11 जून 2026 पंचांग: परमा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त
सारांश
मुख्य बातें
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी इस वर्ष 11 जून 2026 को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है और इस दिन व्रत, पूजा-अर्चना तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परमा एकादशी का व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
तिथि और नक्षत्र की स्थिति
पंचांग के अनुसार, परमा एकादशी की तिथि 11 जून की रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी। इसके पश्चात द्वादशी तिथि का आरंभ होगा। नक्षत्र की दृष्टि से यह दिन विशेष है — सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक रेवती नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र प्रारंभ होगा। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, अश्विनी नक्षत्र को शुभ माना जाता है और इस काल में नए कार्यों की शुरुआत अच्छे परिणाम देने वाली मानी जाती है।
सर्वार्थसिद्धि योग और अन्य शुभ संयोग
इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण संयोग सर्वार्थसिद्धि योग है, जो पूरे दिन प्रभावी रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ कार्य, पूजा-पाठ, दान और नए कार्यों की शुरुआत विशेष फल प्रदान करती है। इसी कारण परमा एकादशी और सर्वार्थसिद्धि योग का यह संयोग अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त शोभन योग भी रात 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद अतिगण्ड योग शुरू होगा। दिन के विभिन्न समयों में बव, बालव और कौलव करण भी रहेंगे।
शुभ मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय सुबह 5 बजकर 44 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 8 मिनट पर। चंद्रोदय रात 2 बजे और चंद्रास्त दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर रहेगा। पूजा-पाठ और ध्यान के लिए सर्वोत्तम ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 8 मिनट से 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक और रात में 11 बजकर 48 मिनट से अगले दिन 1 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय — इनसे बचें
कुछ विशेष समयों में नए और महत्वपूर्ण कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। राहुकाल दोपहर 2 बजकर 6 मिनट से 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड सुबह 5 बजकर 44 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट और कुलिक काल सुबह 9 बजकर 5 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। दिन में दो बार दुर्मुहूर्त भी रहेगा, इसलिए इन अवधियों में नए कार्यों की शुरुआत से परहेज़ उचित माना जाता है।
ग्रहों की स्थिति
ग्रह-स्थिति की दृष्टि से चंद्रमा सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक मीन राशि में रहेगा, जिसके बाद वह मेष राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य इस समय वृषभ राशि में स्थित है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा का राशि परिवर्तन मन और भावनाओं पर प्रभाव डालता है। परमा एकादशी, सर्वार्थसिद्धि योग और अश्विनी नक्षत्र का यह त्रिवेणी संगम इस दिन को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बनाता है।