उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का आईएएस प्रशिक्षुओं से आह्वान: सत्यनिष्ठा ही असली नेतृत्व
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 20 अगस्त 2026 को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि नेतृत्व की कसौटी सत्ता नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में नैतिक निर्णय लेने की दृढ़ता है। यह संबोधन द्वितीय चरण के प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम के अवसर पर दिया गया, जो उपराष्ट्रपति के उत्तराखंड के दो दिवसीय राजकीय दौरे का अंतिम दिन था।
मुख्य संदेश: नैतिकता और जवाबदेही
राधाकृष्णन ने युवा अधिकारियों से कहा कि उनकी सेवा तभी सार्थक होगी जब वे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकें। उन्होंने 'विकसित भारत' की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए जोर दिया कि विकास का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचना चाहिए, हर शिकायत सुनी जानी चाहिए और प्रत्येक नागरिक को सशक्त महसूस होना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है।
प्रौद्योगिकी को अपनाने पर बल
उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों को दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक सेवा वितरण में सुधार के लिए अपनाने की सलाह दी। उन्होंने निरंतर सीखने और अनुकूलनशीलता को भविष्य की सिविल सेवा की अनिवार्य शर्त बताया। गौरतलब है कि डिजिटल शासन की दिशा में यह आह्वान केंद्र सरकार की व्यापक डिजिटल इंडिया प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
टीम उत्कृष्टता और संस्थागत निरंतरता
राधाकृष्णन ने व्यक्तिगत या समूह श्रेय से ऊपर उठकर टीम उत्कृष्टता के लिए काम करने का आग्रह किया। उन्होंने एकजुट टीमें बनाने, सहकर्मियों को प्रेरित करने और पूर्ववर्तियों द्वारा स्थापित श्रेष्ठ प्रशासनिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया। सिविल सेवाओं को उन्होंने नीति और उसके जमीनी क्रियान्वयन के बीच की 'महत्वपूर्ण कड़ी' बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य
समापन समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और एलबीएसएनएए के निदेशक बी. राजेंद्र उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि भी अर्पित की।
दौरे का पहला दिन: वन सेवा प्रशिक्षुओं से संवाद
अपने उत्तराखंड दौरे के पहले दिन बुधवार, 19 अगस्त को उपराष्ट्रपति ने देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईएनजीएफए) का दौरा किया और 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) प्रशिक्षुओं से संवाद किया। यह दौरा प्रशासनिक और वन सेवा — दोनों संवर्गों में नैतिक नेतृत्व की एकसमान अपेक्षा को रेखांकित करता है।