26 अगस्त 2026
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बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को लिखा पत्र, JSSC विवाद में प्रशांत कुमार को समिति से हटाने की माँग

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बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को लिखा पत्र, JSSC विवाद में प्रशांत कुमार को समिति से हटाने की माँग

सारांश

झारखंड में JSSC परीक्षा विवाद नई करवट ले रहा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर उस अधिकारी को परीक्षा सुधार समिति से हटाने की माँग की है, जिनके कार्यकाल में सितंबर 2024 की विवादित JSSC CGL परीक्षा रद्द हुई थी। साथ ही JPSC-JSSC मामलों में CBI जाँच की भी माँग उठाई गई है।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 26 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से तत्काल हटाने की माँग की।
JSSC CGL परीक्षा सितंबर 2024 में प्रशांत कुमार के कार्यकाल में हुई थी, जिसे बाद में रद्द करना पड़ा और JSSC कार्यालय में छापेमारी हुई।
मरांडी ने वित्त सचिव के रूप में राज्य खातों में हजारों करोड़ रुपये के अंतर और झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा जुर्माने का भी उल्लेख किया।
विपक्ष ने JPSC और JSSC की कथित अनियमितताओं की जाँच CBI से कराने की माँग की।
समिति में न्यायिक, तकनीकी, शैक्षणिक विशेषज्ञों और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 26 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के प्रभारी अध्यक्ष एवं राज्य के वित्त सचिव प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से तत्काल हटाने और उनकी भूमिका की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की है। मरांडी का तर्क है कि जिस अधिकारी के कार्यकाल में JSSC CGL परीक्षा को लेकर गंभीर विवाद सामने आए, उन्हें ही सुधार की ज़िम्मेदारी सौंपना हितों के टकराव का स्पष्ट मामला है।

मुख्य घटनाक्रम

मरांडी के पत्र के अनुसार, झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं के बाद सरकार ने परीक्षा सुधार समिति का गठन किया। फरवरी 2024 से JSSC के अध्यक्ष पद पर रहे प्रशांत कुमार को इस समिति में शामिल किए जाने पर नेता प्रतिपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सितंबर 2024 की विवादित JSSC CGL परीक्षा प्रशांत कुमार के ही कार्यकाल में आयोजित हुई थी।

उस परीक्षा को बाद में रद्द करना पड़ा था। इसके बाद JSSC कार्यालय में छापेमारी हुई और आयोग के सचिव से पूछताछ की गई, जिससे पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

प्रशांत कुमार के आचरण पर सवाल

मरांडी ने पत्र में प्रशांत कुमार के प्रशासनिक आचरण को लेकर भी आरोप लगाए। उनके अनुसार, वित्त सचिव के रूप में राज्य के खातों में हजारों करोड़ रुपये के अंतर को लेकर विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने जल संसाधन विभाग से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें उनके दावे के अनुसार झारखंड उच्च न्यायालय ने अदालत को गुमराह करने और आदेश का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया था।

सरकार की मंशा पर सवाल

मरांडी ने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति में शामिल करना सरकार की नीयत पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा से संबंधित एजेंसी चयन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा संचालन, परिणाम प्रक्रिया और सभी प्रशासनिक अनुमोदनों में प्रशांत कुमार की भूमिका की जाँच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था सुधार के लिए गठित किसी भी समिति में ऐसे अधिकारियों को स्थान नहीं दिया जाना चाहिए, जिनकी भूमिका स्वयं जाँच के दायरे में हो।

विपक्ष की माँगें

नेता प्रतिपक्ष ने परीक्षा सुधार समिति में निष्पक्ष न्यायिक, तकनीकी और शैक्षणिक विशेषज्ञों के साथ-साथ छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से कराने की माँग भी की, यह कहते हुए कि इससे ही छात्रों का विश्वास बहाल हो सकेगा।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय में उठा है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पहले से ही विवादों के केंद्र में है और छात्र संगठन सड़कों पर उतरकर जाँच की माँग कर चुके हैं। विपक्ष के इस दबाव के बाद सरकार का अगला कदम निर्णायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक वैध प्रशासनिक सवाल उठाता है — जिस अधिकारी की भूमिका की जाँच होनी चाहिए, उसे ही जाँच की रूपरेखा बनाने का अधिकार देना स्वाभाविक रूप से संदिग्ध है। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पहले से ही दाँव पर है, और सरकार का यह कदम उस आग में घी डालने जैसा दिखता है। असली परीक्षण यह है कि हेमंत सोरेन सरकार इस पत्र को राजनीतिक आरोप मानकर नज़रअंदाज़ करती है, या पारदर्शिता के लिए समिति की संरचना में बदलाव करती है — क्योंकि छात्रों का भरोसा बहाल करना किसी भी सरकार की दीर्घकालिक प्राथमिकता होनी चाहिए।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को पत्र क्यों लिखा?
मरांडी ने JSSC के प्रभारी अध्यक्ष एवं वित्त सचिव प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से हटाने और उनकी भूमिका की स्वतंत्र जाँच की माँग के साथ यह पत्र लिखा। उनका तर्क है कि प्रशांत कुमार के कार्यकाल में ही JSSC CGL परीक्षा विवादित हुई और रद्द हुई, इसलिए उन्हें सुधार समिति में रखना हितों का टकराव है।
JSSC CGL परीक्षा विवाद क्या है?
सितंबर 2024 में आयोजित JSSC CGL परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। JSSC कार्यालय में छापेमारी हुई और आयोग के सचिव से पूछताछ की गई, जिससे झारखंड की पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आ गई।
परीक्षा सुधार समिति में कौन होना चाहिए, मरांडी के अनुसार?
मरांडी ने सुझाव दिया कि समिति में निष्पक्ष न्यायिक, तकनीकी और शैक्षणिक विशेषज्ञों के साथ-साथ छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जिन अधिकारियों की भूमिका जाँच के दायरे में हो, उन्हें समिति से बाहर रखा जाए।
विपक्ष ने CBI जाँच की माँग क्यों की?
मरांडी ने JPSC और JSSC दोनों की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जाँच CBI से कराने की माँग की, यह कहते हुए कि राज्य सरकार की एजेंसियों पर छात्रों का भरोसा टूट चुका है। उनका मानना है कि केंद्रीय एजेंसी की जाँच से ही निष्पक्ष परिणाम आ सकते हैं।
प्रशांत कुमार पर और क्या आरोप लगाए गए हैं?
मरांडी ने दावा किया कि वित्त सचिव के रूप में राज्य के खातों में हजारों करोड़ रुपये के अंतर पर विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसके अलावा, जल संसाधन विभाग से जुड़े एक मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने कथित तौर पर अदालत को गुमराह करने और आदेश न मानने पर जुर्माना लगाया था।
राष्ट्र प्रेस
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