झारखंड हाईकोर्ट ने नियुक्तियाँ रद्द करने के आदेश पर रोक बरकरार, 48 घंटे में माँगा सरकार से जवाब
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समेत सीडीपीओ, एफएसओ और जेएसएससी सीजीएल के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर लगाई गई न्यायिक रोक को बरकरार रखा। जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी।
मुख्य घटनाक्रम
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि सीआईडी द्वारा की जा रही जाँच की अब तक की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाएगी। सरकार की तरफ से शपथपत्र दाखिल करने के लिए एक सप्ताह के अतिरिक्त समय की माँग की गई, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया और मात्र 48 घंटे का समय निर्धारित किया।
अदालत ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि यह मामला बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मियों के भविष्य से सीधे जुड़ा है, इसलिए इसमें अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी। जस्टिस दीपक रोशन ने सीआईडी जाँच की गति पर भी टिप्पणी करते हुए सरकार से समयबद्ध तरीके से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद राज्य सरकार द्वारा उन परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले के बाद उभरा, जिनमें परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी टीडीपीएल की भूमिका रही थी। सरकार ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं परीक्षा, जेपीएससी-सीजीएल, सीडीपीओ, एफएसओ और जेएसएससी-सीजीएल सहित अन्य परीक्षाओं से जुड़ी नियुक्तियाँ रद्द करने का निर्णय लिया था। गौरतलब है कि इन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्यभर में व्यापक विरोध और कानूनी चुनौतियाँ सामने आई थीं।
प्रभावित अभ्यर्थियों की आपत्तियाँ
सरकार के आदेश से प्रभावित नियुक्त अभ्यर्थियों और कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उनका तर्क है कि नियुक्तियों को सामूहिक रूप से रद्द करने से उनके संवैधानिक अधिकारों और भविष्य पर गहरा असर पड़ रहा है। पूर्व की सुनवाइयों में हाईकोर्ट ने प्रार्थियों को अंतरिम राहत देते हुए सरकार के आदेश पर पहले ही रोक लगाई थी, जो अब भी जारी है।
अदालत में किसने रखा पक्ष
जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। प्रार्थियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और चंचल जैन सहित अन्य विधिज्ञों ने बहस की। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता के साथ सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने भी पक्ष रखा।
आगे क्या होगा
अदालत के निर्देश के अनुसार, राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा। मामले की अगली महत्त्वपूर्ण सुनवाई 18 सितंबर 2026 को निर्धारित है, जिसमें सीआईडी की सीलबंद रिपोर्ट और सरकार के जवाब की जाँच होगी। यह मामला झारखंड में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और हज़ारों युवाओं के रोज़गार की दिशा तय करेगा।