28 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'ज्ञानी अर्थ' एआई स्टैक लॉन्च: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — 'सृजनकर्ता बनो, उपभोक्ता नहीं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'ज्ञानी अर्थ' एआई स्टैक लॉन्च: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — 'सृजनकर्ता बनो, उपभोक्ता नहीं'

सारांश

'ज्ञानी अर्थ' सिर्फ एक और एआई लॉन्च नहीं है — यह भारत के उस दावे की परीक्षा है कि वह वैश्विक एआई दौड़ में उपभोक्ता से निर्माता बन सकता है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की मौजूदगी इस संदेश को राजनीतिक वज़न देती है कि स्वदेशी एलएलएम अब प्रयोगशाला से बाहर निकलकर राष्ट्रीय एजेंडे पर है।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 28 अगस्त 2026 को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में 'ज्ञानी अर्थ' एआई स्टैक का शुभारंभ किया।
स्टैक में स्वदेशी बड़ा भाषा मॉडल 'इवोन 3.3' और एंटरप्राइज़ प्लेटफॉर्म 'प्लेक्सस' शामिल हैं।
इसे 'ज्ञानी एआई' के सीईओ गणेश गोपालन और सह-संस्थापक व सीटीओ अनंत नागराज की टीम ने विकसित किया।
संसद में एआई-आधारित अनुवाद सुविधा अभी 8 भाषाओं में उपलब्ध, शीघ्र सभी अनुसूचित भाषाओं तक विस्तार होगा।
उपराष्ट्रपति ने इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम बताया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में स्वदेशी एआई स्टैक 'ज्ञानी अर्थ' का औपचारिक शुभारंभ किया। इसे भारतीय एआई कंपनी 'ज्ञानी एआई' ने विकसित किया है और इसमें बड़ा भाषा मॉडल 'इवोन 3.3' तथा एंटरप्राइज़ इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म 'प्लेक्सस' शामिल हैं। यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब भारत वैश्विक एआई दौड़ में स्वदेशी तकनीकी क्षमता स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।

मंच पर क्या हुआ

शुभारंभ समारोह में उपराष्ट्रपति ने 'इवोन 3.3' और 'प्लेक्सस' के संयोजन को भारत के प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती ताकत का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि यह स्टैक यह सिद्ध करता है कि भारतीय इंजीनियर केवल अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग नहीं करते, बल्कि उनका निर्माण भी करने में सक्षम हैं।

'ज्ञानी एआई' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गणेश गोपालन और सह-संस्थापक व मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी अनंत नागराज को उपराष्ट्रपति ने इस उपलब्धि पर बधाई दी।

तकनीकी आत्मनिर्भरता पर ज़ोर

राधाकृष्णन ने टाइपराइटर और व्यक्तिगत कंप्यूटर के सीमित उपयोग के युग से आज के कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बड़े भाषा मॉडल के दौर तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी परिवर्तन को लेकर घबराहट नई नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि कंप्यूटर के आने पर नौकरियाँ जाने की चिंताएँ थीं, किंतु वास्तव में आईटी क्षेत्र ने भारत और विदेशों में रोज़गार के अनेक अवसर सृजित किए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एआई भी रोज़गार और विकास के नए रास्ते खोलेगा। उनका स्पष्ट संदेश था — "हमें हमेशा उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए। हमें सृजन करना होगा, ताकि दूसरे उसका उपयोग कर सकें।"

सरकारी पहलों का संदर्भ

उपराष्ट्रपति ने 'इंडिया एआई मिशन' और 'एआई उत्कृष्टता केंद्र' जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये देश में तकनीकी बदलाव को गति दे रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और 'भारत प्रथम' दृष्टिकोण को उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने का श्रेय दिया।

सेमीकंडक्टर विनिर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत बहुत पहले चिप्स का उत्पादन शुरू कर सकता था और संभवतः अब तक वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इस क्षेत्र को नई गति मिली है।

