IIT मद्रास का 'फाइबॉल' लॉन्च: बास्केटबॉल से प्रेरित, 21 खिलाड़ी और 3 टीमों का अनोखा खेल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर एक नया इनवेज़न स्पोर्ट — 'फाइबॉल' — लॉन्च करने जा रहा है। यह खेल बास्केटबॉल से प्रेरित है और इसमें एक गोल कोर्ट पर एक साथ तीन टीमें और 21 खिलाड़ी भाग लेते हैं। इस आयोजन में संस्थान के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी, फैकल्टी सदस्य और छात्र शामिल होंगे।
फाइबॉल क्या है और कैसे खेला जाता है
फाइबॉल में तीन टीमें एक साथ एक गोल कोर्ट पर प्रतिस्पर्धा करती हैं। प्रत्येक टीम के लिए एक अलग बास्केट होती है और हर टीम का लक्ष्य अपनी बास्केट को बाकी दोनों टीमों से बचाना होता है। इस खेल में गति, टीमवर्क और त्वरित तकनीकी निर्णय-क्षमता तीनों का समावेश है।
IIT मद्रास ने फाइबॉल क्यों बनाया
IIT मद्रास के डीन प्रो. सत्यनारायण एन. गुम्माडी ने बताया, 'अगर आपको याद हो तो पिछले अप्रैल में, हमने ओमेगा बॉल गेम लॉन्च किया था, यह फुटबॉल खेलने का एक अलग तरीका है। उस समय, हमने सोचा कि, तो क्यों न हम इंडिया में एक गेम बनाएं और इसे इंडियन स्पोर्ट्स के लोगों के लिए लॉन्च करें।'
प्रो. गुम्माडी ने आगे कहा कि बास्केटबॉल को आधार खेल के रूप में इसलिए चुना गया, क्योंकि यह देश के सरकारी और ग्रामीण स्कूलों में कोर्ट की ऊँची लागत के कारण व्यापक रूप से नहीं खेला जाता। फाइबॉल इस बाधा को कम करने की कोशिश है — इसके लिए बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता न्यूनतम है।
छात्रों की प्रतिक्रिया
B.Tech तृतीय वर्ष के एक छात्र ने उत्साह के साथ कहा कि उन्होंने पहले कभी फाइबॉल के बारे में नहीं सुना था, लेकिन यह विचार शानदार है और इससे बास्केटबॉल कौशल को भी बढ़ावा मिलेगा। अंतिम वर्ष की छात्रा हर्षिता ने कहा, 'आईआईटी मद्रास के लिए पारंपरिक खेलों को लांच करने के दृष्टिकोण से यह साल शानदार रहा है। भारत की जनसंख्या और जगह की उपलब्धता को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा खेलों को लाने की जरूरत है।'
ओमेगा बॉल के बाद एक और नई पहल
गौरतलब है कि IIT मद्रास इससे पहले अप्रैल 2026 में ओमेगा बॉल — फुटबॉल का एक नया स्वरूप — लॉन्च कर चुका है। फाइबॉल उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है, जो भारत में खेल संस्कृति को नई दिशा देने की दिशा में संस्थान के बढ़ते प्रयासों को दर्शाती है।
आगे की राह
हर्षिता के अनुसार, फाइबॉल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसे कम संसाधनों में खेला जा सकता है, जिससे यह ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हो सकता है। यदि यह खेल व्यापक स्तर पर अपनाया जाता है, तो यह भारतीय खेल परिदृश्य में एक नई और सुलभ विधा के रूप में स्थापित हो सकता है।