बाइचुंग भूटिया बोले — ग्रासरूट निवेश और IFA के विस्तार से बदलेगी भारतीय फुटबॉल की तस्वीर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने 23 जुलाई को सिलीगुड़ी में मीडिया से बातचीत में कहा कि भारतीय फुटबॉल में सकारात्मक बदलाव की पूरी संभावना है, बशर्ते नई सरकार और संबंधित संस्थाओं को पर्याप्त समय और समर्थन दिया जाए। उन्होंने जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और कहा कि बिना मज़बूत ग्रासरूट ढाँचे के कोई भी बड़ी योजना टिकाऊ नहीं होगी।
नई सरकार और खेल नीति पर भूटिया का नज़रिया
भूटिया ने कहा, 'नई सरकार कई महत्वपूर्ण बदलाव करने की दिशा में काम करेगी और खिलाड़ियों तथा खेलों के हित में फ़ैसले लिए जाएंगे। हमें नई सरकार को समय देना चाहिए। हम खिलाड़ियों की हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय फुटबॉल प्रशासन में बदलाव की माँग लंबे समय से उठती रही है।
IFA का दायरा कोलकाता से बाहर बढ़ाना ज़रूरी
पूर्व कप्तान ने भारतीय फुटबॉल संघ (IFA) पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि संघ को अपना ध्यान केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि पूरे राज्य, और विशेष रूप से हर ज़िले में फुटबॉल के विकास पर समान रूप से काम होना चाहिए। भूटिया ने कहा कि उत्तर बंगाल में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं, जिन्हें सही अवसर और बेहतर सुविधाएँ मिलनी चाहिए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 और भारत की पदक संभावनाएँ
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर भूटिया ने चिंता जताई कि इस बार प्रतियोगिता में खेलों की संख्या काफ़ी सीमित है। इससे कई देशों, ख़ासकर भारत, की पदक संभावनाओं पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत को कुश्ती सहित कई खेलों में पदक जीतने की अच्छी उम्मीद रहती है, लेकिन कुश्ती के शामिल न होने से भारतीय दल को पदकों का नुकसान हो सकता है।
कुरासाओ और काबो वर्डे से सीखने की ज़रूरत
भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए भूटिया ने छोटे देशों के खेल मॉडल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कुरासाओ और काबो वर्डे जैसे देश — जो हाल ही में फीफा विश्व कप 2026 का हिस्सा रहे — बेहद कम आबादी के बावजूद फुटबॉल में लगातार अच्छे खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं। इसके पीछे मज़बूत जमीनी ढाँचा, दीर्घकालिक योजना और युवा खिलाड़ियों पर निरंतर निवेश है।
भारतीय फुटबॉल का रास्ता: सामूहिक प्रयास और ज़िला-स्तरीय विस्तार
भूटिया ने कहा कि यदि भारत में भी ग्रासरूट स्तर पर योजनाबद्ध तरीक़े से काम किया जाए, स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर दिए जाएँ और ज़िलों तक खेल ढाँचे का विस्तार किया जाए, तो भारतीय फुटबॉल नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। उनके अनुसार, खिलाड़ियों, प्रशासकों और सरकार के सामूहिक प्रयास से ही भारतीय फुटबॉल का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।