संसद में एआई का विस्तार

राधाकृष्णन ने 'डिजिटल संसद' पोर्टल का उल्लेख करते हुए बताया कि संसदीय बहसों और दस्तावेज़ों को अब कई भारतीय भाषाओं में पढ़ा जा सकता है। हाल ही में समाप्त हुए सत्र में आठ भाषाओं में एआई-आधारित अनुवाद सुविधा शुरू की गई, और शीघ्र ही इसे सभी अनुसूचित भाषाओं तक विस्तारित किया जाएगा।

विकसित भारत 2047 की दिशा

उपराष्ट्रपति ने 'ज्ञानी अर्थ' को तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भारत की व्यापक राष्ट्रीय यात्रा का हिस्सा बताया। उनके अनुसार तकनीकी क्षमता 2047 में 'विकसित भारत' के लक्ष्य की प्राप्ति में एक महत्वपूर्ण स्तंभ होगी। गौरतलब है कि 'इवोन 3.3' जैसे स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल का विकास भारत को उस वैश्विक एआई श्रृंखला में एक निर्माता की भूमिका दिला सकता है, जिसमें अब तक वह मुख्यतः उपभोक्ता रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'इवोन 3.3' अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क पर कहाँ खड़ा है — यह जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। भारत में स्वदेशी एलएलएम की घोषणाएँ पहले भी हुई हैं, पर अधिकांश उत्पाद-स्तरीय तैनाती तक नहीं पहुँच पाईं। 'प्लेक्सस' का एंटरप्राइज़ इंटीग्रेशन मॉडल व्यावसायिक व्यवहार्यता का संकेत देता है, किंतु सरकारी संरक्षण के बिना बाज़ार में टिके रहना कठिन होगा। तकनीकी आत्मनिर्भरता का लक्ष्य सराहनीय है — पर उसे मापने के लिए पारदर्शी प्रदर्शन डेटा ज़रूरी है, जो अभी अनुपस्थित है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ज्ञानी अर्थ' एआई स्टैक क्या है?
'ज्ञानी अर्थ' एक स्वदेशी एआई स्टैक है जिसे भारतीय कंपनी 'ज्ञानी एआई' ने विकसित किया है। इसमें बड़ा भाषा मॉडल 'इवोन 3.3' और एंटरप्राइज़ इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म 'प्लेक्सस' शामिल हैं, जो एआई इंटेलिजेंस को वास्तविक दुनिया के कामों और संस्थानों से जोड़ता है।
'इवोन 3.3' और 'प्लेक्सस' में क्या अंतर है?
'इवोन 3.3' एक बड़ा भाषा मॉडल (LLM) है जो भाषाई समझ और उत्पादन के लिए बनाया गया है, जबकि 'प्लेक्सस' एक प्लेटफॉर्म है जो इस एआई क्षमता को वास्तविक संस्थानों और कार्यप्रणालियों से जोड़ता है। दोनों मिलकर 'ज्ञानी अर्थ' स्टैक बनाते हैं।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने एआई पर क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए — 'हमें सृजन करना होगा, ताकि दूसरे उसका उपयोग कर सकें।' उन्होंने एआई को रोज़गार के लिए खतरा नहीं, बल्कि नए अवसरों का स्रोत बताया।
संसद में एआई अनुवाद सुविधा कितनी भाषाओं में उपलब्ध है?
उपराष्ट्रपति के अनुसार हाल ही में समाप्त हुए संसद सत्र में आठ भाषाओं में एआई-आधारित अनुवाद सुविधा शुरू की गई। शीघ्र ही इसे सभी अनुसूचित भाषाओं तक विस्तारित किया जाएगा।
'ज्ञानी अर्थ' विकसित भारत 2047 से कैसे जुड़ा है?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 'ज्ञानी अर्थ' को तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भारत की राष्ट्रीय यात्रा का हिस्सा बताया। उनके अनुसार तकनीकी क्षमता 2047 में 'विकसित भारत' के लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण स्तंभ होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले