15 सितंबर 2026
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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन: भारत शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए वैश्विक मंच पर मजबूत आवाज

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन: भारत शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए वैश्विक मंच पर मजबूत आवाज

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ICWA की रजत जयंती पर भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा का खाका खींचा — वैक्सीन मैत्री से UPI तक, और ब्रिक्स डिक्लेरेशन से विकसित भारत-2047 तक। यह महज एक समारोही भाषण नहीं था, बल्कि भारत की बहुआयामी कूटनीति की दिशा का स्पष्ट संकेत था।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के सप्रू हाउस में ICWA की 25वीं वर्षगांठ को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि भारत शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए वैश्विक मंच पर एक सशक्त आवाज बनकर उभरा है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ' नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन ' की सर्वसम्मति से स्वीकृति को बड़ी उपलब्धि बताया; डॉ.
जयशंकर और विक्रम मिसरी को बधाई दी।
वैक्सीन मैत्री, इंटरनेशनल सोलर अलायंस , ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस और UPI को 'वसुधैव कुटुंबकम' के व्यावहारिक उदाहरण बताया।
जांजीबार में भारत के बाहर पहले आईटीआई कैंपस का उल्लेख; ICWA को विकसित भारत-2047 के लिए तैयार करने का आह्वान।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के सप्रू हाउस में कहा कि भारत आज शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए वैश्विक मंच पर एक सशक्त और भरोसेमंद आवाज के रूप में उभर रहा है। वे इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) की 'राष्ट्रीय महत्व के संस्थान' के रूप में 25वीं वर्षगांठ के समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिसके वे अध्यक्ष भी हैं।

कूटनीति और वैश्विक सहयोग पर जोर

उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि कूटनीति का प्रथम उद्देश्य देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि मानवीय प्रगति और विश्व शांति एक-दूसरे से अविभाज्य हैं — यह तभी साकार होगा जब राष्ट्र एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और परस्पर लाभ के लिए सहयोग करें।

उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए विदेश मंत्री एवं ICWA के उपाध्यक्ष डॉ. एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विदेश मंत्रालय की पूरी टीम को बधाई दी। राधाकृष्णन ने कहा कि टकराव और अंतर्विरोधों से जूझ रही दुनिया में 'नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन' को सर्वसम्मति से अपनाया जाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

भारत की वैश्विक पहलें और 'वसुधैव कुटुंबकम'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने 'वसुधैव कुटुंबकम' की अवधारणा को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करने के कई उदाहरण गिनाए। इनमें कोविड संकट के दौरान 'वैक्सीन मैत्री', भारत की आपदा-प्रबंधन पहलें, 'LiFE' मिशन, इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस शामिल हैं।

गौरतलब है कि ये पहलें भारत की उस वैश्विक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें विकासशील देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल साउथ से जुड़ाव

उपराष्ट्रपति ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की सफलताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि 'पारदर्शी पेमेंट सिस्टम से पारदर्शी गवर्नेंस आती है।' उन्होंने बताया कि भारत ITEC कार्यक्रम और शैक्षिक सहयोग के माध्यम से ग्लोबल साउथ के साथ अपनी तकनीकी एवं संस्थागत क्षमताएं साझा कर रहा है। इसी कड़ी में जांजीबार में भारत के बाहर पहला आईटीआई कैंपस स्थापित किया गया है।

ICWA की भविष्य की भूमिका

राधाकृष्णन ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य ने ICWA की जिम्मेदारी को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्होंने संस्था से आग्रह किया कि वह 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट', 'ग्लोबल साउथ' और 'इंडो-पैसिफिक' प्राथमिकताओं पर शोध को सुदृढ़ करे; साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण तकनीक और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर कार्यक्षेत्र का विस्तार करे; और विश्वविद्यालयों तथा युवा शोधकर्ताओं के साथ जुड़ाव को गहरा करे।

उन्होंने ICWA को 'विकसित भारत-2047' के लक्ष्य के लिए बौद्धिक एवं संस्थागत रूप से तैयार करने का आह्वान किया और विश्वास व्यक्त किया कि काउंसिल अपनी गोल्डन जुबली तक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के सम्मानित केंद्रों में स्थान पा लेगी।

समारोह में उपराष्ट्रपति ने ICWA के सफर को दर्शाने वाली एक फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और काउंसिल में उल्लेखनीय योगदान के लिए पूर्व महानिदेशकों को स्मृति-चिह्न भेंट किए। आने वाले वर्षों में ICWA की भूमिका भारत की विदेश नीति की रूपरेखा को बौद्धिक आधार देने में निर्णायक साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

ग्लोबल साउथ में प्रतिस्पर्धी चीनी प्रभाव, और इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी अपेक्षाएं एक साथ सामने हैं। 'नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन' की सर्वसम्मति निश्चित रूप से कूटनीतिक कौशल का प्रमाण है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये घोषणाएं ठोस सहयोग में बदलती हैं या केवल वक्तव्यों की सूची बनकर रह जाती हैं। ICWA जैसे संस्थानों पर भारत-केंद्रित विश्लेषण की मांग बढ़ रही है, परंतु उन्हें स्वतंत्र बौद्धिक स्थान देना और नीतिगत समर्थन का उपकरण न बनाना — यही उनकी वैश्विक साख की शर्त है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ICWA की 25वीं वर्षगांठ पर क्या कहा?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि भारत शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए वैश्विक मंच पर एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है। उन्होंने कूटनीति, वैश्विक सहयोग और ICWA की भविष्य की भूमिका पर व्यापक रूप से अपने विचार रखे।
नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन क्या है और इसे क्यों महत्वपूर्ण बताया गया?
नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से अपनाया गया एक साझा दस्तावेज है। उपराष्ट्रपति ने इसे वैश्विक टकराव और अंतर्विरोधों के माहौल में एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि करार दिया।
भारत ग्लोबल साउथ के साथ किस प्रकार सहयोग कर रहा है?
भारत ITEC कार्यक्रम और शैक्षिक साझेदारी के माध्यम से ग्लोबल साउथ के साथ तकनीकी एवं संस्थागत क्षमताएं साझा कर रहा है। जांजीबार में भारत के बाहर पहला आईटीआई कैंपस इस प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
ICWA की भविष्य की भूमिका के बारे में उपराष्ट्रपति ने क्या कहा?
उपराष्ट्रपति ने ICWA से आग्रह किया कि वह नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट, ग्लोबल साउथ और इंडो-पैसिफिक नीतियों पर शोध को मजबूत करे और साइबर सुरक्षा व अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में काम का दायरा बढ़ाए। उन्होंने ICWA को विकसित भारत-2047 के लिए बौद्धिक रूप से तैयार करने का लक्ष्य रखा।
'वसुधैव कुटुंबकम' को भारत किस प्रकार व्यवहार में ला रहा है?
उपराष्ट्रपति ने कोविड काल की वैक्सीन मैत्री, आपदा-प्रबंधन पहलें, LiFE मिशन, इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस को 'वसुधैव कुटुंबकम' के व्यावहारिक उदाहरण बताया। इन पहलों के माध्यम से भारत वैश्विक साझेदारी को व्यावहारिक स्वरूप दे रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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