23 जुलाई 2026
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बाइचुंग भूटिया बोले — ग्रासरूट निवेश और IFA के विस्तार से बदलेगी भारतीय फुटबॉल की तस्वीर

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बाइचुंग भूटिया बोले — ग्रासरूट निवेश और IFA के विस्तार से बदलेगी भारतीय फुटबॉल की तस्वीर

सारांश

पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने सिलीगुड़ी में साफ़ कहा — IFA को कोलकाता की सीमा तोड़नी होगी, उत्तर बंगाल की प्रतिभाओं को मौका देना होगा, और कुरासाओ-काबो वर्डे जैसे छोटे देशों के ग्रासरूट मॉडल से सीखना होगा। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुश्ती की अनुपस्थिति पर भी उन्होंने चिंता जताई।

मुख्य बातें

बाइचुंग भूटिया ने 23 जुलाई को सिलीगुड़ी में भारतीय फुटबॉल में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई, नई सरकार को समय देने की अपील की।
IFA को अपना ध्यान केवल कोलकाता तक सीमित न रखकर पूरे राज्य और हर ज़िले तक फुटबॉल विकास फैलाना चाहिए।
उत्तर बंगाल में प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं, जिन्हें सही अवसर और बेहतर सुविधाएँ मिलनी चाहिए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुश्ती के न होने से भारतीय दल की पदक संभावनाओं पर असर पड़ने की आशंका।
कुरासाओ और काबो वर्डे — दोनों फीफा विश्व कप 2026 प्रतिभागी — के ग्रासरूट मॉडल को भारत के लिए अनुकरणीय बताया।

भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने 23 जुलाई को सिलीगुड़ी में मीडिया से बातचीत में कहा कि भारतीय फुटबॉल में सकारात्मक बदलाव की पूरी संभावना है, बशर्ते नई सरकार और संबंधित संस्थाओं को पर्याप्त समय और समर्थन दिया जाए। उन्होंने जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और कहा कि बिना मज़बूत ग्रासरूट ढाँचे के कोई भी बड़ी योजना टिकाऊ नहीं होगी।

नई सरकार और खेल नीति पर भूटिया का नज़रिया

भूटिया ने कहा, 'नई सरकार कई महत्वपूर्ण बदलाव करने की दिशा में काम करेगी और खिलाड़ियों तथा खेलों के हित में फ़ैसले लिए जाएंगे। हमें नई सरकार को समय देना चाहिए। हम खिलाड़ियों की हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय फुटबॉल प्रशासन में बदलाव की माँग लंबे समय से उठती रही है।

IFA का दायरा कोलकाता से बाहर बढ़ाना ज़रूरी

पूर्व कप्तान ने भारतीय फुटबॉल संघ (IFA) पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि संघ को अपना ध्यान केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि पूरे राज्य, और विशेष रूप से हर ज़िले में फुटबॉल के विकास पर समान रूप से काम होना चाहिए। भूटिया ने कहा कि उत्तर बंगाल में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं, जिन्हें सही अवसर और बेहतर सुविधाएँ मिलनी चाहिए।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 और भारत की पदक संभावनाएँ

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर भूटिया ने चिंता जताई कि इस बार प्रतियोगिता में खेलों की संख्या काफ़ी सीमित है। इससे कई देशों, ख़ासकर भारत, की पदक संभावनाओं पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत को कुश्ती सहित कई खेलों में पदक जीतने की अच्छी उम्मीद रहती है, लेकिन कुश्ती के शामिल न होने से भारतीय दल को पदकों का नुकसान हो सकता है।

कुरासाओ और काबो वर्डे से सीखने की ज़रूरत

भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए भूटिया ने छोटे देशों के खेल मॉडल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कुरासाओ और काबो वर्डे जैसे देश — जो हाल ही में फीफा विश्व कप 2026 का हिस्सा रहे — बेहद कम आबादी के बावजूद फुटबॉल में लगातार अच्छे खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं। इसके पीछे मज़बूत जमीनी ढाँचा, दीर्घकालिक योजना और युवा खिलाड़ियों पर निरंतर निवेश है।

भारतीय फुटबॉल का रास्ता: सामूहिक प्रयास और ज़िला-स्तरीय विस्तार

भूटिया ने कहा कि यदि भारत में भी ग्रासरूट स्तर पर योजनाबद्ध तरीक़े से काम किया जाए, स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर दिए जाएँ और ज़िलों तक खेल ढाँचे का विस्तार किया जाए, तो भारतीय फुटबॉल नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। उनके अनुसार, खिलाड़ियों, प्रशासकों और सरकार के सामूहिक प्रयास से ही भारतीय फुटबॉल का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनके पीछे एक पुरानी और अनसुलझी समस्या है — IFA दशकों से कोलकाता-केंद्रित रहा है और उत्तर बंगाल जैसे प्रतिभा-समृद्ध क्षेत्र हाशिये पर रहे हैं। कुरासाओ और काबो वर्डे का उदाहरण सटीक है, लेकिन उन देशों की सफलता सिर्फ 'इच्छाशक्ति' से नहीं, बल्कि दशकों के संस्थागत निवेश से आई है। सवाल यह है कि नई सरकार को 'समय देने' की अपील के साथ-साथ जवाबदेही का ढाँचा कौन तय करेगा — और कब।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाइचुंग भूटिया ने भारतीय फुटबॉल के बारे में क्या कहा?
भूटिया ने 23 जुलाई को सिलीगुड़ी में कहा कि भारतीय फुटबॉल में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है, बशर्ते नई सरकार और संबंधित संस्थाओं को पर्याप्त समय दिया जाए। उन्होंने ग्रासरूट स्तर पर खिलाड़ियों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
भूटिया ने IFA की आलोचना क्यों की?
भूटिया ने कहा कि भारतीय फुटबॉल संघ (IFA) को अपना दायरा केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उनके अनुसार, उत्तर बंगाल सहित पूरे राज्य के हर ज़िले में फुटबॉल विकास पर समान ध्यान दिया जाना चाहिए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की पदक संभावनाओं पर भूटिया की क्या राय है?
भूटिया ने चिंता जताई कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में खेलों की संख्या सीमित है और कुश्ती के शामिल न होने से भारतीय दल को पदकों का नुकसान हो सकता है, क्योंकि कुश्ती में भारत की पदक जीतने की परंपरागत रूप से अच्छी संभावना रहती है।
भूटिया ने कुरासाओ और काबो वर्डे का उदाहरण क्यों दिया?
भूटिया ने इन दोनों देशों — जो फीफा विश्व कप 2026 का हिस्सा रहे — को इसलिए उदाहरण के रूप में पेश किया क्योंकि बेहद कम आबादी के बावजूद ये मज़बूत जमीनी ढाँचे, दीर्घकालिक योजना और युवा निवेश के बल पर लगातार अच्छे फुटबॉलर तैयार कर रहे हैं।
भारतीय फुटबॉल को बेहतर बनाने के लिए भूटिया का सुझाव क्या है?
भूटिया ने कहा कि ग्रासरूट स्तर पर योजनाबद्ध काम, स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर, और ज़िलों तक खेल ढाँचे का विस्तार ज़रूरी है। खिलाड़ियों, प्रशासकों और सरकार के सामूहिक प्रयास से ही भारतीय फुटबॉल का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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