचना उचित माना जाता है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषीय उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है। निर्जला एकादशी के इस पावन दिन विष्णु उपासना और अभिजित मुहूर्त का सदुपयोग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेषकर एकादशी और अन्य व्रत-तिथियों पर। निर्जला एकादशी का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह एकमात्र एकादशी है जिसमें जल ग्रहण भी वर्जित माना जाता है, जिससे इसकी कठोरता और आस्था दोनों असाधारण हैं। शिव-सिद्ध योग का एक साथ आना इस तिथि को और भी विशिष्ट बनाता है। पाठकों के लिए राहुकाल और दिशाशूल जैसी व्यावहारिक जानकारी उतनी ही उपयोगी है जितनी धार्मिक महत्ता — यही इस प्रकार की सामग्री की असली उपयोगिता है।
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10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्जला एकादशी 2026 कब है और इसका क्या महत्व है?
निर्जला एकादशी 25 जून 2026 (गुरुवार) को है और यह तिथि रात 8:09 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसे वर्ष की सबसे शक्तिशाली एकादशी माना जाता है, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से फलदायी होती है।
25 जून 2026 को अभिजित मुहूर्त कब है?
25 जून 2026 को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:02 से 12:56 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है, जिसमें नए कार्य, पूजा और महत्वपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत फलदायी होता है।
25 जून 2026 को राहुकाल कब से कब तक है?
25 जून 2026 (गुरुवार) को राहुकाल दोपहर 2:10 से 3:50 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कोई भी नया कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए।
25 जून 2026 को कौन-से योग प्रभावी हैं?
इस दिन शिव योग और सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। कोई वज्र योग नहीं है, जिससे यह दिन धार्मिक और शुभ कार्यों के लिए विशेष अनुकूल माना जाता है।
25 जून 2026 को दिशाशूल किस दिशा में है?
25 जून 2026 को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष परंपरा के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा से बचना चाहिए; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो ज्योतिषीय उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।
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