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जेपीएससी विवाद: झारखंड हाईकोर्ट के स्टे पर मंत्री दिलीप जायसवाल बोले — हेराफेरी की विस्तृत जाँच ज़रूरी

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जेपीएससी विवाद: झारखंड हाईकोर्ट के स्टे पर मंत्री दिलीप जायसवाल बोले — हेराफेरी की विस्तृत जाँच ज़रूरी

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी परीक्षाएँ रद्द करने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी है — और इसके साथ ही सियासी घमासान भी शुरू हो गया है। एक तरफ़ नियुक्त अभ्यर्थी राहत में हैं, दूसरी तरफ़ आंदोलनकारी छात्र असमंजस में। मंत्री जायसवाल का कहना है कि हेराफेरी की जाँच ज़रूरी है, जबकि कांग्रेस सोरेन सरकार का बचाव कर रही है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर गुरुवार को अंतरिम स्टे लगाया।
नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों ने सरकार के रद्दीकरण आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि परीक्षाओं में हेराफेरी की विस्तृत जाँच ज़रूरी है और कोर्ट का स्टे उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने हेमंत सोरेन सरकार को 'पूरी तरह बेनकाब' बताया।
कांग्रेस नेता उदित राज ने सोरेन सरकार का बचाव करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के स्टे में सरकार का कोई दोष नहीं।

झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के आदेश पर गुरुवार को अंतरिम रोक लगा दी, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज़ हो गया है। नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह स्टे दिया, जबकि राज्य सरकार ने पेपर लीक के आरोपों और छात्र आंदोलन के दबाव में यह परीक्षाएँ रद्द की थीं।

मंत्री जायसवाल का बयान

पटना में बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने हाईकोर्ट के फ़ैसले पर कहा, 'छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने यह महसूस किया कि जितनी भी परीक्षाएँ हुई हैं, उनमें हेराफेरी हुई है और उस हेराफेरी की बहुत ही विस्तृत जाँच कराने की आवश्यकता है। न्यायालय पहले इस विषय को विस्तार से जानना चाहती है कि परीक्षा रद्द होने का समुचित कारण क्या है — इसीलिए स्टे लगाया जाता है।' उनके अनुसार, अदालत का यह कदम जाँच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में है।

जदयू नेताओं की प्रतिक्रिया

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने परीक्षाएँ रद्द कीं, लेकिन जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी थी, वे अब कोर्ट पहुँचे हैं — ऐसे में उनकी बात सुना जाना स्वाभाविक है और सुनवाई जारी रहेगी।

जदयू एमएलसी और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने हेमंत सोरेन सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने युवाओं की पीड़ा को नहीं समझा। छात्र आंदोलन के दबाव में परीक्षाएँ रद्द कर दी गईं, और अब कोर्ट के स्टे के बाद सोरेन सरकार 'पूरी तरह बेनकाब' हो गई है।

कांग्रेस का बचाव

दिल्ली में कांग्रेस नेता उदित राज ने हेमंत सोरेन सरकार का पक्ष लिया। उन्होंने कहा, 'झारखंड छात्र आंदोलन के दौरान हेमंत सोरेन सरकार ने बहुत संवेदनशीलता से काम लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उन्हें छात्रों की माँगों को लेकर पत्र लिखा था। सरकार ने उसे गंभीरता से लिया और जेएसएससी-सीजीएल समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फ़ैसला किया। हाईकोर्ट के स्टे में हेमंत सोरेन सरकार का कोई दोष नहीं है।'

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि झारखंड में पेपर लीक के आरोपों और व्यापक छात्र आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने 11वीं, 12वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को उन अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी जिनकी नियुक्ति पहले ही हो चुकी थी। कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के आदेश पर अंतरिम स्टे दे दिया।

आगे क्या होगा

झारखंड हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी और कोर्ट सरकार से परीक्षा रद्द करने के औचित्य पर विस्तृत जवाब माँग सकती है। यह मामला राज्य में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए अगली सुनवाई की तारीख़ पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक गहरी विडंबना को उजागर करता है — सरकार ने छात्र आंदोलन के दबाव में परीक्षाएँ रद्द कीं, पर रद्दीकरण से पहले नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकारों की कोई स्पष्ट कानूनी रूपरेखा नहीं बनाई। यह मामला सिर्फ़ जेपीएससी तक सीमित नहीं है — यह उस बड़े सवाल की ओर इशारा करता है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना हर रद्दीकरण एक नई कानूनी लड़ाई को जन्म देगा। विपक्ष का 'बेनकाब' वाला बयान राजनीतिक है, लेकिन असली सवाल यह है कि पेपर लीक के आरोपों की स्वतंत्र जाँच कब और कैसे होगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी परीक्षा रद्द करने के आदेश पर स्टे क्यों लगाया?
नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों ने झारखंड सरकार के रद्दीकरण आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम स्टे दिया और सरकार से परीक्षा रद्द करने के औचित्य पर विस्तृत जवाब माँगा है।
11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाएँ किस कारण रद्द की गई थीं?
झारखंड सरकार ने पेपर लीक के आरोपों और व्यापक छात्र आंदोलन के बाद 11वीं, 12वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी किया था। सरकार का कहना था कि परीक्षाओं में हेराफेरी हुई है।
मंत्री दिलीप जायसवाल ने हाईकोर्ट के स्टे पर क्या कहा?
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि परीक्षाओं में हेराफेरी की विस्तृत जाँच ज़रूरी है और कोर्ट ने स्टे इसीलिए लगाया है ताकि वह पहले रद्दीकरण का समुचित कारण विस्तार से जान सके।
इस मामले में कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस नेता उदित राज ने हेमंत सोरेन सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्र आंदोलन के दौरान संवेदनशीलता दिखाई और राहुल गांधी के पत्र के बाद परीक्षाएँ रद्द कीं — हाईकोर्ट के स्टे में सरकार का कोई दोष नहीं है।
जेपीएससी विवाद में आगे क्या होगा?
झारखंड हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी। कोर्ट सरकार से परीक्षा रद्द करने के कारणों पर विस्तृत जवाब माँग सकती है। अगली सुनवाई की तारीख़ पर नियुक्त अभ्यर्थियों और आंदोलनकारी छात्रों दोनों की निगाहें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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