20 अगस्त 2026
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झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC नियुक्ति रद्द करने पर रोक लगाई, मरांडी बोले — सोरेन सरकार ने रचा था राजनीतिक ढोंग

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झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC नियुक्ति रद्द करने पर रोक लगाई, मरांडी बोले — सोरेन सरकार ने रचा था राजनीतिक ढोंग

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC नियुक्तियाँ रद्द करने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी — और नेता प्रतिपक्ष मरांडी ने इसे सोरेन सरकार की 'राजनीतिक साजिश' का पर्दाफाश बताया। उनका दावा है कि परीक्षाएँ रद्द करना छात्र आंदोलन को दबाने की चाल थी, कानूनी जरूरत नहीं।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा व फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्तियाँ रद्द करने के सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगाई।
अदालत ने राज्य सरकार और JPSC से जवाब तलब किया; सफल अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी ने कथित राजनीतिक साजिश के तहत परीक्षाएँ रद्द करने का फैसला लिया।
मरांडी ने सरकार पर कैविएट न दाखिल करने का आरोप लगाया, जिससे एकतरफा अंतरिम आदेश की स्थिति बनी।
BJP की माँग — पूरे मामले की CBI जाँच हो और पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित अभ्यर्थियों को नुकसान न हो।

झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर पदों पर नियुक्तियाँ रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी। इस फैसले के तुरंत बाद झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि परीक्षाएँ रद्द करने का फैसला कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक चाल थी।

हाईकोर्ट का आदेश और पृष्ठभूमि

सफल और नियुक्त अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के रद्दीकरण आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने उनकी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार के फैसले पर तत्काल रोक लगाई और राज्य सरकार तथा JPSC दोनों से जवाब तलब किया है। यह मामला उन अभ्यर्थियों की नियुक्तियों से जुड़ा है जो निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयनित हुए थे और जिनकी नौकरियाँ सरकार के एकतरफा आदेश से खतरे में आ गई थीं।

मरांडी के आरोप — राजनीतिक साजिश का दावा

मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि उन्होंने दो दिन पहले ही आगाह किया था कि सरकार का यह फैसला न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं पाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कथित राजनीतिक साजिश के तहत छात्र आंदोलन को समाप्त कराने के उद्देश्य से परीक्षाएँ और नियुक्तियाँ रद्द करने का निर्णय लिया।

मरांडी के अनुसार, सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों को कानूनी विशेषज्ञों के साथ बातचीत के लिए बुलाया, उन्हें भरोसा दिलाया और फिर बंद कमरे में परीक्षाएँ रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। उन्होंने कहा, "छात्रों के प्रति सरकार की नीयत शुरू से ही ठीक नहीं रही।"

कैविएट न दाखिल करने पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी बताया कि उन्होंने सरकार से कैविएट दाखिल करने का आग्रह किया था, ताकि मामला अदालत में जाने पर सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके और एकतरफा अंतरिम आदेश की स्थिति न बने। उनके अनुसार, सरकार ने इस सुझाव को भी अनसुना कर दिया — जिसका परिणाम अब हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के रूप में सामने आया है।

CBI जाँच की माँग और पारदर्शी अभ्यर्थियों की सुरक्षा

मरांडी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) शुरू से ही पूरे मामले की केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जाँच की माँग कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र जाँच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि किन लोगों की नियुक्ति अनियमित तरीके से हुई और उसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जो अभ्यर्थी पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयनित हुए हैं, उन्हें किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब सरकार और JPSC को अपना जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई तक नियुक्तियाँ रद्द करने का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। यह विवाद झारखंड में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकार की कानूनी तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह प्रशासनिक लापरवाही की नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई चूक की तस्वीर बनाता है। दूसरी ओर, विपक्ष की CBI जाँच की माँग भी तब तक अधूरी रहेगी जब तक वह स्पष्ट नहीं करता कि 'अनियमित नियुक्तियों' का दायरा क्या है और कितने अभ्यर्थी वास्तव में प्रभावित हैं। असली नुकसान उन पारदर्शी अभ्यर्थियों का है जो राजनीतिक लड़ाई में पिस रहे हैं।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC नियुक्तियों पर रोक क्यों लगाई?
झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्तियाँ रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश को सफल अभ्यर्थियों ने चुनौती दी थी। अदालत ने उनकी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक सरकारी फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी और सरकार व JPSC से जवाब माँगा।
बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार पर क्या आरोप लगाए?
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कथित राजनीतिक साजिश के तहत छात्र आंदोलन खत्म कराने के लिए परीक्षाएँ और नियुक्तियाँ रद्द करने का फैसला लिया। उनका यह भी कहना है कि सरकार ने उनके कैविएट दाखिल करने के सुझाव को नजरअंदाज किया।
JPSC नियुक्ति विवाद में CBI जाँच की माँग क्यों हो रही है?
BJP और मरांडी का कहना है कि यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किन अभ्यर्थियों की नियुक्ति अनियमित प्रक्रिया से हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। वे चाहते हैं कि स्वतंत्र जाँच हो ताकि पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित अभ्यर्थियों को अनावश्यक नुकसान न हो।
कैविएट न दाखिल करने से क्या नुकसान हुआ?
मरांडी के अनुसार, यदि सरकार ने समय रहते हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल किया होता, तो मामले में सुनवाई के दौरान सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता और एकतरफा अंतरिम रोक से बचा जा सकता था। उनका दावा है कि सरकार की यह चूक जानबूझकर की गई।
इस विवाद से प्रभावित अभ्यर्थियों का क्या होगा?
हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद फिलहाल नियुक्तियाँ रद्द करने का सरकारी आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। अदालत की अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत रहेगी। मरांडी ने स्पष्ट किया कि पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित अभ्यर्थियों को किसी भी हाल में नुकसान नहीं होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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