20 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का आईएएस प्रशिक्षुओं से आह्वान: सत्यनिष्ठा ही असली नेतृत्व

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का आईएएस प्रशिक्षुओं से आह्वान: सत्यनिष्ठा ही असली नेतृत्व

सारांश

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का एलबीएसएनएए में संदेश महज औपचारिक आशीर्वाद नहीं था — यह नई पीढ़ी के अफसरों को याद दिलाना था कि शक्ति नहीं, नैतिकता ही असली नेतृत्व है। AI और ब्लॉकचेन अपनाने से लेकर 'विकसित भारत' के अंतिम छोर तक पहुँचने तक — यह भाषण आधुनिक सिविल सेवा की नई रूपरेखा था।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 20 अगस्त 2026 को एलबीएसएनएए, मसूरी में 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षुओं के समापन कार्यक्रम को संबोधित किया।
नेतृत्व की परिभाषा शक्ति नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में नैतिक निर्णय लेने की क्षमता बताई।
AI, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों को सुशासन के लिए अपनाने का आह्वान किया।
' विकसित भारत ' की परिकल्पना में विकास का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह , मंत्री गणेश जोशी और निदेशक बी.
राजेंद्र उपस्थित रहे।
दौरे के पहले दिन उपराष्ट्रपति ने आईएनजीएफए में 2025-27 बैच के आईएफएस प्रशिक्षुओं से भी संवाद किया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 20 अगस्त 2026 को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि नेतृत्व की कसौटी सत्ता नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में नैतिक निर्णय लेने की दृढ़ता है। यह संबोधन द्वितीय चरण के प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम के अवसर पर दिया गया, जो उपराष्ट्रपति के उत्तराखंड के दो दिवसीय राजकीय दौरे का अंतिम दिन था।

मुख्य संदेश: नैतिकता और जवाबदेही

राधाकृष्णन ने युवा अधिकारियों से कहा कि उनकी सेवा तभी सार्थक होगी जब वे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकें। उन्होंने 'विकसित भारत' की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए जोर दिया कि विकास का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचना चाहिए, हर शिकायत सुनी जानी चाहिए और प्रत्येक नागरिक को सशक्त महसूस होना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है।

प्रौद्योगिकी को अपनाने पर बल

उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों को दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक सेवा वितरण में सुधार के लिए अपनाने की सलाह दी। उन्होंने निरंतर सीखने और अनुकूलनशीलता को भविष्य की सिविल सेवा की अनिवार्य शर्त बताया। गौरतलब है कि डिजिटल शासन की दिशा में यह आह्वान केंद्र सरकार की व्यापक डिजिटल इंडिया प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

टीम उत्कृष्टता और संस्थागत निरंतरता

राधाकृष्णन ने व्यक्तिगत या समूह श्रेय से ऊपर उठकर टीम उत्कृष्टता के लिए काम करने का आग्रह किया। उन्होंने एकजुट टीमें बनाने, सहकर्मियों को प्रेरित करने और पूर्ववर्तियों द्वारा स्थापित श्रेष्ठ प्रशासनिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया। सिविल सेवाओं को उन्होंने नीति और उसके जमीनी क्रियान्वयन के बीच की 'महत्वपूर्ण कड़ी' बताया।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य

समापन समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और एलबीएसएनएए के निदेशक बी. राजेंद्र उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि भी अर्पित की।

दौरे का पहला दिन: वन सेवा प्रशिक्षुओं से संवाद

अपने उत्तराखंड दौरे के पहले दिन बुधवार, 19 अगस्त को उपराष्ट्रपति ने देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईएनजीएफए) का दौरा किया और 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) प्रशिक्षुओं से संवाद किया। यह दौरा प्रशासनिक और वन सेवा — दोनों संवर्गों में नैतिक नेतृत्व की एकसमान अपेक्षा को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सांकेतिक भी है। AI और ब्लॉकचेन अपनाने का आह्वान स्वागतयोग्य है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि प्रशिक्षण कक्ष के ये आदर्श जिला कलेक्टर की कुर्सी पर बैठने के बाद कितने टिकते हैं। 'अंतिम छोर तक विकास' का नारा दशकों पुराना है — नई पीढ़ी के अफसरों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस मापन तंत्र की जरूरत है, जो इस भाषण में अनुपस्थित रहा।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने एलबीएसएनएए में क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 20 अगस्त 2026 को मसूरी की एलबीएसएनएए में 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षुओं से कहा कि नेतृत्व की पहचान शक्ति से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में नैतिक रूप से कार्य करने की क्षमता से होती है। उन्होंने AI, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों को सुशासन में अपनाने का भी आह्वान किया।
एलबीएसएनएए का यह समापन कार्यक्रम किस बैच के लिए था?
यह कार्यक्रम 2024 बैच के आईएएस अधिकारी प्रशिक्षुओं के द्वितीय चरण के प्रशिक्षण के समापन पर आयोजित किया गया था। यह उपराष्ट्रपति के उत्तराखंड के दो दिवसीय राजकीय दौरे का अंतिम दिन भी था।
उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को प्रौद्योगिकी के बारे में क्या सलाह दी?
राधाकृष्णन ने अधिकारियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया, ताकि दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक सेवा वितरण को बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने निरंतर सीखने और अनुकूलनशीलता को भविष्य की सिविल सेवा की अनिवार्य शर्त बताया।
उपराष्ट्रपति के उत्तराखंड दौरे में और क्या हुआ?
दौरे के पहले दिन बुधवार, 19 अगस्त को उपराष्ट्रपति ने देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईएनजीएफए) का दौरा किया और 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) प्रशिक्षुओं से संवाद किया। समापन कार्यक्रम में उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि भी अर्पित की।
'विकसित भारत' के संदर्भ में अधिकारियों से क्या अपेक्षा जताई गई?
उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से सुनिश्चित करने को कहा कि विकास का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचे, हर नागरिक की शिकायत सुनी जाए और प्रत्येक व्यक्ति सशक्त महसूस करे। उन्होंने टीम उत्कृष्टता और पूर्ववर्तियों की श्रेष्ठ परंपराओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले